पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 400 अब CrPC धारा 359 है
गैर-संज्ञेय मामलों में लागत का भुगतान करने का आदेश।
पुराना कानून
BNSS §400
गैर-संज्ञेय मामलों में लागत का भुगतान करने का आदेश।
(1) जब भी किसी गैर-संज्ञेय अपराध की शिकायत न्यायालय में की जाती है, तो न्यायालय, यदि वह अभियुक्त को दोषी पाता है, तो उस पर लगाए गए दंड के अतिरिक्त, उसे अभियोक्ता को मुकदमे में उसके द्वारा किए गए पूर्ण या आंशिक व्यय का भुगतान करने का आदेश दे सकता है, और आगे यह आदेश दे सकता है कि भुगतान न करने की स्थिति में अभियुक्त को तीस दिनों से अधिक की अवधि के लिए साधारण कारावास भुगतना होगा, और ऐसे व्यय में प्रक्रिया शुल्क, गवाहों और अधिवक्ता के शुल्क के संबंध में किए गए कोई भी व्यय शामिल हो सकते हैं जिन्हें न्यायालय उचित समझे।
(2) इस धारा के अंतर्गत आदेश अपीलीय न्यायालय द्वारा या उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय द्वारा पुनरीक्षण शक्तियों का प्रयोग करते समय भी दिया जा सकता है।
पूरा पढ़ें: BNSS §400(2) इस धारा के अंतर्गत आदेश अपीलीय न्यायालय द्वारा या उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय द्वारा पुनरीक्षण शक्तियों का प्रयोग करते समय भी दिया जा सकता है।
नया कानून
CrPC §359
धारा 359. असंज्ञेय मामलों में खर्चा देने का आदेश
359. असंज्ञेय मामलों में खर्चा देने का आदेश
(1) जब कभी किसी असंज्ञेय अपराध का कोई परिवाद किसी न्यायालय में किया जाता है, तब न्यायालय, यदि वह अभियुक्त को दोषसिद्ध करता है, उस पर अधिरोपित शास्ति के अतिरिक्त, यह आदेश दे सकेगा कि वह परिवादी को वह खर्चा, जो उसने अभियोजन में उपगत किया है, पूर्णतः या भागतः दे, और यह भी आदेश दे सकेगा कि संदाय में व्यतिक्रम होने पर अभियुक्त तीस दिन से अनधिक की अवधि के लिए सादा कारावास भोगेगा; और ऐसे खर्चे में प्रक्रिया-फीसों, साक्षियों तथा अधिवक्ता की फीसों के बारे में उपगत ऐसे व्यय सम्मिलित हो सकेंगे जिन्हें न्यायालय युक्तियुक्त समझे।
(2) इस धारा के अधीन आदेश अपील न्यायालय द्वारा, अथवा उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय द्वारा भी, जब वह पुनरीक्षण की अपनी शक्तियों का प्रयोग कर रहा हो, किया जा सकेगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §359(1) जब कभी किसी असंज्ञेय अपराध का कोई परिवाद किसी न्यायालय में किया जाता है, तब न्यायालय, यदि वह अभियुक्त को दोषसिद्ध करता है, उस पर अधिरोपित शास्ति के अतिरिक्त, यह आदेश दे सकेगा कि वह परिवादी को वह खर्चा, जो उसने अभियोजन में उपगत किया है, पूर्णतः या भागतः दे, और यह भी आदेश दे सकेगा कि संदाय में व्यतिक्रम होने पर अभियुक्त तीस दिन से अनधिक की अवधि के लिए सादा कारावास भोगेगा; और ऐसे खर्चे में प्रक्रिया-फीसों, साक्षियों तथा अधिवक्ता की फीसों के बारे में उपगत ऐसे व्यय सम्मिलित हो सकेंगे जिन्हें न्यायालय युक्तियुक्त समझे।
(2) इस धारा के अधीन आदेश अपील न्यायालय द्वारा, अथवा उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय द्वारा भी, जब वह पुनरीक्षण की अपनी शक्तियों का प्रयोग कर रहा हो, किया जा सकेगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
