पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 386 अब CrPC धारा 347 है
जब रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार को सिविल न्यायालय माना जाएगा।
पुराना कानून
BNSS §386
जब रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार को सिविल न्यायालय माना जाएगा।
जब राज्य सरकार ऐसा निर्देश देती है, तो पंजीकरण अधिनियम, 1908 (16 ऑफ 1908) के तहत नियुक्त कोई रजिस्ट्रार या कोई उप-रजिस्ट्रार धारा 384 और 385 के अर्थ में सिविल न्यायालय माना जाएगा।
पूरा पढ़ें: BNSS §386नया कानून
CrPC §347
धारा 347. रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार कब सिविल न्यायालय समझा जाएगा
347. रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार कब सिविल न्यायालय समझा जाएगा
जब राज्य सरकार ऐसा निदेश देती है, तब रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) के अधीन नियुक्त कोई रजिस्ट्रार या कोई उप-रजिस्ट्रार धारा 345 और धारा 346 के अर्थ के अंतर्गत सिविल न्यायालय समझा जाएगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §347जब राज्य सरकार ऐसा निदेश देती है, तब रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) के अधीन नियुक्त कोई रजिस्ट्रार या कोई उप-रजिस्ट्रार धारा 345 और धारा 346 के अर्थ के अंतर्गत सिविल न्यायालय समझा जाएगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
