पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 327 अब CrPC धारा 291A है
मजिस्ट्रेट की पहचान रिपोर्ट।
पुराना कानून
BNSS §327
मजिस्ट्रेट की पहचान रिपोर्ट।
(1) किसी व्यक्ति या संपत्ति के संबंध में किसी कार्यकारी मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर से पहचान रिपोर्ट होने का दावा करने वाला कोई भी दस्तावेज इस संहिता के तहत किसी भी जांच, मुकदमे या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, भले ही ऐसे मजिस्ट्रेट को गवाह के रूप में न बुलाया गया हो।
बशर्ते कि यदि ऐसी रिपोर्ट में किसी संदिग्ध या गवाह का बयान शामिल है जिस पर भारतीय साक्षी अधिनियम, 2023 की धारा 19, धारा 26, धारा 27, धारा 158 या धारा 160 के प्रावधान लागू होते हैं, तो ऐसे बयान का उपयोग इस उपधारा के तहत उन धाराओं के प्रावधानों के अनुसार ही किया जाएगा।
(2) न्यायालय, यदि उचित समझे, और अभियोजन पक्ष या अभियुक्त के आवेदन पर, उक्त रिपोर्ट के विषयवस्तु के संबंध में ऐसे मजिस्ट्रेट को बुलाकर उसकी जांच करेगा।
पूरा पढ़ें: BNSS §327बशर्ते कि यदि ऐसी रिपोर्ट में किसी संदिग्ध या गवाह का बयान शामिल है जिस पर भारतीय साक्षी अधिनियम, 2023 की धारा 19, धारा 26, धारा 27, धारा 158 या धारा 160 के प्रावधान लागू होते हैं, तो ऐसे बयान का उपयोग इस उपधारा के तहत उन धाराओं के प्रावधानों के अनुसार ही किया जाएगा।
(2) न्यायालय, यदि उचित समझे, और अभियोजन पक्ष या अभियुक्त के आवेदन पर, उक्त रिपोर्ट के विषयवस्तु के संबंध में ऐसे मजिस्ट्रेट को बुलाकर उसकी जांच करेगा।
नया कानून
CrPC §291A
धारा 291A. मजिस्ट्रेट की शिनाख्त रिपोर्ट
291A. मजिस्ट्रेट की शिनाख्त रिपोर्ट
(1) कोई दस्तावेज, जो किसी व्यक्ति या संपत्ति के संबंध में किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर के अधीन शिनाख्त की रिपोर्ट होना तात्पर्यित है, इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में उपयोग में लाया जा सकेगा, यद्यपि ऐसा मजिस्ट्रेट साक्षी के रूप में नहीं बुलाया गया है:
परन्तु जहां ऐसी रिपोर्ट में किसी संदिग्ध व्यक्ति या साक्षी का कोई ऐसा कथन अंतर्विष्ट है जिसे भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) की धारा 21, धारा 32, धारा 33, धारा 155 या धारा 157, जैसी स्थिति हो, के उपबंध लागू होते हैं, वहां ऐसा कथन इस उपधारा के अधीन उन धाराओं के उपबंधों के अनुसार के सिवाय उपयोग में नहीं लाया जाएगा।
(2) न्यायालय, यदि वह ठीक समझे तो, ऐसे मजिस्ट्रेट को उक्त रिपोर्ट की विषय-वस्तु के बारे में समन कर सकेगा और उसकी परीक्षा कर सकेगा, तथा अभियोजन या अभियुक्त के आवेदन पर ऐसा करेगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §291A(1) कोई दस्तावेज, जो किसी व्यक्ति या संपत्ति के संबंध में किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर के अधीन शिनाख्त की रिपोर्ट होना तात्पर्यित है, इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में उपयोग में लाया जा सकेगा, यद्यपि ऐसा मजिस्ट्रेट साक्षी के रूप में नहीं बुलाया गया है:
परन्तु जहां ऐसी रिपोर्ट में किसी संदिग्ध व्यक्ति या साक्षी का कोई ऐसा कथन अंतर्विष्ट है जिसे भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) की धारा 21, धारा 32, धारा 33, धारा 155 या धारा 157, जैसी स्थिति हो, के उपबंध लागू होते हैं, वहां ऐसा कथन इस उपधारा के अधीन उन धाराओं के उपबंधों के अनुसार के सिवाय उपयोग में नहीं लाया जाएगा।
(2) न्यायालय, यदि वह ठीक समझे तो, ऐसे मजिस्ट्रेट को उक्त रिपोर्ट की विषय-वस्तु के बारे में समन कर सकेगा और उसकी परीक्षा कर सकेगा, तथा अभियोजन या अभियुक्त के आवेदन पर ऐसा करेगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
