पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 467 अब CrPC धारा 427 है
किसी अन्य अपराध के लिए पहले से ही सजा पाए अपराधी को सजा सुनाई गई है।
पुराना कानून
BNSS §467
किसी अन्य अपराध के लिए पहले से ही सजा पाए अपराधी को सजा सुनाई गई है।
(1) जब कोई व्यक्ति जो पहले से ही कारावास की सजा काट रहा हो, उसे बाद में किसी अन्य दोषसिद्धि पर कारावास या आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है, तो ऐसा कारावास या आजीवन कारावास उस कारावास की अवधि की समाप्ति पर शुरू होगा जिसकी सजा उसे पहले सुनाई गई थी, जब तक कि न्यायालय यह निर्देश न दे कि बाद की सजा पिछली सजा के साथ-साथ चलेगी:
बशर्ते कि यदि कोई व्यक्ति जिसे धारा 141 के तहत जमानत न देने के कारण कारावास की सजा सुनाई गई है, ऐसी सजा भुगतते समय, ऐसे आदेश जारी होने से पहले किए गए किसी अपराध के लिए कारावास की सजा पाता है, तो बाद वाली सजा तुरंत शुरू हो जाएगी।
(2) जब कोई व्यक्ति जो पहले से ही आजीवन कारावास की सजा काट रहा हो, उसे बाद में किसी अपराध के लिए कारावास की सजा सुनाई जाती है, तो बाद की सजा पिछली सजा के साथ-साथ चलेगी।
पूरा पढ़ें: BNSS §467बशर्ते कि यदि कोई व्यक्ति जिसे धारा 141 के तहत जमानत न देने के कारण कारावास की सजा सुनाई गई है, ऐसी सजा भुगतते समय, ऐसे आदेश जारी होने से पहले किए गए किसी अपराध के लिए कारावास की सजा पाता है, तो बाद वाली सजा तुरंत शुरू हो जाएगी।
(2) जब कोई व्यक्ति जो पहले से ही आजीवन कारावास की सजा काट रहा हो, उसे बाद में किसी अपराध के लिए कारावास की सजा सुनाई जाती है, तो बाद की सजा पिछली सजा के साथ-साथ चलेगी।
नया कानून
CrPC §427
धारा 427. उस अपराधी के बारे में दंडादेश जो अन्य अपराध के लिए पहले से ही दंडादिष्ट है
427. उस अपराधी के बारे में दंडादेश जो अन्य अपराध के लिए पहले से ही दंडादिष्ट है
(1) जब कारावास का दंडादेश पहले से ही भोग रहे किसी व्यक्ति को पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर कारावास या आजीवन कारावास का दंडादेश दिया जाता है, तब ऐसा कारावास या आजीवन कारावास उस कारावास की समाप्ति पर प्रारंभ होगा जिसका दंडादेश उसे पहले दिया गया था, जब तक कि न्यायालय यह निदेश न दे कि पश्चात्वर्ती दंडादेश ऐसे पूर्ववर्ती दंडादेश के साथ-साथ चलेगा:
परन्तु जहां प्रतिभूति देने में व्यतिक्रम के कारण धारा 122 के अधीन किए गए आदेश द्वारा कारावास से दंडादिष्ट किए गए व्यक्ति को, ऐसा दंडादेश भोगते समय, ऐसे आदेश के किए जाने से पूर्व किए गए किसी अपराध के लिए कारावास का दंडादेश दिया जाता है, वहां पश्चात्कथित दंडादेश तुरंत प्रारंभ होगा।
(2) जब आजीवन कारावास का दंडादेश पहले से ही भोग रहे किसी व्यक्ति को पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर किसी अवधि के कारावास या आजीवन कारावास का दंडादेश दिया जाता है, तब पश्चात्वर्ती दंडादेश ऐसे पूर्ववर्ती दंडादेश के साथ-साथ चलेगा।
राज्य संशोधन
तमिलनाडु:
धारा 427 में, उपधारा (1) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:—
"(1क) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जब कारावास का दंडादेश पहले से ही भोग रहे किसी व्यक्ति को पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर, उपासना के स्थान के रूप में प्रयुक्त किसी भवन में किसी मूर्ति या प्रतिमा की चोरी के अपराध के लिए, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 380 की उपधारा (2) के अधीन कारावास का दंडादेश दिया जाता है, तब ऐसा कारावास उस कारावास की समाप्ति पर प्रारंभ होगा जिसका दंडादेश उसे पहले दिया गया था।"
[तमिलनाडु अधिनियम 1993 का 28, धारा 6 द्वारा]
पूरा पढ़ें: CrPC §427(1) जब कारावास का दंडादेश पहले से ही भोग रहे किसी व्यक्ति को पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर कारावास या आजीवन कारावास का दंडादेश दिया जाता है, तब ऐसा कारावास या आजीवन कारावास उस कारावास की समाप्ति पर प्रारंभ होगा जिसका दंडादेश उसे पहले दिया गया था, जब तक कि न्यायालय यह निदेश न दे कि पश्चात्वर्ती दंडादेश ऐसे पूर्ववर्ती दंडादेश के साथ-साथ चलेगा:
परन्तु जहां प्रतिभूति देने में व्यतिक्रम के कारण धारा 122 के अधीन किए गए आदेश द्वारा कारावास से दंडादिष्ट किए गए व्यक्ति को, ऐसा दंडादेश भोगते समय, ऐसे आदेश के किए जाने से पूर्व किए गए किसी अपराध के लिए कारावास का दंडादेश दिया जाता है, वहां पश्चात्कथित दंडादेश तुरंत प्रारंभ होगा।
(2) जब आजीवन कारावास का दंडादेश पहले से ही भोग रहे किसी व्यक्ति को पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर किसी अवधि के कारावास या आजीवन कारावास का दंडादेश दिया जाता है, तब पश्चात्वर्ती दंडादेश ऐसे पूर्ववर्ती दंडादेश के साथ-साथ चलेगा।
राज्य संशोधन
तमिलनाडु:
धारा 427 में, उपधारा (1) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:—
"(1क) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जब कारावास का दंडादेश पहले से ही भोग रहे किसी व्यक्ति को पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर, उपासना के स्थान के रूप में प्रयुक्त किसी भवन में किसी मूर्ति या प्रतिमा की चोरी के अपराध के लिए, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 380 की उपधारा (2) के अधीन कारावास का दंडादेश दिया जाता है, तब ऐसा कारावास उस कारावास की समाप्ति पर प्रारंभ होगा जिसका दंडादेश उसे पहले दिया गया था।"
[तमिलनाडु अधिनियम 1993 का 28, धारा 6 द्वारा]
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
