पाठ बदला गया है
BNSS धारा 448 अब CrPC धारा 408 है
सत्र न्यायाधीश को मामलों और अपीलों को स्थानांतरित करने का अधिकार है।
पुराना कानून
BNSS §448
सत्र न्यायाधीश को मामलों और अपीलों को स्थानांतरित करने का अधिकार है।
(1) जब भी किसी सत्र न्यायाधीश को यह प्रतीत हो कि इस उपधारा के तहत कोई आदेश न्याय के हित में उचित है, तो वह आदेश दे सकता है कि किसी विशेष मामले को उसके सत्र प्रभाग में एक आपराधिक न्यायालय से दूसरे आपराधिक न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया जाए।
(2) सत्र न्यायाधीश निचली अदालत की रिपोर्ट पर, या किसी हितधारक के आवेदन पर, या अपनी स्वयं की पहल पर कार्रवाई कर सकता है।
(3) धारा 447 की उपधारा (3), (4), (5), (6), (7) और (9) के प्रावधान उपधारा (1) के तहत आदेश के लिए सत्र न्यायाधीश को दिए गए आवेदन के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे धारा 447 की उपधारा (1) के तहत आदेश के लिए उच्च न्यायालय को दिए गए आवेदन के संबंध में लागू होते हैं, सिवाय इसके कि उस धारा की उपधारा (7) इस प्रकार लागू होगी मानो उसमें प्रयुक्त शब्द "राशि" के स्थान पर "दस हजार रुपये से अधिक नहीं" शब्द प्रतिस्थापित किए गए हों।
पूरा पढ़ें: BNSS §448(2) सत्र न्यायाधीश निचली अदालत की रिपोर्ट पर, या किसी हितधारक के आवेदन पर, या अपनी स्वयं की पहल पर कार्रवाई कर सकता है।
(3) धारा 447 की उपधारा (3), (4), (5), (6), (7) और (9) के प्रावधान उपधारा (1) के तहत आदेश के लिए सत्र न्यायाधीश को दिए गए आवेदन के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे धारा 447 की उपधारा (1) के तहत आदेश के लिए उच्च न्यायालय को दिए गए आवेदन के संबंध में लागू होते हैं, सिवाय इसके कि उस धारा की उपधारा (7) इस प्रकार लागू होगी मानो उसमें प्रयुक्त शब्द "राशि" के स्थान पर "दस हजार रुपये से अधिक नहीं" शब्द प्रतिस्थापित किए गए हों।
नया कानून
CrPC §408
धारा 408. मामलों और अपीलों को अंतरित करने की सत्र न्यायाधीश की शक्ति
408. मामलों और अपीलों को अंतरित करने की सत्र न्यायाधीश की शक्ति
(1) जब कभी किसी सत्र न्यायाधीश को यह प्रतीत कराया जाता है कि इस उपधारा के अधीन कोई आदेश न्याय के उद्देश्यों के लिए समीचीन है, तब वह यह आदेश दे सकेगा कि कोई विशिष्ट मामला उसके सत्र खंड के एक दंड न्यायालय से दूसरे दंड न्यायालय को अंतरित कर दिया जाए।
(2) सत्र न्यायाधीश या तो अवर न्यायालय की रिपोर्ट पर, या किसी हितबद्ध पक्षकार के आवेदन पर, या अपनी प्रेरणा पर कार्य कर सकेगा।
(3) धारा 407 की उपधारा (3), (4), (5), (6), (7) और (9) के उपबंध, उपधारा (1) के अधीन आदेश के लिए सत्र न्यायाधीश को किए गए आवेदन के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे धारा 407 की उपधारा (1) के अधीन आदेश के लिए उच्च न्यायालय को किए गए आवेदन के संबंध में लागू होते हैं, सिवाय इसके कि उस धारा की उपधारा (7) इस प्रकार लागू होगी मानो उसमें आने वाले शब्दों "एक हजार रुपए" के स्थान पर शब्द "दो सौ पचास रुपए" रख दिए गए हों।
पूरा पढ़ें: CrPC §408(1) जब कभी किसी सत्र न्यायाधीश को यह प्रतीत कराया जाता है कि इस उपधारा के अधीन कोई आदेश न्याय के उद्देश्यों के लिए समीचीन है, तब वह यह आदेश दे सकेगा कि कोई विशिष्ट मामला उसके सत्र खंड के एक दंड न्यायालय से दूसरे दंड न्यायालय को अंतरित कर दिया जाए।
(2) सत्र न्यायाधीश या तो अवर न्यायालय की रिपोर्ट पर, या किसी हितबद्ध पक्षकार के आवेदन पर, या अपनी प्रेरणा पर कार्य कर सकेगा।
(3) धारा 407 की उपधारा (3), (4), (5), (6), (7) और (9) के उपबंध, उपधारा (1) के अधीन आदेश के लिए सत्र न्यायाधीश को किए गए आवेदन के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे धारा 407 की उपधारा (1) के अधीन आदेश के लिए उच्च न्यायालय को किए गए आवेदन के संबंध में लागू होते हैं, सिवाय इसके कि उस धारा की उपधारा (7) इस प्रकार लागू होगी मानो उसमें आने वाले शब्दों "एक हजार रुपए" के स्थान पर शब्द "दो सौ पचास रुपए" रख दिए गए हों।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
