पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 182 अब BNSS धारा 202 है
धारा 182. पत्रों आदि द्वारा किए गए अपराध
पुराना कानून
CrPC §182
धारा 182. पत्रों आदि द्वारा किए गए अपराध
182. पत्रों आदि द्वारा किए गए अपराध
(1) ऐसे किसी अपराध की, जिसके अंतर्गत छल है, यदि प्रवंचना पत्रों या दूरसंचार संदेशों के माध्यम से की जाती है, तो जांच या विचारण ऐसे किसी न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर ऐसे पत्र या संदेश भेजे गए थे या प्राप्त किए गए थे; और छल करने तथा संपत्ति का परिदान बेईमानी से उत्प्रेरित करने के किसी अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर प्रवंचित व्यक्ति द्वारा वह संपत्ति परिदत्त की गई थी, या अभियुक्त व्यक्ति द्वारा प्राप्त की गई थी।
(2) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 495 या धारा 494 के अधीन दंडनीय किसी अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह अपराध किया गया था, अथवा अपराधी ने प्रथम विवाह से अपनी पत्नी या अपने पति के साथ अंतिम बार निवास किया था, अथवा प्रथम विवाह की पत्नी ने अपराध किए जाने के पश्चात् स्थायी निवास कर लिया है।
पूरा पढ़ें: CrPC §182(1) ऐसे किसी अपराध की, जिसके अंतर्गत छल है, यदि प्रवंचना पत्रों या दूरसंचार संदेशों के माध्यम से की जाती है, तो जांच या विचारण ऐसे किसी न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर ऐसे पत्र या संदेश भेजे गए थे या प्राप्त किए गए थे; और छल करने तथा संपत्ति का परिदान बेईमानी से उत्प्रेरित करने के किसी अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर प्रवंचित व्यक्ति द्वारा वह संपत्ति परिदत्त की गई थी, या अभियुक्त व्यक्ति द्वारा प्राप्त की गई थी।
(2) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 495 या धारा 494 के अधीन दंडनीय किसी अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह अपराध किया गया था, अथवा अपराधी ने प्रथम विवाह से अपनी पत्नी या अपने पति के साथ अंतिम बार निवास किया था, अथवा प्रथम विवाह की पत्नी ने अपराध किए जाने के पश्चात् स्थायी निवास कर लिया है।
नया कानून
BNSS §202
इलेक्ट्रॉनिक संचार, पत्रों आदि के माध्यम से किए गए अपराध।
(1) धोखाधड़ी से संबंधित कोई भी अपराध, यदि धोखाधड़ी इलेक्ट्रॉनिक संचार, पत्रों या दूरसंचार संदेशों के माध्यम से की गई हो, तो उस न्यायालय द्वारा जांच या मुकदमा चलाया जा सकता है जिसके स्थानीय क्षेत्राधिकार में ऐसे इलेक्ट्रॉनिक संचार, पत्र या संदेश भेजे गए हों या प्राप्त हुए हों; और धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति सौंपने के लिए प्रेरित करने के किसी भी अपराध की जांच या मुकदमा उस न्यायालय द्वारा चलाया जा सकता है जिसके स्थानीय क्षेत्राधिकार में धोखा खाए व्यक्ति द्वारा संपत्ति सौंपी गई हो या आरोपी व्यक्ति द्वारा प्राप्त की गई हो।
(2) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 82 के तहत दंडनीय किसी भी अपराध की जांच या मुकदमा उस न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसके स्थानीय क्षेत्राधिकार में अपराध किया गया था या अपराधी अपने प्रथम विवाह से संबंधित पति या पत्नी के साथ अंतिम बार निवास करता था या प्रथम विवाह से संबंधित पत्नी ने अपराध किए जाने के बाद स्थायी निवास ले लिया है।
पूरा पढ़ें: BNSS §202(2) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 82 के तहत दंडनीय किसी भी अपराध की जांच या मुकदमा उस न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसके स्थानीय क्षेत्राधिकार में अपराध किया गया था या अपराधी अपने प्रथम विवाह से संबंधित पति या पत्नी के साथ अंतिम बार निवास करता था या प्रथम विवाह से संबंधित पत्नी ने अपराध किए जाने के बाद स्थायी निवास ले लिया है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
