पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 468 अब CrPC धारा 428 है
अभियुक्त द्वारा भुगती गई हिरासत की अवधि को कारावास की सजा के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा।
पुराना कानून
BNSS §468
अभियुक्त द्वारा भुगती गई हिरासत की अवधि को कारावास की सजा के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा।
जहां किसी आरोपी व्यक्ति को दोषसिद्धि पर कारावास की सजा सुनाई गई है, जो जुर्माने के भुगतान में चूक के कारण कारावास न हो, तो उस मामले की जांच, पूछताछ या मुकदमे के दौरान और ऐसी दोषसिद्धि की तारीख से पहले उसके द्वारा भुगती गई हिरासत की अवधि, यदि कोई हो, को ऐसी दोषसिद्धि पर उस पर लगाए गए कारावास की अवधि के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा, और ऐसे व्यक्ति की ऐसी दोषसिद्धि पर कारावास भुगतने की देयता उस पर लगाए गए कारावास की अवधि के शेष भाग तक ही सीमित होगी।
बशर्ते कि धारा 475 में निर्दिष्ट मामलों में, ऐसी हिरासत अवधि को उस धारा में निर्दिष्ट चौदह वर्ष की अवधि के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा।
पूरा पढ़ें: BNSS §468बशर्ते कि धारा 475 में निर्दिष्ट मामलों में, ऐसी हिरासत अवधि को उस धारा में निर्दिष्ट चौदह वर्ष की अवधि के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा।
नया कानून
CrPC §428
धारा 428. अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश के विरुद्ध मुजरा किया जाना
428. अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश के विरुद्ध मुजरा किया जाना
जहां किसी अभियुक्त व्यक्ति को दोषसिद्धि पर किसी अवधि के कारावास का दंडादेश दिया गया है, जो जुर्माने के संदाय में व्यतिक्रम होने पर दिया गया कारावास नहीं है, वहां उसके द्वारा उसी मामले के अन्वेषण, जांच या विचारण के दौरान और ऐसी दोषसिद्धि की तारीख से पूर्व भोगी गई निरोध की अवधि, यदि कोई हो, ऐसी दोषसिद्धि पर उस पर अधिरोपित कारावास की अवधि के विरुद्ध मुजरा कर दी जाएगी और ऐसी दोषसिद्धि पर कारावास भोगने का ऐसे व्यक्ति का दायित्व उस पर अधिरोपित कारावास की अवधि के शेष भाग तक ही, यदि कोई हो, सीमित रहेगा।
परन्तु धारा 433क में निर्दिष्ट मामलों में निरोध की ऐसी अवधि उस धारा में निर्दिष्ट चौदह वर्ष की अवधि के विरुद्ध मुजरा की जाएगी।
पूरा पढ़ें: CrPC §428जहां किसी अभियुक्त व्यक्ति को दोषसिद्धि पर किसी अवधि के कारावास का दंडादेश दिया गया है, जो जुर्माने के संदाय में व्यतिक्रम होने पर दिया गया कारावास नहीं है, वहां उसके द्वारा उसी मामले के अन्वेषण, जांच या विचारण के दौरान और ऐसी दोषसिद्धि की तारीख से पूर्व भोगी गई निरोध की अवधि, यदि कोई हो, ऐसी दोषसिद्धि पर उस पर अधिरोपित कारावास की अवधि के विरुद्ध मुजरा कर दी जाएगी और ऐसी दोषसिद्धि पर कारावास भोगने का ऐसे व्यक्ति का दायित्व उस पर अधिरोपित कारावास की अवधि के शेष भाग तक ही, यदि कोई हो, सीमित रहेगा।
परन्तु धारा 433क में निर्दिष्ट मामलों में निरोध की ऐसी अवधि उस धारा में निर्दिष्ट चौदह वर्ष की अवधि के विरुद्ध मुजरा की जाएगी।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
