पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 240 अब CrPC धारा 217 है
आरोप में परिवर्तन होने पर गवाहों को पुनः बुलाना।
पुराना कानून
BNSS §240
आरोप में परिवर्तन होने पर गवाहों को पुनः बुलाना।
जब भी मुकदमे की शुरुआत के बाद न्यायालय द्वारा आरोप में परिवर्तन या कोई आरोप जोड़ा जाता है, तो अभियोजक और आरोपी को इसकी अनुमति दी जाएगी—
(क) किसी भी गवाह को, जिसकी पहले जांच की जा चुकी हो, वापस बुलाना या पुनः तलब करना और ऐसे परिवर्तन या परिवर्धन के संबंध में उसकी जांच करना, जब तक कि न्यायालय, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से, यह न समझे कि अभियोजक या अभियुक्त, जैसा भी मामला हो, उत्पीड़न या विलंब के उद्देश्य से या न्याय के उद्देश्यों को विफल करने के लिए ऐसे गवाह को वापस बुलाना या पुनः जांच करना चाहता है;
(ख) न्यायालय द्वारा किसी अन्य गवाह को भी बुलाया जा सकता है जिसे न्यायालय प्रासंगिक समझे।
पूरा पढ़ें: BNSS §240(क) किसी भी गवाह को, जिसकी पहले जांच की जा चुकी हो, वापस बुलाना या पुनः तलब करना और ऐसे परिवर्तन या परिवर्धन के संबंध में उसकी जांच करना, जब तक कि न्यायालय, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से, यह न समझे कि अभियोजक या अभियुक्त, जैसा भी मामला हो, उत्पीड़न या विलंब के उद्देश्य से या न्याय के उद्देश्यों को विफल करने के लिए ऐसे गवाह को वापस बुलाना या पुनः जांच करना चाहता है;
(ख) न्यायालय द्वारा किसी अन्य गवाह को भी बुलाया जा सकता है जिसे न्यायालय प्रासंगिक समझे।
नया कानून
CrPC §217
धारा 217. आरोप परिवर्तित किए जाने पर साक्षियों का पुनः बुलाया जाना
217. आरोप परिवर्तित किए जाने पर साक्षियों का पुनः बुलाया जाना
जब कभी विचारण के प्रारंभ के पश्चात् न्यायालय द्वारा कोई आरोप परिवर्तित किया जाता है या उसमें परिवर्धन किया जाता है, तब अभियोजक को और अभियुक्त को यह अनुज्ञात होगा कि वे—
(क) किसी ऐसे साक्षी को, जिसकी परीक्षा की जा चुकी हो, पुनः बुलाएं या पुनः समन करें और ऐसे परिवर्तन या परिवर्धन के प्रति निर्देश से उसकी परीक्षा करें, जब तक कि न्यायालय, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, यह न समझे कि यथास्थिति, अभियोजक या अभियुक्त ऐसे साक्षी को तंग करने या विलंब के प्रयोजन से या न्याय के उद्देश्यों को विफल करने के प्रयोजन से पुनः बुलाना या उसकी पुनः परीक्षा करना चाहता है;
(ख) किसी ऐसे अतिरिक्त साक्षी को भी बुलाएं जिसे न्यायालय तात्विक समझे।
पूरा पढ़ें: CrPC §217जब कभी विचारण के प्रारंभ के पश्चात् न्यायालय द्वारा कोई आरोप परिवर्तित किया जाता है या उसमें परिवर्धन किया जाता है, तब अभियोजक को और अभियुक्त को यह अनुज्ञात होगा कि वे—
(क) किसी ऐसे साक्षी को, जिसकी परीक्षा की जा चुकी हो, पुनः बुलाएं या पुनः समन करें और ऐसे परिवर्तन या परिवर्धन के प्रति निर्देश से उसकी परीक्षा करें, जब तक कि न्यायालय, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, यह न समझे कि यथास्थिति, अभियोजक या अभियुक्त ऐसे साक्षी को तंग करने या विलंब के प्रयोजन से या न्याय के उद्देश्यों को विफल करने के प्रयोजन से पुनः बुलाना या उसकी पुनः परीक्षा करना चाहता है;
(ख) किसी ऐसे अतिरिक्त साक्षी को भी बुलाएं जिसे न्यायालय तात्विक समझे।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
