पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BSA धारा 158 अब IEA धारा 155 है
गवाह की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना।
पुराना कानून
BSA §158
गवाह की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना।
किसी गवाह की विश्वसनीयता पर प्रतिकूल पक्ष द्वारा, या न्यायालय की सहमति से, उसे बुलाने वाले पक्ष द्वारा निम्नलिखित तरीकों से सवाल उठाया जा सकता है:
(क) उन व्यक्तियों के साक्ष्य द्वारा जो गवाही देते हैं कि वे गवाह के बारे में अपने ज्ञान के आधार पर उसे अविश्वसनीय मानते हैं;
(ख) इस बात का प्रमाण देकर कि गवाह को रिश्वत दी गई है, या उसने रिश्वत की पेशकश स्वीकार की है, या उसने अपना साक्ष्य देने के लिए कोई अन्य भ्रष्ट प्रलोभन प्राप्त किया है;
(ग) अपने साक्ष्य के किसी भी भाग के साथ असंगत पूर्व कथनों के प्रमाण द्वारा, जिसका खंडन किया जा सकता है।
स्पष्टीकरण।- कोई गवाह किसी अन्य गवाह को अविश्वसनीय घोषित करते समय, अपनी प्रारंभिक परीक्षा के दौरान अपने इस विश्वास के कारण नहीं बता सकता, लेकिन उससे जिरह में उसके कारण पूछे जा सकते हैं, और उसके द्वारा दिए गए उत्तरों का खंडन नहीं किया जा सकता, हालांकि, यदि वे झूठे साबित होते हैं, तो बाद में उस पर झूठी गवाही देने का आरोप लगाया जा सकता है।
चित्र।
(a) A, B को बेचे और वितरित किए गए माल की कीमत के लिए B पर मुकदमा करता है। C का कहना है कि उसने माल B को वितरित किया था। यह दिखाने के लिए साक्ष्य प्रस्तुत किया जाता है कि उसने पहले एक अवसर पर कहा था कि उसने माल B को वितरित नहीं किया था। साक्ष्य स्वीकार्य है।
(ख) ए पर बी की हत्या का आरोप है। सी का कहना है कि मरते समय बी ने कहा था कि ए ने ही उसे वह घाव दिया था जिससे उसकी मृत्यु हुई। साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है कि इससे पहले एक बार सी ने कहा था कि मरते समय बी ने यह नहीं कहा था कि ए ने ही उसे वह घाव दिया था जिससे उसकी मृत्यु हुई। यह साक्ष्य स्वीकार्य है।
पूरा पढ़ें: BSA §158(क) उन व्यक्तियों के साक्ष्य द्वारा जो गवाही देते हैं कि वे गवाह के बारे में अपने ज्ञान के आधार पर उसे अविश्वसनीय मानते हैं;
(ख) इस बात का प्रमाण देकर कि गवाह को रिश्वत दी गई है, या उसने रिश्वत की पेशकश स्वीकार की है, या उसने अपना साक्ष्य देने के लिए कोई अन्य भ्रष्ट प्रलोभन प्राप्त किया है;
(ग) अपने साक्ष्य के किसी भी भाग के साथ असंगत पूर्व कथनों के प्रमाण द्वारा, जिसका खंडन किया जा सकता है।
स्पष्टीकरण।- कोई गवाह किसी अन्य गवाह को अविश्वसनीय घोषित करते समय, अपनी प्रारंभिक परीक्षा के दौरान अपने इस विश्वास के कारण नहीं बता सकता, लेकिन उससे जिरह में उसके कारण पूछे जा सकते हैं, और उसके द्वारा दिए गए उत्तरों का खंडन नहीं किया जा सकता, हालांकि, यदि वे झूठे साबित होते हैं, तो बाद में उस पर झूठी गवाही देने का आरोप लगाया जा सकता है।
चित्र।
(a) A, B को बेचे और वितरित किए गए माल की कीमत के लिए B पर मुकदमा करता है। C का कहना है कि उसने माल B को वितरित किया था। यह दिखाने के लिए साक्ष्य प्रस्तुत किया जाता है कि उसने पहले एक अवसर पर कहा था कि उसने माल B को वितरित नहीं किया था। साक्ष्य स्वीकार्य है।
(ख) ए पर बी की हत्या का आरोप है। सी का कहना है कि मरते समय बी ने कहा था कि ए ने ही उसे वह घाव दिया था जिससे उसकी मृत्यु हुई। साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है कि इससे पहले एक बार सी ने कहा था कि मरते समय बी ने यह नहीं कहा था कि ए ने ही उसे वह घाव दिया था जिससे उसकी मृत्यु हुई। यह साक्ष्य स्वीकार्य है।
नया कानून
IEA §155
साक्षी की विश्वसनीयता पर अधिक्षेप
