पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 328 अब CrPC धारा 292 है
टकसाल के अधिकारियों के साक्ष्य।
पुराना कानून
BNSS §328
टकसाल के अधिकारियों के साक्ष्य।
(1) कोई भी दस्तावेज जो किसी टकसाल या किसी नोट मुद्रण प्रेस या किसी सुरक्षा मुद्रण प्रेस (जिसमें स्टाम्प और स्टेशनरी नियंत्रक का अधिकारी भी शामिल है) या किसी फोरेंसिक विभाग या फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के प्रभाग या किसी सरकारी संदिग्ध दस्तावेज परीक्षक या किसी राज्य संदिग्ध दस्तावेज परीक्षक के राजपत्रित अधिकारी द्वारा, जैसा कि केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट कर सकती है, किसी भी मामले या वस्तु पर, जिसे इस संहिता के अंतर्गत किसी कार्यवाही के दौरान जांच और रिपोर्ट के लिए विधिवत प्रस्तुत किया गया हो, इस संहिता के अंतर्गत किसी जांच, मुकदमे या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में प्रयोग किया जा सकता है, भले ही ऐसे अधिकारी को गवाह के रूप में न बुलाया गया हो।
(2) न्यायालय, यदि उचित समझे तो, किसी ऐसे अधिकारी को उसकी रिपोर्ट के विषयवस्तु के संबंध में तलब कर उसकी जांच कर सकता है:
बशर्ते कि ऐसे किसी भी अधिकारी को उस रिपोर्ट के आधार पर कोई भी अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए नहीं बुलाया जाएगा।
(3) भारतीय सुरक्षा अधिनियम, 2023 की धारा 129 और 130 के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे किसी भी अधिकारी को महाप्रबंधक या किसी टकसाल या किसी नोट मुद्रण प्रेस या किसी सुरक्षा मुद्रण प्रेस या किसी फोरेंसिक विभाग या फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला या सरकारी संदिग्ध दस्तावेज परीक्षक संगठन या राज्य संदिग्ध दस्तावेज परीक्षक संगठन के प्रभारी अधिकारी की अनुमति के बिना अनुमति नहीं दी जाएगी---
(क) रिपोर्ट जिस अप्रकाशित आधिकारिक अभिलेख पर आधारित है, उससे प्राप्त कोई साक्ष्य प्रस्तुत करना; या
(ख) किसी विषय या वस्तु की जांच के दौरान उसके द्वारा लागू किए गए किसी भी परीक्षण की प्रकृति या विवरण का खुलासा करना।
पूरा पढ़ें: BNSS §328(2) न्यायालय, यदि उचित समझे तो, किसी ऐसे अधिकारी को उसकी रिपोर्ट के विषयवस्तु के संबंध में तलब कर उसकी जांच कर सकता है:
बशर्ते कि ऐसे किसी भी अधिकारी को उस रिपोर्ट के आधार पर कोई भी अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए नहीं बुलाया जाएगा।
(3) भारतीय सुरक्षा अधिनियम, 2023 की धारा 129 और 130 के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे किसी भी अधिकारी को महाप्रबंधक या किसी टकसाल या किसी नोट मुद्रण प्रेस या किसी सुरक्षा मुद्रण प्रेस या किसी फोरेंसिक विभाग या फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला या सरकारी संदिग्ध दस्तावेज परीक्षक संगठन या राज्य संदिग्ध दस्तावेज परीक्षक संगठन के प्रभारी अधिकारी की अनुमति के बिना अनुमति नहीं दी जाएगी---
(क) रिपोर्ट जिस अप्रकाशित आधिकारिक अभिलेख पर आधारित है, उससे प्राप्त कोई साक्ष्य प्रस्तुत करना; या
(ख) किसी विषय या वस्तु की जांच के दौरान उसके द्वारा लागू किए गए किसी भी परीक्षण की प्रकृति या विवरण का खुलासा करना।
नया कानून
CrPC §292
टकसाल के अधिकारियों के साक्ष्य।
(1) कोई भी दस्तावेज, जो किसी टकसाल या नोट मुद्रण प्रेस या सुरक्षा मुद्रण प्रेस (स्टाम्प और स्टेशनरी नियंत्रक के अधिकारी सहित) या किसी फोरेंसिक विभाग या फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के प्रभाग या किसी सरकारी संदिग्ध दस्तावेज परीक्षक या किसी राज्य संदिग्ध दस्तावेज परीक्षक, जैसा भी मामला हो, के किसी अधिकारी द्वारा इस संहिता के तहत किसी कार्यवाही के दौरान जांच और रिपोर्ट के लिए विधिवत प्रस्तुत किसी मामले या वस्तु पर रिपोर्ट होने का दावा करता हो, उसे इस संहिता के तहत किसी जांच, मुकदमे या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, भले ही ऐसे अधिकारी को गवाह के रूप में न बुलाया गया हो।
(2) न्यायालय, यदि उचित समझे तो, किसी ऐसे अधिकारी को उसकी रिपोर्ट के विषयवस्तु के संबंध में तलब कर उसकी जांच कर सकता है:
बशर्ते कि ऐसे किसी भी अधिकारी को उस रिपोर्ट के आधार पर कोई भी अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए नहीं बुलाया जाएगा।
(3) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1 ऑफ 1872) की धारा 123 और 124 के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे किसी अधिकारी को [ महाप्रबंधक या किसी टकसाल या किसी नोट मुद्रण प्रेस या किसी सुरक्षा मुद्रण प्रेस या किसी फोरेंसिक विभाग या फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला या सरकारी संदिग्ध दस्तावेज परीक्षक संगठन या राज्य संदिग्ध दस्तावेज परीक्षक संगठन के प्रभारी अधिकारी की अनुमति के बिना,] अनुमति नहीं दी जाएगी---
(क) रिपोर्ट जिस अप्रकाशित आधिकारिक अभिलेख पर आधारित है, उससे प्राप्त कोई साक्ष्य प्रस्तुत करना; या
(ख) किसी विषय या वस्तु की जांच के दौरान उसके द्वारा लागू किए गए किसी भी परीक्षण की प्रकृति या विवरण का खुलासा करना।
पूरा पढ़ें: CrPC §292(2) न्यायालय, यदि उचित समझे तो, किसी ऐसे अधिकारी को उसकी रिपोर्ट के विषयवस्तु के संबंध में तलब कर उसकी जांच कर सकता है:
बशर्ते कि ऐसे किसी भी अधिकारी को उस रिपोर्ट के आधार पर कोई भी अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए नहीं बुलाया जाएगा।
(3) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1 ऑफ 1872) की धारा 123 और 124 के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे किसी अधिकारी को [ महाप्रबंधक या किसी टकसाल या किसी नोट मुद्रण प्रेस या किसी सुरक्षा मुद्रण प्रेस या किसी फोरेंसिक विभाग या फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला या सरकारी संदिग्ध दस्तावेज परीक्षक संगठन या राज्य संदिग्ध दस्तावेज परीक्षक संगठन के प्रभारी अधिकारी की अनुमति के बिना,] अनुमति नहीं दी जाएगी---
(क) रिपोर्ट जिस अप्रकाशित आधिकारिक अभिलेख पर आधारित है, उससे प्राप्त कोई साक्ष्य प्रस्तुत करना; या
(ख) किसी विषय या वस्तु की जांच के दौरान उसके द्वारा लागू किए गए किसी भी परीक्षण की प्रकृति या विवरण का खुलासा करना।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
