पुराना कानून
BNSS §19
सहायक लोक अभियोजक।
(1) राज्य सरकार प्रत्येक जिले में मजिस्ट्रेट न्यायालयों में अभियोजन चलाने के लिए एक या एक से अधिक सहायक लोक अभियोजकों की नियुक्ति करेगी।
(2) केंद्र सरकार मजिस्ट्रेट न्यायालयों में किसी मामले या मामलों के वर्ग के संचालन के उद्देश्य से एक या एक से अधिक सहायक लोक अभियोजकों की नियुक्ति कर सकती है।
(3) उपधारा (1) और (2) में निहित प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यदि किसी विशेष मामले के प्रयोजन के लिए कोई सहायक लोक अभियोजक उपलब्ध न हो, तो जिला मजिस्ट्रेट राज्य सरकार को चौदह दिन का नोटिस देने के बाद किसी अन्य व्यक्ति को उस मामले का प्रभारी सहायक लोक अभियोजक नियुक्त कर सकता है।
बशर्ते कि कोई भी पुलिस अधिकारी सहायक लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त होने के योग्य नहीं होगा, यदि वह—
(क) उस अपराध की जांच में कोई भाग लिया है जिसके संबंध में अभियुक्त पर मुकदमा चलाया जा रहा है; या
(ख) निरीक्षक के पद से नीचे का है।
पूरा पढ़ें: BNSS §19(2) केंद्र सरकार मजिस्ट्रेट न्यायालयों में किसी मामले या मामलों के वर्ग के संचालन के उद्देश्य से एक या एक से अधिक सहायक लोक अभियोजकों की नियुक्ति कर सकती है।
(3) उपधारा (1) और (2) में निहित प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यदि किसी विशेष मामले के प्रयोजन के लिए कोई सहायक लोक अभियोजक उपलब्ध न हो, तो जिला मजिस्ट्रेट राज्य सरकार को चौदह दिन का नोटिस देने के बाद किसी अन्य व्यक्ति को उस मामले का प्रभारी सहायक लोक अभियोजक नियुक्त कर सकता है।
बशर्ते कि कोई भी पुलिस अधिकारी सहायक लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त होने के योग्य नहीं होगा, यदि वह—
(क) उस अपराध की जांच में कोई भाग लिया है जिसके संबंध में अभियुक्त पर मुकदमा चलाया जा रहा है; या
(ख) निरीक्षक के पद से नीचे का है।
नया कानून
CrPC §25
धारा 25. सहायक लोक अभियोजक
25. सहायक लोक अभियोजक
(1) राज्य सरकार हर जिले में मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों में अभियोजनों के संचालन के लिए एक या अधिक सहायक लोक अभियोजक नियुक्त करेगी।
(1क) केंद्रीय सरकार मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों में किसी मामले या मामलों के वर्ग के संचालन के प्रयोजन के लिए एक या अधिक सहायक लोक अभियोजक नियुक्त कर सकेगी।
(2) उपधारा (3) में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, कोई पुलिस अधिकारी सहायक लोक अभियोजक नियुक्त किए जाने के लिए पात्र नहीं होगा।
(3) जहां किसी विशिष्ट मामले के प्रयोजनों के लिए कोई सहायक लोक अभियोजक उपलब्ध नहीं है, वहां जिला मजिस्ट्रेट किसी अन्य व्यक्ति को उस मामले का भारसाधक सहायक लोक अभियोजक नियुक्त कर सकेगा:
परन्तु कोई पुलिस अधिकारी इस प्रकार नियुक्त नहीं किया जाएगा—
(क) यदि उसने उस अपराध के अन्वेषण में कोई भाग लिया है, जिसके संबंध में अभियुक्त का अभियोजन किया जा रहा है; या
(ख) यदि वह निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का है।
राज्य संशोधन
उड़ीसा:
धारा 25 की उपधारा (2) में निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:—
"परन्तु इस उपधारा की कोई बात राज्य सरकार को पुलिस अधिकारियों के माध्यम से सहायक लोक अभियोजक पर अपना नियंत्रण रखने से प्रतिषिद्ध करने वाली नहीं समझी जाएगी।"
[उड़ीसा अधिनियम 1995 का 6 द्वारा (10-3-1995 से प्रभावी)]
उत्तर प्रदेश:
धारा 25 की उपधारा (2) में निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाएगा और सदैव अंतःस्थापित किया गया समझा जाएगा, अर्थात्:—
"परन्तु इस उपधारा की कोई बात राज्य सरकार को पुलिस अधिकारियों के माध्यम से सहायक लोक अभियोजक पर अपना नियंत्रण रखने से प्रतिषिद्ध करने वाली नहीं समझी जाएगी।"
[उत्तर प्रदेश अधिनियम 1976 का 16, धारा 5 द्वारा (30-4-1976 से प्रभावी)]
पश्चिमी बंगाल:
धारा 25 की उपधारा (3) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्:—
"(3) जहां किसी विशिष्ट मामले के प्रयोजनों के लिए कोई सहायक लोक अभियोजक उपलब्ध नहीं है, वहां किसी अधिवक्ता को उस मामले का भारसाधक सहायक लोक अभियोजक नियुक्त किया जा सकेगा—
(क) जहां मामला ऐसे उपखंड के किसी क्षेत्र में न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय के समक्ष है, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट का मुख्यालय स्थित है, वहां जिला मजिस्ट्रेट द्वारा; या