किसी साक्षी की विश्वसनीयता पर प्रतिपक्षी द्वारा, या न्यायालय की सम्मति से उस पक्षकार द्वारा, जिसने उसे बुलाया है, निम्नलिखित प्रकारों से अधिक्षेप किया जा सकेगा :-
१)उन व्यक्तियों के साक्ष्य द्वारा, जो यह परिसाक्ष्य देते है कि साक्षी के बारे में अपने ज्ञान के आधार पर, वे उसे विश्वसनीयता का अपात्र समझते है,
२)यह साबित किए जाने द्वारा कि साक्षी को रिश्वत दी गई है या उसने रिश्वत की प्रस्थापना प्रतिगृहीत कर ली है या उसे अपना साक्ष्य देने के लिए कोई अन्य भ्रष्ट उत्प्रेरणा मिली है,
३)उसके साक्ष्य के किसी ऐसे भाग से, जिसका खण्डन किया जा सकता है, असंगत पिछले कथनों को साबित करने द्वारा;
स्पष्टीकरण :
कोई साक्षी जो किसी अन्य साक्षी को विश्वसनीयता के लिए अपात्र घोषित करता है, अपने से की गई मुख्य परीक्षा में अपने विश्वास के कारणों को चाहे न बताए, किन्तु प्रतिपरीक्षा में उससे उनके कारणों को पूछा जा सकेगा, और उन उत्तरों का, जिन्हे वह देता है, खण्डन नहीं किया जा सकता, तथापि यदि वे मिथ्या हों, तो तत्पश्चात् उस पर मिथ्या साक्ष्य देने का आरोप लगाया जा सकेगा ।
दृष्टांत :
क)बी को बेचे गए और परिदान किए गए माल के मूल्य के लिए बी पर ऐ वाद लाता है ।
सी कहता है कि उसने बी को माल का परिदान किया ।
यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य प्रस्थापित किया जाता है कि किसी पूर्व अवसर पर उसने कहा था कि उसने उस माल का परिदान बी को नहीं किया था ।
यह साक्ष्य ग्राह्य है ।
बी)बी की हत्या के लिए ए पर अभ्यारोप लगाया गया है ।
सी कहता है कि बी ने मरते समय घोषित किया था कि ऐ ने बी को यह घाव किया था, जिससे वह मर गया ।
यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य प्रस्थापित किया जाता है कि किसी पूर्व अवसर पर सी ने कहा था कि घाव ऐ द्वारा या उसकी उपस्थिति में नहीं किया गया था ।
यह साक्ष्य ग्राह्य है ।
पूरा पढ़ें: IEA §155१)उन व्यक्तियों के साक्ष्य द्वारा, जो यह परिसाक्ष्य देते है कि साक्षी के बारे में अपने ज्ञान के आधार पर, वे उसे विश्वसनीयता का अपात्र समझते है,
२)यह साबित किए जाने द्वारा कि साक्षी को रिश्वत दी गई है या उसने रिश्वत की प्रस्थापना प्रतिगृहीत कर ली है या उसे अपना साक्ष्य देने के लिए कोई अन्य भ्रष्ट उत्प्रेरणा मिली है,
३)उसके साक्ष्य के किसी ऐसे भाग से, जिसका खण्डन किया जा सकता है, असंगत पिछले कथनों को साबित करने द्वारा;
स्पष्टीकरण :
कोई साक्षी जो किसी अन्य साक्षी को विश्वसनीयता के लिए अपात्र घोषित करता है, अपने से की गई मुख्य परीक्षा में अपने विश्वास के कारणों को चाहे न बताए, किन्तु प्रतिपरीक्षा में उससे उनके कारणों को पूछा जा सकेगा, और उन उत्तरों का, जिन्हे वह देता है, खण्डन नहीं किया जा सकता, तथापि यदि वे मिथ्या हों, तो तत्पश्चात् उस पर मिथ्या साक्ष्य देने का आरोप लगाया जा सकेगा ।
दृष्टांत :
क)बी को बेचे गए और परिदान किए गए माल के मूल्य के लिए बी पर ऐ वाद लाता है ।
सी कहता है कि उसने बी को माल का परिदान किया ।
यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य प्रस्थापित किया जाता है कि किसी पूर्व अवसर पर उसने कहा था कि उसने उस माल का परिदान बी को नहीं किया था ।
यह साक्ष्य ग्राह्य है ।
बी)बी की हत्या के लिए ए पर अभ्यारोप लगाया गया है ।
सी कहता है कि बी ने मरते समय घोषित किया था कि ऐ ने बी को यह घाव किया था, जिससे वह मर गया ।
यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य प्रस्थापित किया जाता है कि किसी पूर्व अवसर पर सी ने कहा था कि घाव ऐ द्वारा या उसकी उपस्थिति में नहीं किया गया था ।
यह साक्ष्य ग्राह्य है ।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
