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CrPC धारा 116 अब BNSS धारा 135 है
धारा 116. इत्तिला की सत्यता के बारे में जांच
पुराना कानून
CrPC §116
धारा 116. इत्तिला की सत्यता के बारे में जांच
116. इत्तिला की सत्यता के बारे में जांच
(1) जब धारा 111 के अधीन कोई आदेश न्यायालय में किसी व्यक्ति को धारा 112 के अधीन पढ़कर सुनाया या समझाया गया है, या जब कोई व्यक्ति धारा 113 के अधीन जारी किए गए समन या वारंट के अनुपालन में या उसके निष्पादन में किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होता है या लाया जाता है, तब मजिस्ट्रेट उस इत्तिला की सत्यता की जांच करने के लिए, जिस पर कार्रवाई की गई है, तथा ऐसा अतिरिक्त साक्ष्य लेने के लिए, जो आवश्यक प्रतीत हो, अग्रसर होगा।
(2) ऐसी जांच, जहां तक साध्य हो, यथासंभव उस रीति से की जाएगी, जो समन-मामलों में विचारण करने और साक्ष्य अभिलिखित करने के लिए इसमें इसके पश्चात् विहित है।
(3) उपधारा (1) के अधीन जांच के प्रारंभ के पश्चात् और उसके पूरा होने से पूर्व, यदि मजिस्ट्रेट यह समझता है कि परिशांति भंग के या लोक प्रशांति के विक्षोभ के या किसी अपराध के किए जाने के निवारण के लिए, या लोक सुरक्षा के लिए, तुरंत उपाय आवश्यक हैं, तो वह, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, उस व्यक्ति को, जिसके संबंध में धारा 111 के अधीन आदेश किया गया है, यह निदेश दे सकेगा कि वह जांच के समापन तक परिशांति कायम रखने या सदाचार बनाए रखने के लिए प्रतिभुओं सहित या रहित बंधपत्र निष्पादित करे, और उसे तब तक अभिरक्षा में निरुद्ध रख सकेगा जब तक ऐसा बंधपत्र निष्पादित नहीं कर दिया जाता, या निष्पादन के अभाव में, जब तक जांच समाप्त नहीं हो जाती:
परन्तु—
(क) किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके विरुद्ध धारा 108, धारा 109 या धारा 110 के अधीन कार्यवाही नहीं की जा रही है, सदाचार बनाए रखने के लिए बंधपत्र निष्पादित करने का निदेश नहीं दिया जाएगा;
(ख) ऐसे बंधपत्र की शर्तें, चाहे वे उसकी रकम के बारे में हों या प्रतिभुओं के दिए जाने या उनकी संख्या या उनके दायित्व के धन-संबंधी विस्तार के बारे में, धारा 111 के अधीन किए गए आदेश में विनिर्दिष्ट शर्तों से अधिक भारी नहीं होंगी।
(4) इस धारा के प्रयोजनों के लिए यह तथ्य कि कोई व्यक्ति अभ्यस्त अपराधी है या इतना आततायी और खतरनाक है कि उसका प्रतिभूति के बिना स्वच्छंद रहना समुदाय के लिए संकटपूर्ण है, साधारण ख्याति के साक्ष्य द्वारा या अन्यथा साबित किया जा सकेगा।
(5) जहां दो या अधिक व्यक्ति जांचाधीन विषय में एक-दूसरे से संबद्ध रहे हैं, वहां उनके मामलों का निपटारा एक ही जांच में या पृथक्-पृथक् जांचों में, जैसा मजिस्ट्रेट न्यायसंगत समझे, किया जा सकेगा।
(6) इस धारा के अधीन जांच उसके प्रारंभ की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर पूरी की जाएगी, और यदि ऐसी जांच इस प्रकार पूरी नहीं की जाती है, तो इस अध्याय के अधीन कार्यवाहियां उक्त अवधि की समाप्ति पर पर्यवसित हो जाएंगी, जब तक कि लेखबद्ध किए जाने वाले विशेष कारणों से मजिस्ट्रेट अन्यथा निदेश न दे:
परन्तु जहां किसी व्यक्ति को ऐसी जांच लंबित रहने तक निरोध में रखा गया है, वहां उस व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही, यदि पहले पर्यवसित न हो जाए तो, ऐसे निरोध की छह मास की अवधि की समाप्ति पर पर्यवसित हो जाएगी।
