पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BSA धारा 44 अब IEA धारा 50 है
प्रासंगिक होने पर, रिश्ते पर राय देना।
पुराना कानून
BSA §44
प्रासंगिक होने पर, रिश्ते पर राय देना।
जब न्यायालय को एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति से संबंध के बारे में राय बनानी होती है, तो उस व्यक्ति द्वारा आचरण के माध्यम से व्यक्त की गई राय, जो परिवार के सदस्य के रूप में या किसी अन्य रूप में, इस विषय पर विशेष ज्ञान रखता है, एक प्रासंगिक तथ्य है:
बशर्ते कि ऐसी राय तलाक अधिनियम, 1869 (4 ऑफ 1869) के तहत कार्यवाही में या भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 82 और 84 के तहत अभियोजन में विवाह को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी।
चित्र।
(क) प्रश्न यह है कि क्या ए और बी विवाहित थे। यह तथ्य कि उनके मित्र आमतौर पर उन्हें पति-पत्नी के रूप में स्वीकार करते थे और उनके साथ व्यवहार करते थे, प्रासंगिक है।
(ख) प्रश्न यह है कि क्या ए, बी का वैध पुत्र था। यह तथ्य कि ए को परिवार के सदस्यों द्वारा हमेशा वैध पुत्र के रूप में माना जाता था, प्रासंगिक है।
पूरा पढ़ें: BSA §44बशर्ते कि ऐसी राय तलाक अधिनियम, 1869 (4 ऑफ 1869) के तहत कार्यवाही में या भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 82 और 84 के तहत अभियोजन में विवाह को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी।
चित्र।
(क) प्रश्न यह है कि क्या ए और बी विवाहित थे। यह तथ्य कि उनके मित्र आमतौर पर उन्हें पति-पत्नी के रूप में स्वीकार करते थे और उनके साथ व्यवहार करते थे, प्रासंगिक है।
(ख) प्रश्न यह है कि क्या ए, बी का वैध पुत्र था। यह तथ्य कि ए को परिवार के सदस्यों द्वारा हमेशा वैध पुत्र के रूप में माना जाता था, प्रासंगिक है।
नया कानून
IEA §50
नातेदारी के बारे में राय कब सुसंगत है
जबकि न्यायालय को एक व्यक्ति की किसी अन्य के साथ नातेदारी के बारे में राय बनानी हो, तब ऐसी नातेदारी के अस्तित्व के बारे में ऐसे किसी व्यक्ती के आचरण द्वारा अभिव्यक्त राय, जिसके पास कुटुम्ब के सदस्य के रुप में या अन्यथा उस विषय के संबंध में ज्ञान के विशेष साधन है, सुसंगत तथ्य है :
परन्तु भारतीय विवाह विच्छेद अधिनियम, १८६९ (१८६९ का ४) के अधीन कार्यवाहियों में या भारतीय दण्ड संहिता, १८६० (१८६० का ४५) की धारा ४९४, ४९५, ४९७ या ४९८ के अधीन अभियोजनों में ऐसी राय विवाह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी ।
दृष्टांत :
क)प्रश्न यह है कि क्या ऐ और बी विवाहित थे ।
यह तथ्य कि वे अपने मित्रों द्वारा पति और पत्नी के रुप में प्राय: स्वीकृत किए जाते थे और उनसे वैसा बर्ताव किया जाता था, सुसंगत है ।
ख)प्रश्न यह है कि क्या ऐ बी का धर्मज पुत्र है । यह तथ्य कि कुटुम्ब के सदस्यों द्वारा ऐ से सदा उस रुप में बर्ताव किया जाता था, सुसंगत है ।
पूरा पढ़ें: IEA §50परन्तु भारतीय विवाह विच्छेद अधिनियम, १८६९ (१८६९ का ४) के अधीन कार्यवाहियों में या भारतीय दण्ड संहिता, १८६० (१८६० का ४५) की धारा ४९४, ४९५, ४९७ या ४९८ के अधीन अभियोजनों में ऐसी राय विवाह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी ।
दृष्टांत :
क)प्रश्न यह है कि क्या ऐ और बी विवाहित थे ।
यह तथ्य कि वे अपने मित्रों द्वारा पति और पत्नी के रुप में प्राय: स्वीकृत किए जाते थे और उनसे वैसा बर्ताव किया जाता था, सुसंगत है ।
ख)प्रश्न यह है कि क्या ऐ बी का धर्मज पुत्र है । यह तथ्य कि कुटुम्ब के सदस्यों द्वारा ऐ से सदा उस रुप में बर्ताव किया जाता था, सुसंगत है ।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
