पाठ बदला गया है
BNSS धारा 242 अब CrPC धारा 219 है
एक ही वर्ष में एक ही प्रकार के अपराधों के लिए एक साथ आरोप लगाए जा सकते हैं।
पुराना कानून
BNSS §242
एक ही वर्ष में एक ही प्रकार के अपराधों के लिए एक साथ आरोप लगाए जा सकते हैं।
(1) जब किसी व्यक्ति पर एक ही प्रकार के एक से अधिक अपराधों का आरोप लगाया जाता है, जो पहले अपराध से लेकर अंतिम अपराध तक बारह महीनों के अंतराल में किए गए हों, चाहे वे अपराध एक ही व्यक्ति के संबंध में हों या नहीं, तो उस पर अधिकतम पाँच अपराधों के लिए आरोप लगाया जा सकता है और एक ही मुकदमे में उन अपराधों के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है।
(2) अपराध एक ही प्रकार के होते हैं जब वे भारतीय न्याय संहिता, 2023 या किसी विशेष या स्थानीय कानून की एक ही धारा के तहत समान मात्रा में दंडनीय हों:
बशर्ते कि इस धारा के प्रयोजनों के लिए, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 303 की उपधारा (2) के तहत दंडनीय अपराध को उक्त संहिता की धारा 305 के तहत दंडनीय अपराध के समान प्रकार का अपराध माना जाएगा, और उक्त संहिता की किसी धारा या किसी विशेष या स्थानीय कानून के तहत दंडनीय अपराध को ऐसे अपराध को करने के प्रयास के समान प्रकार का अपराध माना जाएगा, जब ऐसा प्रयास एक अपराध हो।
पूरा पढ़ें: BNSS §242(2) अपराध एक ही प्रकार के होते हैं जब वे भारतीय न्याय संहिता, 2023 या किसी विशेष या स्थानीय कानून की एक ही धारा के तहत समान मात्रा में दंडनीय हों:
बशर्ते कि इस धारा के प्रयोजनों के लिए, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 303 की उपधारा (2) के तहत दंडनीय अपराध को उक्त संहिता की धारा 305 के तहत दंडनीय अपराध के समान प्रकार का अपराध माना जाएगा, और उक्त संहिता की किसी धारा या किसी विशेष या स्थानीय कानून के तहत दंडनीय अपराध को ऐसे अपराध को करने के प्रयास के समान प्रकार का अपराध माना जाएगा, जब ऐसा प्रयास एक अपराध हो।
नया कानून
CrPC §219
धारा 219. वर्ष के भीतर किए गए एक ही किस्म के तीन अपराधों का आरोप एक साथ लगाया जा सकेगा
219. वर्ष के भीतर किए गए एक ही किस्म के तीन अपराधों का आरोप एक साथ लगाया जा सकेगा
(1) जब किसी व्यक्ति पर एक ही किस्म के एक से अधिक अपराधों का, जो ऐसे अपराधों में से प्रथम से अंतिम तक बारह मास की कालावधि के भीतर किए गए हैं, अभियोग है, चाहे वे एक ही व्यक्ति के बारे में हों या नहीं, तब उस पर उनमें से किसी भी संख्या के लिए, जो तीन से अधिक न हो, आरोप लगाया जा सकेगा और एक ही विचारण में उसका विचारण किया जा सकेगा।
(2) अपराध एक ही किस्म के तब हैं जब वे भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की या किसी विशेष या स्थानीय विधि की एक ही धारा के अधीन दण्ड की समान मात्रा से दण्डनीय हैं :
परन्तु इस धारा के प्रयोजनों के लिए, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 379 के अधीन दण्डनीय अपराध उक्त संहिता की धारा 380 के अधीन दण्डनीय अपराध की ही किस्म का अपराध समझा जाएगा, और उक्त संहिता की या किसी विशेष या स्थानीय विधि की किसी धारा के अधीन दण्डनीय अपराध ऐसे अपराध को करने के प्रयत्न की ही किस्म का अपराध समझा जाएगा, जब ऐसा प्रयत्न अपराध है।
पूरा पढ़ें: CrPC §219(1) जब किसी व्यक्ति पर एक ही किस्म के एक से अधिक अपराधों का, जो ऐसे अपराधों में से प्रथम से अंतिम तक बारह मास की कालावधि के भीतर किए गए हैं, अभियोग है, चाहे वे एक ही व्यक्ति के बारे में हों या नहीं, तब उस पर उनमें से किसी भी संख्या के लिए, जो तीन से अधिक न हो, आरोप लगाया जा सकेगा और एक ही विचारण में उसका विचारण किया जा सकेगा।
(2) अपराध एक ही किस्म के तब हैं जब वे भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की या किसी विशेष या स्थानीय विधि की एक ही धारा के अधीन दण्ड की समान मात्रा से दण्डनीय हैं :
परन्तु इस धारा के प्रयोजनों के लिए, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 379 के अधीन दण्डनीय अपराध उक्त संहिता की धारा 380 के अधीन दण्डनीय अपराध की ही किस्म का अपराध समझा जाएगा, और उक्त संहिता की या किसी विशेष या स्थानीय विधि की किसी धारा के अधीन दण्डनीय अपराध ऐसे अपराध को करने के प्रयत्न की ही किस्म का अपराध समझा जाएगा, जब ऐसा प्रयत्न अपराध है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
