पाठ बदला गया है
BNSS धारा 341 अब CrPC धारा 304 है
कुछ मामलों में राज्य के खर्चे पर अभियुक्तों को कानूनी सहायता प्रदान की जाती है।
पुराना कानून
BNSS §341
कुछ मामलों में राज्य के खर्चे पर अभियुक्तों को कानूनी सहायता प्रदान की जाती है।
(1) जहां किसी न्यायालय के समक्ष मुकदमे या अपील में अभियुक्त का प्रतिनिधित्व किसी अधिवक्ता द्वारा नहीं किया जाता है, और जहां न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि अभियुक्त के पास अधिवक्ता नियुक्त करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं, तो न्यायालय राज्य के खर्च पर उसकी रक्षा के लिए एक अधिवक्ता नियुक्त करेगा।
(2) उच्च न्यायालय, राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति से, निम्नलिखित के लिए नियम बना सकता है---
(क) उपधारा (1) के अधीन बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के चयन की विधि;
(ख) न्यायालयों द्वारा ऐसे अधिवक्ताओं को दी जाने वाली सुविधाएं;
(ग) सरकार द्वारा ऐसे अधिवक्ताओं को देय शुल्क, और सामान्यतः, उपधारा (1) के प्रयोजनों को पूरा करने के लिए।
(3) राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा यह निर्देश दे सकती है कि अधिसूचना में निर्दिष्ट तिथि से उपधारा (1) और (2) के प्रावधान राज्य के अन्य न्यायालयों के समक्ष किसी भी प्रकार के मुकदमों के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे सत्र न्यायालयों के समक्ष मुकदमों के संबंध में लागू होते हैं।
पूरा पढ़ें: BNSS §341(2) उच्च न्यायालय, राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति से, निम्नलिखित के लिए नियम बना सकता है---
(क) उपधारा (1) के अधीन बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के चयन की विधि;
(ख) न्यायालयों द्वारा ऐसे अधिवक्ताओं को दी जाने वाली सुविधाएं;
(ग) सरकार द्वारा ऐसे अधिवक्ताओं को देय शुल्क, और सामान्यतः, उपधारा (1) के प्रयोजनों को पूरा करने के लिए।
(3) राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा यह निर्देश दे सकती है कि अधिसूचना में निर्दिष्ट तिथि से उपधारा (1) और (2) के प्रावधान राज्य के अन्य न्यायालयों के समक्ष किसी भी प्रकार के मुकदमों के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे सत्र न्यायालयों के समक्ष मुकदमों के संबंध में लागू होते हैं।
नया कानून
CrPC §304
धारा 304. कतिपय मामलों में राज्य के व्यय पर अभियुक्त को विधिक सहायता
304. कतिपय मामलों में राज्य के व्यय पर अभियुक्त को विधिक सहायता
(1) जहां सेशन न्यायालय के समक्ष किसी विचारण में अभियुक्त का प्रतिनिधित्व किसी प्लीडर द्वारा नहीं किया जाता है और जहां न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि अभियुक्त के पास प्लीडर नियोजित करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं, वहां न्यायालय राज्य के व्यय पर उसकी प्रतिरक्षा के लिए प्लीडर नियत करेगा।
(2) उच्च न्यायालय, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से, निम्नलिखित के लिए उपबंध करने वाले नियम बना सकेगा—
(क) उपधारा (1) के अधीन प्रतिरक्षा के लिए प्लीडरों के चुने जाने की रीति;
(ख) ऐसे प्लीडरों को न्यायालयों द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं;
(ग) ऐसे प्लीडरों को सरकार द्वारा संदेय फीस,
और साधारणतया उपधारा (1) के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए।
(3) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि अधिसूचना में विनिर्दिष्ट तारीख से, उपधारा (1) और उपधारा (2) के उपबंध, राज्य के अन्य न्यायालयों के समक्ष विचारणों के किसी वर्ग के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे सेशन न्यायालयों के समक्ष विचारणों के संबंध में लागू होते हैं।
पूरा पढ़ें: CrPC §304(1) जहां सेशन न्यायालय के समक्ष किसी विचारण में अभियुक्त का प्रतिनिधित्व किसी प्लीडर द्वारा नहीं किया जाता है और जहां न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि अभियुक्त के पास प्लीडर नियोजित करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं, वहां न्यायालय राज्य के व्यय पर उसकी प्रतिरक्षा के लिए प्लीडर नियत करेगा।
(2) उच्च न्यायालय, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से, निम्नलिखित के लिए उपबंध करने वाले नियम बना सकेगा—
(क) उपधारा (1) के अधीन प्रतिरक्षा के लिए प्लीडरों के चुने जाने की रीति;
(ख) ऐसे प्लीडरों को न्यायालयों द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं;
(ग) ऐसे प्लीडरों को सरकार द्वारा संदेय फीस,
और साधारणतया उपधारा (1) के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए।
(3) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि अधिसूचना में विनिर्दिष्ट तारीख से, उपधारा (1) और उपधारा (2) के उपबंध, राज्य के अन्य न्यायालयों के समक्ष विचारणों के किसी वर्ग के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे सेशन न्यायालयों के समक्ष विचारणों के संबंध में लागू होते हैं।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
