पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 220 अब CrPC धारा 198A है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 के तहत अपराधों का अभियोजन।
पुराना कानून
BNSS §220
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 के तहत अपराधों का अभियोजन।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 के तहत दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान न्यायालय तब तक नहीं लेगा, जब तक कि ऐसे अपराध का गठन करने वाले तथ्यों की पुलिस रिपोर्ट न हो, या अपराध से पीड़ित व्यक्ति द्वारा, या उसके पिता, माता, भाई, बहन, या उसके पिता या माता के भाई या बहन द्वारा, या न्यायालय की अनुमति से, रक्त, विवाह या दत्तक ग्रहण द्वारा उससे संबंधित किसी अन्य व्यक्ति द्वारा शिकायत न की गई हो।
पूरा पढ़ें: BNSS §220नया कानून
CrPC §198A
धारा 198A. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498क के अधीन अपराधों का अभियोजन
198A. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498क के अधीन अपराधों का अभियोजन
कोई न्यायालय भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 498क के अधीन दंडनीय अपराध का संज्ञान उन तथ्यों की पुलिस रिपोर्ट पर, जो ऐसा अपराध गठित करते हैं, या अपराध से व्यथित व्यक्ति द्वारा या उसके पिता, माता, भाई, बहन द्वारा या उसके पिता या माता के भाई या बहन द्वारा, या न्यायालय की इजाजत से, रक्त, विवाह या दत्तक ग्रहण द्वारा उससे संबंधित किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किए गए परिवाद पर के सिवाय, नहीं करेगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §198Aकोई न्यायालय भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 498क के अधीन दंडनीय अपराध का संज्ञान उन तथ्यों की पुलिस रिपोर्ट पर, जो ऐसा अपराध गठित करते हैं, या अपराध से व्यथित व्यक्ति द्वारा या उसके पिता, माता, भाई, बहन द्वारा या उसके पिता या माता के भाई या बहन द्वारा, या न्यायालय की इजाजत से, रक्त, विवाह या दत्तक ग्रहण द्वारा उससे संबंधित किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किए गए परिवाद पर के सिवाय, नहीं करेगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
