पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 305 अब CrPC धारा 270 है
कैदी को हिरासत में अदालत में लाया जाएगा।
पुराना कानून
BNSS §305
कैदी को हिरासत में अदालत में लाया जाएगा।
धारा 304 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, कारागार प्रभारी अधिकारी, धारा 302 की उपधारा (1) के तहत जारी किए गए और आवश्यक होने पर उसकी उपधारा (2) के तहत विधिवत प्रतिहस्ताक्षरित आदेश की प्राप्ति पर, आदेश में नामित व्यक्ति को उस न्यायालय में ले जाने की व्यवस्था करेगा जिसमें उसकी उपस्थिति आवश्यक है, ताकि वह आदेश में उल्लिखित समय पर वहां उपस्थित हो सके, और उसे न्यायालय में या उसके निकट तब तक हिरासत में रखने की व्यवस्था करेगा जब तक उसकी जांच न हो जाए या जब तक न्यायालय उसे उस कारागार में वापस ले जाने की अनुमति न दे जिसमें उसे बंद या हिरासत में रखा गया था।
पूरा पढ़ें: BNSS §305नया कानून
CrPC §270
धारा 270. बंदी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना
270. बंदी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना
धारा 269 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कारागार का भारसाधक अधिकारी, धारा 267 की उपधारा (1) के अधीन किए गए और, जहां आवश्यक हो वहां, उसकी उपधारा (2) के अधीन सम्यक् रूप से प्रतिहस्ताक्षरित आदेश के परिदान पर, आदेश में नामित व्यक्ति को उस न्यायालय में ले जाएगा जिसमें उसकी उपस्थिति अपेक्षित है, जिससे वह वहां आदेश में उल्लिखित समय पर उपस्थित रहे, और उसे न्यायालय में या उसके निकट अभिरक्षा में तब तक रखवाएगा जब तक उसकी परीक्षा नहीं कर ली जाती या जब तक न्यायालय उसे उस कारागार में, जिसमें वह परिरुद्ध या निरुद्ध था, वापस ले जाए जाने के लिए प्राधिकृत नहीं कर देता।
पूरा पढ़ें: CrPC §270धारा 269 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कारागार का भारसाधक अधिकारी, धारा 267 की उपधारा (1) के अधीन किए गए और, जहां आवश्यक हो वहां, उसकी उपधारा (2) के अधीन सम्यक् रूप से प्रतिहस्ताक्षरित आदेश के परिदान पर, आदेश में नामित व्यक्ति को उस न्यायालय में ले जाएगा जिसमें उसकी उपस्थिति अपेक्षित है, जिससे वह वहां आदेश में उल्लिखित समय पर उपस्थित रहे, और उसे न्यायालय में या उसके निकट अभिरक्षा में तब तक रखवाएगा जब तक उसकी परीक्षा नहीं कर ली जाती या जब तक न्यायालय उसे उस कारागार में, जिसमें वह परिरुद्ध या निरुद्ध था, वापस ले जाए जाने के लिए प्राधिकृत नहीं कर देता।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