(7) जहां उपधारा (6) के अधीन कार्यवाहियों को जारी रखने की अनुज्ञा देने वाला कोई निदेश दिया जाता है, वहां सेशन न्यायाधीश, व्यथित पक्षकार द्वारा उसे किए गए आवेदन पर, ऐसे निदेश को विखंडित कर सकेगा, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि वह किसी विशेष कारण पर आधारित नहीं था या विकृत था।
पूरा पढ़ें: CrPC §116(1) जब धारा 111 के अधीन कोई आदेश न्यायालय में किसी व्यक्ति को धारा 112 के अधीन पढ़कर सुनाया या समझाया गया है, या जब कोई व्यक्ति धारा 113 के अधीन जारी किए गए समन या वारंट के अनुपालन में या उसके निष्पादन में किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होता है या लाया जाता है, तब मजिस्ट्रेट उस इत्तिला की सत्यता की जांच करने के लिए, जिस पर कार्रवाई की गई है, तथा ऐसा अतिरिक्त साक्ष्य लेने के लिए, जो आवश्यक प्रतीत हो, अग्रसर होगा।
(2) ऐसी जांच, जहां तक साध्य हो, यथासंभव उस रीति से की जाएगी, जो समन-मामलों में विचारण करने और साक्ष्य अभिलिखित करने के लिए इसमें इसके पश्चात् विहित है।
(3) उपधारा (1) के अधीन जांच के प्रारंभ के पश्चात् और उसके पूरा होने से पूर्व, यदि मजिस्ट्रेट यह समझता है कि परिशांति भंग के या लोक प्रशांति के विक्षोभ के या किसी अपराध के किए जाने के निवारण के लिए, या लोक सुरक्षा के लिए, तुरंत उपाय आवश्यक हैं, तो वह, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, उस व्यक्ति को, जिसके संबंध में धारा 111 के अधीन आदेश किया गया है, यह निदेश दे सकेगा कि वह जांच के समापन तक परिशांति कायम रखने या सदाचार बनाए रखने के लिए प्रतिभुओं सहित या रहित बंधपत्र निष्पादित करे, और उसे तब तक अभिरक्षा में निरुद्ध रख सकेगा जब तक ऐसा बंधपत्र निष्पादित नहीं कर दिया जाता, या निष्पादन के अभाव में, जब तक जांच समाप्त नहीं हो जाती:
परन्तु—
(क) किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके विरुद्ध धारा 108, धारा 109 या धारा 110 के अधीन कार्यवाही नहीं की जा रही है, सदाचार बनाए रखने के लिए बंधपत्र निष्पादित करने का निदेश नहीं दिया जाएगा;
(ख) ऐसे बंधपत्र की शर्तें, चाहे वे उसकी रकम के बारे में हों या प्रतिभुओं के दिए जाने या उनकी संख्या या उनके दायित्व के धन-संबंधी विस्तार के बारे में, धारा 111 के अधीन किए गए आदेश में विनिर्दिष्ट शर्तों से अधिक भारी नहीं होंगी।
(4) इस धारा के प्रयोजनों के लिए यह तथ्य कि कोई व्यक्ति अभ्यस्त अपराधी है या इतना आततायी और खतरनाक है कि उसका प्रतिभूति के बिना स्वच्छंद रहना समुदाय के लिए संकटपूर्ण है, साधारण ख्याति के साक्ष्य द्वारा या अन्यथा साबित किया जा सकेगा।
(5) जहां दो या अधिक व्यक्ति जांचाधीन विषय में एक-दूसरे से संबद्ध रहे हैं, वहां उनके मामलों का निपटारा एक ही जांच में या पृथक्-पृथक् जांचों में, जैसा मजिस्ट्रेट न्यायसंगत समझे, किया जा सकेगा।
(6) इस धारा के अधीन जांच उसके प्रारंभ की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर पूरी की जाएगी, और यदि ऐसी जांच इस प्रकार पूरी नहीं की जाती है, तो इस अध्याय के अधीन कार्यवाहियां उक्त अवधि की समाप्ति पर पर्यवसित हो जाएंगी, जब तक कि लेखबद्ध किए जाने वाले विशेष कारणों से मजिस्ट्रेट अन्यथा निदेश न दे:
