पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 501 अब CrPC धारा 455 है
मानहानिकारक और अन्य सामग्री का विनाश।
पुराना कानून
BNSS §501
मानहानिकारक और अन्य सामग्री का विनाश।
(1) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 294, धारा 295 या धारा 356 की उपधारा (3) और (4) के तहत दोषसिद्धि पर न्यायालय उस वस्तु की सभी प्रतियों को नष्ट करने का आदेश दे सकता है जिसके संबंध में दोषसिद्धि हुई थी और जो न्यायालय की हिरासत में हैं या दोषी व्यक्ति के कब्जे या अधिकार में हैं।
(2) न्यायालय, इसी प्रकार, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 274, धारा 275, धारा 276 या धारा 277 के तहत दोषसिद्धि पर, उस खाद्य पदार्थ, पेय पदार्थ, औषधि या चिकित्सा सामग्री को नष्ट करने का आदेश दे सकता है जिसके संबंध में दोषसिद्धि हुई थी।
पूरा पढ़ें: BNSS §501(2) न्यायालय, इसी प्रकार, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 274, धारा 275, धारा 276 या धारा 277 के तहत दोषसिद्धि पर, उस खाद्य पदार्थ, पेय पदार्थ, औषधि या चिकित्सा सामग्री को नष्ट करने का आदेश दे सकता है जिसके संबंध में दोषसिद्धि हुई थी।
नया कानून
CrPC §455
धारा 455. मानहानिकारक और अन्य सामग्री का नष्ट किया जाना
455. मानहानिकारक और अन्य सामग्री का नष्ट किया जाना
(1) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 292, धारा 293, धारा 501 या धारा 502 के अधीन दोषसिद्धि पर, न्यायालय उस वस्तु की, जिसके संबंध में दोषसिद्धि हुई थी, उन सब प्रतियों के नष्ट किए जाने का आदेश दे सकेगा जो न्यायालय की अभिरक्षा में हैं या दोषसिद्ध व्यक्ति के कब्जे या शक्ति में बनी हुई हैं।
(2) न्यायालय, उसी प्रकार, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 272, धारा 273, धारा 274 या धारा 275 के अधीन दोषसिद्धि पर, उस खाद्य, पेय, औषधि या भेषजीय संरचना के, जिसके संबंध में दोषसिद्धि हुई थी, नष्ट किए जाने का आदेश दे सकेगा।
राज्य संशोधन
तमिलनाडु:
धारा 455 की उपधारा (1) में, "धारा 292" शब्द और अंकों के पश्चात् "धारा 292क" शब्द, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे।
[तमिलनाडु अधिनियम 1982 का 13, धारा 2 द्वारा (21-9-1981 से प्रभावी)]
पूरा पढ़ें: CrPC §455(1) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 292, धारा 293, धारा 501 या धारा 502 के अधीन दोषसिद्धि पर, न्यायालय उस वस्तु की, जिसके संबंध में दोषसिद्धि हुई थी, उन सब प्रतियों के नष्ट किए जाने का आदेश दे सकेगा जो न्यायालय की अभिरक्षा में हैं या दोषसिद्ध व्यक्ति के कब्जे या शक्ति में बनी हुई हैं।
(2) न्यायालय, उसी प्रकार, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 272, धारा 273, धारा 274 या धारा 275 के अधीन दोषसिद्धि पर, उस खाद्य, पेय, औषधि या भेषजीय संरचना के, जिसके संबंध में दोषसिद्धि हुई थी, नष्ट किए जाने का आदेश दे सकेगा।
राज्य संशोधन
तमिलनाडु:
धारा 455 की उपधारा (1) में, "धारा 292" शब्द और अंकों के पश्चात् "धारा 292क" शब्द, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे।
[तमिलनाडु अधिनियम 1982 का 13, धारा 2 द्वारा (21-9-1981 से प्रभावी)]
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