(ख) जहां मामला खंड (क) में निर्दिष्ट उपखंड से भिन्न ऐसे उपखंड के किसी क्षेत्र में न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय के समक्ष है, जिसमें उपखंड मजिस्ट्रेट का मुख्यालय स्थित है, वहां उपखंड मजिस्ट्रेट द्वारा; या
(ग) जहां मामला खंड (क) और (ख) में निर्दिष्ट क्षेत्र से भिन्न किसी क्षेत्र में न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय के समक्ष है, वहां जिला मजिस्ट्रेट द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से प्राधिकृत किसी स्थानीय अधिकारी (पुलिस अधिकारी से भिन्न) द्वारा।
स्पष्टीकरण—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,—
(i) "अधिवक्ता" का वही अर्थ होगा जो अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (1961 का 5) में है;
(ii) "स्थानीय अधिकारी" से खंड (क) और (ख) में निर्दिष्ट क्षेत्र से भिन्न किसी क्षेत्र में राज्य सरकार का अधिकारी अभिप्रेत होगा।"
[पश्चिमी बंगाल अधिनियम 1985 का 17, धारा 3 द्वारा]
पूरा पढ़ें: CrPC §25(1) राज्य सरकार हर जिले में मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों में अभियोजनों के संचालन के लिए एक या अधिक सहायक लोक अभियोजक नियुक्त करेगी।
(1क) केंद्रीय सरकार मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों में किसी मामले या मामलों के वर्ग के संचालन के प्रयोजन के लिए एक या अधिक सहायक लोक अभियोजक नियुक्त कर सकेगी।
(2) उपधारा (3) में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, कोई पुलिस अधिकारी सहायक लोक अभियोजक नियुक्त किए जाने के लिए पात्र नहीं होगा।
(3) जहां किसी विशिष्ट मामले के प्रयोजनों के लिए कोई सहायक लोक अभियोजक उपलब्ध नहीं है, वहां जिला मजिस्ट्रेट किसी अन्य व्यक्ति को उस मामले का भारसाधक सहायक लोक अभियोजक नियुक्त कर सकेगा:
परन्तु कोई पुलिस अधिकारी इस प्रकार नियुक्त नहीं किया जाएगा—
(क) यदि उसने उस अपराध के अन्वेषण में कोई भाग लिया है, जिसके संबंध में अभियुक्त का अभियोजन किया जा रहा है; या
(ख) यदि वह निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का है।
राज्य संशोधन
उड़ीसा:
धारा 25 की उपधारा (2) में निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:—
"परन्तु इस उपधारा की कोई बात राज्य सरकार को पुलिस अधिकारियों के माध्यम से सहायक लोक अभियोजक पर अपना नियंत्रण रखने से प्रतिषिद्ध करने वाली नहीं समझी जाएगी।"
[उड़ीसा अधिनियम 1995 का 6 द्वारा (10-3-1995 से प्रभावी)]
उत्तर प्रदेश:
धारा 25 की उपधारा (2) में निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाएगा और सदैव अंतःस्थापित किया गया समझा जाएगा, अर्थात्:—
"परन्तु इस उपधारा की कोई बात राज्य सरकार को पुलिस अधिकारियों के माध्यम से सहायक लोक अभियोजक पर अपना नियंत्रण रखने से प्रतिषिद्ध करने वाली नहीं समझी जाएगी।"
[उत्तर प्रदेश अधिनियम 1976 का 16, धारा 5 द्वारा (30-4-1976 से प्रभावी)]
पश्चिमी बंगाल:
धारा 25 की उपधारा (3) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्:—
"(3) जहां किसी विशिष्ट मामले के प्रयोजनों के लिए कोई सहायक लोक अभियोजक उपलब्ध नहीं है, वहां किसी अधिवक्ता को उस मामले का भारसाधक सहायक लोक अभियोजक नियुक्त किया जा सकेगा—
(क) जहां मामला ऐसे उपखंड के किसी क्षेत्र में न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय के समक्ष है, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट का मुख्यालय स्थित है, वहां जिला मजिस्ट्रेट द्वारा; या
(ख) जहां मामला खंड (क) में निर्दिष्ट उपखंड से भिन्न ऐसे उपखंड के किसी क्षेत्र में न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय के समक्ष है, जिसमें उपखंड मजिस्ट्रेट का मुख्यालय स्थित है, वहां उपखंड मजिस्ट्रेट द्वारा; या
(ग) जहां मामला खंड (क) और (ख) में निर्दिष्ट क्षेत्र से भिन्न किसी क्षेत्र में न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय के समक्ष है, वहां जिला मजिस्ट्रेट द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से प्राधिकृत किसी स्थानीय अधिकारी (पुलिस अधिकारी से भिन्न) द्वारा।
स्पष्टीकरण—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,—
(i) "अधिवक्ता" का वही अर्थ होगा जो अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (1961 का 5) में है;
(ii) "स्थानीय अधिकारी" से खंड (क) और (ख) में निर्दिष्ट क्षेत्र से भिन्न किसी क्षेत्र में राज्य सरकार का अधिकारी अभिप्रेत होगा।"
[पश्चिमी बंगाल अधिनियम 1985 का 17, धारा 3 द्वारा]
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
