पाठ बदला गया है
BNSS धारा 417 अब CrPC धारा 376 है
छोटे-मोटे मामलों में अपील नहीं की जा सकती।
पुराना कानून
BNSS §417
छोटे-मोटे मामलों में अपील नहीं की जा सकती।
धारा 415 में किसी बात के होते हुए भी, निम्नलिखित मामलों में किसी दोषी व्यक्ति द्वारा अपील नहीं की जा सकेगी, अर्थात्:---
(क) जहां उच्च न्यायालय केवल तीन महीने से अधिक की अवधि के लिए कारावास या एक हजार रुपये से अधिक का जुर्माना या दोनों कारावास और जुर्माना की सजा सुनाता है;
(ख) जहां सत्र न्यायालय केवल तीन महीने से अधिक की अवधि के लिए कारावास या दो सौ रुपये से अधिक का जुर्माना या दोनों कारावास और जुर्माना की सजा सुनाता है;
(ग) जहां प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट केवल एक सौ रुपये से अधिक का जुर्माना नहीं लगाता है; या
(घ) जहां, संक्षिप्त सुनवाई वाले मामले में, धारा 283 के तहत कार्रवाई करने के लिए अधिकृत मजिस्ट्रेट केवल दो सौ रुपये से अधिक का जुर्माना नहीं लगाता है:
बशर्ते कि यदि किसी अन्य सजा के साथ ऐसी सजा भी जोड़ी गई हो तो उसके विरुद्ध अपील की जा सकती है, परन्तु ऐसी सजा के विरुद्ध केवल इस आधार पर अपील नहीं की जा सकेगी---
(i) दोषी व्यक्ति को शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया जाता है; या
(ii) कि जुर्माने का भुगतान न करने पर कारावास का निर्देश सजा में शामिल है; या
(iii) यदि मामले में जुर्माने की कुल राशि इस मामले के संबंध में पहले से निर्दिष्ट राशि से अधिक नहीं है, तो मामले में एक से अधिक जुर्माने की सजा दी जाएगी।
पूरा पढ़ें: BNSS §417(क) जहां उच्च न्यायालय केवल तीन महीने से अधिक की अवधि के लिए कारावास या एक हजार रुपये से अधिक का जुर्माना या दोनों कारावास और जुर्माना की सजा सुनाता है;
(ख) जहां सत्र न्यायालय केवल तीन महीने से अधिक की अवधि के लिए कारावास या दो सौ रुपये से अधिक का जुर्माना या दोनों कारावास और जुर्माना की सजा सुनाता है;
(ग) जहां प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट केवल एक सौ रुपये से अधिक का जुर्माना नहीं लगाता है; या
(घ) जहां, संक्षिप्त सुनवाई वाले मामले में, धारा 283 के तहत कार्रवाई करने के लिए अधिकृत मजिस्ट्रेट केवल दो सौ रुपये से अधिक का जुर्माना नहीं लगाता है:
बशर्ते कि यदि किसी अन्य सजा के साथ ऐसी सजा भी जोड़ी गई हो तो उसके विरुद्ध अपील की जा सकती है, परन्तु ऐसी सजा के विरुद्ध केवल इस आधार पर अपील नहीं की जा सकेगी---
(i) दोषी व्यक्ति को शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया जाता है; या
(ii) कि जुर्माने का भुगतान न करने पर कारावास का निर्देश सजा में शामिल है; या
(iii) यदि मामले में जुर्माने की कुल राशि इस मामले के संबंध में पहले से निर्दिष्ट राशि से अधिक नहीं है, तो मामले में एक से अधिक जुर्माने की सजा दी जाएगी।
नया कानून
CrPC §376
धारा 376. क्षुद्र मामलों में अपील न होना
376. क्षुद्र मामलों में अपील न होना
धारा 374 में किसी बात के होते हुए भी, निम्नलिखित मामलों में से किसी में भी दोषसिद्ध व्यक्ति द्वारा कोई अपील न होगी, अर्थात्:—
(क) जहां उच्च न्यायालय केवल छह मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या एक हजार रुपए से अनधिक जुर्माने का, या ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का दंडादेश देता है;
(ख) जहां सेशन न्यायालय या महानगर मजिस्ट्रेट केवल तीन मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या दो सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का, या ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का दंडादेश देता है;
(ग) जहां प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट केवल एक सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का दंडादेश देता है; या
(घ) जहां संक्षिप्त रूप से विचारित किसी मामले में धारा 260 के अधीन कार्य करने के लिए सशक्त मजिस्ट्रेट केवल दो सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का दंडादेश देता है:
परन्तु ऐसे किसी दंडादेश के विरुद्ध अपील की जा सकेगी यदि उसके साथ कोई अन्य दंड संयोजित है, किन्तु ऐसा दंडादेश केवल इस आधार पर अपीलनीय न होगा कि—
(i) दोषसिद्ध व्यक्ति को परिशांति कायम रखने के लिए प्रतिभूति देने का आदेश दिया गया है; या
(ii) जुर्माना न देने पर कारावास का निदेश दंडादेश में सम्मिलित है; या
(iii) उस मामले में जुर्माने का एक से अधिक दंडादेश दिया गया है, यदि अधिरोपित जुर्माने की कुल रकम उस मामले के संबंध में इससे पूर्व विनिर्दिष्ट रकम से अधिक नहीं है।
पूरा पढ़ें: CrPC §376धारा 374 में किसी बात के होते हुए भी, निम्नलिखित मामलों में से किसी में भी दोषसिद्ध व्यक्ति द्वारा कोई अपील न होगी, अर्थात्:—
(क) जहां उच्च न्यायालय केवल छह मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या एक हजार रुपए से अनधिक जुर्माने का, या ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का दंडादेश देता है;
(ख) जहां सेशन न्यायालय या महानगर मजिस्ट्रेट केवल तीन मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या दो सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का, या ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का दंडादेश देता है;
(ग) जहां प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट केवल एक सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का दंडादेश देता है; या
(घ) जहां संक्षिप्त रूप से विचारित किसी मामले में धारा 260 के अधीन कार्य करने के लिए सशक्त मजिस्ट्रेट केवल दो सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का दंडादेश देता है:
परन्तु ऐसे किसी दंडादेश के विरुद्ध अपील की जा सकेगी यदि उसके साथ कोई अन्य दंड संयोजित है, किन्तु ऐसा दंडादेश केवल इस आधार पर अपीलनीय न होगा कि—
(i) दोषसिद्ध व्यक्ति को परिशांति कायम रखने के लिए प्रतिभूति देने का आदेश दिया गया है; या
(ii) जुर्माना न देने पर कारावास का निदेश दंडादेश में सम्मिलित है; या
(iii) उस मामले में जुर्माने का एक से अधिक दंडादेश दिया गया है, यदि अधिरोपित जुर्माने की कुल रकम उस मामले के संबंध में इससे पूर्व विनिर्दिष्ट रकम से अधिक नहीं है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
