पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 310 अब CrPC धारा 275 है
वारंट मामलों में रिकॉर्ड।
पुराना कानून
BNSS §310
वारंट मामलों में रिकॉर्ड।
(1) मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारणित सभी वारंट मामलों में, प्रत्येक गवाह की गवाही, उसकी परीक्षा के दौरान, मजिस्ट्रेट द्वारा स्वयं लिखित रूप में दर्ज की जाएगी।
या तो खुले न्यायालय में उनके निर्देशानुसार, या यदि वे शारीरिक या अन्य अक्षमता के कारण ऐसा करने में असमर्थ हों, तो उनके निर्देशन और पर्यवेक्षण में, इस संबंध में उनके द्वारा नियुक्त न्यायालय के किसी अधिकारी द्वारा।
बशर्ते कि इस उपधारा के तहत किसी गवाह के साक्ष्य को अपराध के आरोपी व्यक्ति के वकील की उपस्थिति में ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भी रिकॉर्ड किया जा सकता है।
(2) जहाँ मजिस्ट्रेट साक्ष्य दर्ज करवाता है, वहाँ वह यह प्रमाण पत्र दर्ज करेगा कि उपधारा (1) में निर्दिष्ट कारणों से साक्ष्य स्वयं दर्ज नहीं किया जा सका।
(3) ऐसा साक्ष्य सामान्यतः वर्णनात्मक रूप में दर्ज किया जाएगा; परन्तु मजिस्ट्रेट अपने विवेक से ऐसे साक्ष्य के किसी भाग को प्रश्न और उत्तर के रूप में दर्ज कर सकता है, या करवा सकता है।
(4) इस प्रकार दर्ज किए गए साक्ष्य पर मजिस्ट्रेट द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे और वह अभिलेख का हिस्सा होगा।
पूरा पढ़ें: BNSS §310या तो खुले न्यायालय में उनके निर्देशानुसार, या यदि वे शारीरिक या अन्य अक्षमता के कारण ऐसा करने में असमर्थ हों, तो उनके निर्देशन और पर्यवेक्षण में, इस संबंध में उनके द्वारा नियुक्त न्यायालय के किसी अधिकारी द्वारा।
बशर्ते कि इस उपधारा के तहत किसी गवाह के साक्ष्य को अपराध के आरोपी व्यक्ति के वकील की उपस्थिति में ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भी रिकॉर्ड किया जा सकता है।
(2) जहाँ मजिस्ट्रेट साक्ष्य दर्ज करवाता है, वहाँ वह यह प्रमाण पत्र दर्ज करेगा कि उपधारा (1) में निर्दिष्ट कारणों से साक्ष्य स्वयं दर्ज नहीं किया जा सका।
(3) ऐसा साक्ष्य सामान्यतः वर्णनात्मक रूप में दर्ज किया जाएगा; परन्तु मजिस्ट्रेट अपने विवेक से ऐसे साक्ष्य के किसी भाग को प्रश्न और उत्तर के रूप में दर्ज कर सकता है, या करवा सकता है।
(4) इस प्रकार दर्ज किए गए साक्ष्य पर मजिस्ट्रेट द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे और वह अभिलेख का हिस्सा होगा।
नया कानून
CrPC §275
धारा 275. वारंट-मामलों में अभिलेख
275. वारंट-मामलों में अभिलेख
(1) मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारित सब वारंट-मामलों में, हर साक्षी का साक्ष्य, ज्यों-ज्यों उसकी परीक्षा आगे बढ़ती है, त्यों-त्यों या तो मजिस्ट्रेट द्वारा स्वयं, या खुले न्यायालय में उसके श्रुतलेख से, अथवा जहां वह शारीरिक या अन्य असमर्थता के कारण ऐसा करने में असमर्थ है वहां उसके निदेश और अधीक्षण के अधीन, न्यायालय के ऐसे अधिकारी द्वारा, जिसे उसने इस निमित्त नियुक्त किया है, लेखबद्ध किया जाएगा:
परन्तु इस उपधारा के अधीन किसी साक्षी का साक्ष्य, अपराध के अभियुक्त व्यक्ति के अधिवक्ता की उपस्थिति में श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रानिक साधनों द्वारा भी अभिलिखित किया जा सकेगा।
(2) जहां मजिस्ट्रेट साक्ष्य को लेखबद्ध कराता है, वहां वह यह प्रमाणपत्र अभिलिखित करेगा कि उपधारा (1) में निर्दिष्ट कारणों से साक्ष्य उसके द्वारा स्वयं लेखबद्ध नहीं किया जा सका।
(3) ऐसा साक्ष्य साधारणतया वृत्तांत के रूप में लेखबद्ध किया जाएगा, किन्तु मजिस्ट्रेट अपने विवेकानुसार ऐसे साक्ष्य के किसी भाग को प्रश्न और उत्तर के रूप में लेखबद्ध कर सकेगा या करा सकेगा।
(4) इस प्रकार लेखबद्ध किया गया साक्ष्य मजिस्ट्रेट द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा और अभिलेख का भाग होगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §275(1) मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारित सब वारंट-मामलों में, हर साक्षी का साक्ष्य, ज्यों-ज्यों उसकी परीक्षा आगे बढ़ती है, त्यों-त्यों या तो मजिस्ट्रेट द्वारा स्वयं, या खुले न्यायालय में उसके श्रुतलेख से, अथवा जहां वह शारीरिक या अन्य असमर्थता के कारण ऐसा करने में असमर्थ है वहां उसके निदेश और अधीक्षण के अधीन, न्यायालय के ऐसे अधिकारी द्वारा, जिसे उसने इस निमित्त नियुक्त किया है, लेखबद्ध किया जाएगा:
परन्तु इस उपधारा के अधीन किसी साक्षी का साक्ष्य, अपराध के अभियुक्त व्यक्ति के अधिवक्ता की उपस्थिति में श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रानिक साधनों द्वारा भी अभिलिखित किया जा सकेगा।
(2) जहां मजिस्ट्रेट साक्ष्य को लेखबद्ध कराता है, वहां वह यह प्रमाणपत्र अभिलिखित करेगा कि उपधारा (1) में निर्दिष्ट कारणों से साक्ष्य उसके द्वारा स्वयं लेखबद्ध नहीं किया जा सका।
(3) ऐसा साक्ष्य साधारणतया वृत्तांत के रूप में लेखबद्ध किया जाएगा, किन्तु मजिस्ट्रेट अपने विवेकानुसार ऐसे साक्ष्य के किसी भाग को प्रश्न और उत्तर के रूप में लेखबद्ध कर सकेगा या करा सकेगा।
(4) इस प्रकार लेखबद्ध किया गया साक्ष्य मजिस्ट्रेट द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा और अभिलेख का भाग होगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