परन्तु जहां किसी व्यक्ति को ऐसी जांच लंबित रहने तक निरोध में रखा गया है, वहां उस व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही, यदि पहले पर्यवसित न हो जाए तो, ऐसे निरोध की छह मास की अवधि की समाप्ति पर पर्यवसित हो जाएगी।
(7) जहां उपधारा (6) के अधीन कार्यवाहियों को जारी रखने की अनुज्ञा देने वाला कोई निदेश दिया जाता है, वहां सेशन न्यायाधीश, व्यथित पक्षकार द्वारा उसे किए गए आवेदन पर, ऐसे निदेश को विखंडित कर सकेगा, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि वह किसी विशेष कारण पर आधारित नहीं था या विकृत था।
नया कानून
BNSS §135
सूचना की सत्यता की जांच।
(1) जब धारा 130 के तहत किसी आदेश को न्यायालय में उपस्थित किसी व्यक्ति को धारा 131 के तहत पढ़कर सुनाया गया हो या समझाया गया हो, या जब कोई व्यक्ति धारा 132 के तहत जारी किए गए समन या वारंट के अनुपालन में या निष्पादन में किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होता है या लाया जाता है, तो मजिस्ट्रेट उस सूचना की सत्यता की जांच करेगा जिस पर कार्रवाई की गई है, और ऐसे अतिरिक्त साक्ष्य लेगा जो आवश्यक प्रतीत हों।
(2) ऐसी जाँच यथासंभव, समन मामलों में परीक्षण करने और साक्ष्य दर्ज करने के लिए इसके बाद निर्धारित तरीके से की जाएगी।
(3) उपधारा (1) के तहत जांच शुरू होने के बाद और उसके पूरा होने से पहले, यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि शांति भंग होने या सार्वजनिक शांति भंग होने या किसी अपराध के होने से रोकने या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए तत्काल उपाय आवश्यक हैं, तो वह लिखित में कारण दर्ज करते हुए, उस व्यक्ति को, जिसके संबंध में धारा 130 के तहत आदेश दिया गया है, जांच पूरी होने तक शांति बनाए रखने या अच्छा व्यवहार करने के लिए बांड या जमानत बांड निष्पादित करने का निर्देश दे सकता है, और उसे बांड या जमानत बांड निष्पादित होने तक या निष्पादन में चूक होने पर, जांच पूरी होने तक हिरासत में रख सकता है:
उसे उपलब्ध कराया-
(क) जिस व्यक्ति के विरुद्ध धारा 127, धारा 128 या धारा 129 के अंतर्गत कार्यवाही नहीं की जा रही है, उसे अच्छे व्यवहार के लिए बांड या जमानत बांड निष्पादित करने का निर्देश नहीं दिया जाएगा;
(ख) ऐसे बांड की शर्तें, चाहे उसकी राशि के संबंध में हों या जमानतदारों के प्रावधान या उनकी संख्या या उनकी मौद्रिक देयता की सीमा के संबंध में हों, धारा 130 के तहत आदेश में निर्दिष्ट शर्तों से अधिक कठिन नहीं होंगी।
(4) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, यह तथ्य कि कोई व्यक्ति आदतन अपराधी है या इतना हताश और खतरनाक है कि उसका बिना सुरक्षा के खुलेआम रहना समुदाय के लिए खतरनाक है, सामान्य प्रतिष्ठा के साक्ष्य या अन्यथा द्वारा सिद्ध किया जा सकता है।
(5) जहां दो या दो से अधिक व्यक्ति जांच के अधीन मामले में एक साथ जुड़े हुए हैं, तो उनके साथ एक ही या अलग-अलग जांच में निपटा जा सकता है जैसा मजिस्ट्रेट उचित समझे।
(6) इस धारा के अंतर्गत जांच इसके प्रारंभ होने की तिथि से छह माह की अवधि के भीतर पूरी की जाएगी, और यदि ऐसी जांच पूरी नहीं होती है, तो उक्त अवधि की समाप्ति पर इस अध्याय के अंतर्गत कार्यवाही समाप्त हो जाएगी, जब तक कि लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले विशेष कारणों से मजिस्ट्रेट अन्यथा निर्देश न दे:
बशर्ते कि यदि किसी व्यक्ति को ऐसी जांच लंबित रहने के दौरान हिरासत में रखा गया है, तो उस व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही, यदि पहले समाप्त न की गई हो, तो ऐसी हिरासत की अवधि के छह महीने समाप्त होने पर स्वतः समाप्त हो जाएगी।
(7) जहाँ उपधारा (6) के अंतर्गत कार्यवाही जारी रखने की अनुमति देते हुए कोई निर्देश दिया जाता है, तो सत्र न्यायाधीश पीड़ित पक्ष द्वारा किए गए आवेदन पर ऐसे निर्देश को रद्द कर सकता है, यदि वह संतुष्ट हो कि यह किसी विशेष कारण पर आधारित नहीं था या अनुचित था।
पूरा पढ़ें: BNSS §135(2) ऐसी जाँच यथासंभव, समन मामलों में परीक्षण करने और साक्ष्य दर्ज करने के लिए इसके बाद निर्धारित तरीके से की जाएगी।
(3) उपधारा (1) के तहत जांच शुरू होने के बाद और उसके पूरा होने से पहले, यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि शांति भंग होने या सार्वजनिक शांति भंग होने या किसी अपराध के होने से रोकने या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए तत्काल उपाय आवश्यक हैं, तो वह लिखित में कारण दर्ज करते हुए, उस व्यक्ति को, जिसके संबंध में धारा 130 के तहत आदेश दिया गया है, जांच पूरी होने तक शांति बनाए रखने या अच्छा व्यवहार करने के लिए बांड या जमानत बांड निष्पादित करने का निर्देश दे सकता है, और उसे बांड या जमानत बांड निष्पादित होने तक या निष्पादन में चूक होने पर, जांच पूरी होने तक हिरासत में रख सकता है:
उसे उपलब्ध कराया-
(क) जिस व्यक्ति के विरुद्ध धारा 127, धारा 128 या धारा 129 के अंतर्गत कार्यवाही नहीं की जा रही है, उसे अच्छे व्यवहार के लिए बांड या जमानत बांड निष्पादित करने का निर्देश नहीं दिया जाएगा;
(ख) ऐसे बांड की शर्तें, चाहे उसकी राशि के संबंध में हों या जमानतदारों के प्रावधान या उनकी संख्या या उनकी मौद्रिक देयता की सीमा के संबंध में हों, धारा 130 के तहत आदेश में निर्दिष्ट शर्तों से अधिक कठिन नहीं होंगी।
(4) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, यह तथ्य कि कोई व्यक्ति आदतन अपराधी है या इतना हताश और खतरनाक है कि उसका बिना सुरक्षा के खुलेआम रहना समुदाय के लिए खतरनाक है, सामान्य प्रतिष्ठा के साक्ष्य या अन्यथा द्वारा सिद्ध किया जा सकता है।
(5) जहां दो या दो से अधिक व्यक्ति जांच के अधीन मामले में एक साथ जुड़े हुए हैं, तो उनके साथ एक ही या अलग-अलग जांच में निपटा जा सकता है जैसा मजिस्ट्रेट उचित समझे।
(6) इस धारा के अंतर्गत जांच इसके प्रारंभ होने की तिथि से छह माह की अवधि के भीतर पूरी की जाएगी, और यदि ऐसी जांच पूरी नहीं होती है, तो उक्त अवधि की समाप्ति पर इस अध्याय के अंतर्गत कार्यवाही समाप्त हो जाएगी, जब तक कि लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले विशेष कारणों से मजिस्ट्रेट अन्यथा निर्देश न दे:
बशर्ते कि यदि किसी व्यक्ति को ऐसी जांच लंबित रहने के दौरान हिरासत में रखा गया है, तो उस व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही, यदि पहले समाप्त न की गई हो, तो ऐसी हिरासत की अवधि के छह महीने समाप्त होने पर स्वतः समाप्त हो जाएगी।
(7) जहाँ उपधारा (6) के अंतर्गत कार्यवाही जारी रखने की अनुमति देते हुए कोई निर्देश दिया जाता है, तो सत्र न्यायाधीश पीड़ित पक्ष द्वारा किए गए आवेदन पर ऐसे निर्देश को रद्द कर सकता है, यदि वह संतुष्ट हो कि यह किसी विशेष कारण पर आधारित नहीं था या अनुचित था।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
