पुराना कानून
BNSS §176
जांच की प्रक्रिया।
(1) यदि प्राप्त सूचना या किसी अन्य माध्यम से किसी पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को किसी ऐसे अपराध के घटित होने का संदेह हो, जिसकी जांच करने के लिए वह धारा 175 के अधीन सशक्त है, तो वह तुरंत इसकी रिपोर्ट पुलिस रिपोर्ट पर ऐसे अपराध का संज्ञान लेने के लिए सशक्त मजिस्ट्रेट को भेजेगा और स्वयं घटनास्थल पर जाकर, या अपने किसी अधीनस्थ अधिकारी को, जो राज्य सरकार द्वारा सामान्य या विशेष आदेश द्वारा इस संबंध में निर्धारित रैंक से कम न हो, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों की जांच करने और यदि आवश्यक हो, तो अपराधी की खोज और गिरफ्तारी के लिए उपाय करने हेतु प्रतिनियुक्त करेगा:
उसे उपलब्ध कराया-
(क) जब किसी व्यक्ति के विरुद्ध ऐसे किसी अपराध के घटित होने की सूचना नाम सहित दी जाती है और मामला गंभीर प्रकृति का नहीं होता है, तो पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को स्वयं घटनास्थल पर जाने या किसी अधीनस्थ अधिकारी को घटनास्थल पर जांच करने के लिए नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं होती है;
(ख) यदि किसी पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि जांच शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, तो वह मामले की जांच नहीं करेगा:
इसके अलावा, बलात्कार के अपराध के संबंध में, पीड़िता का बयान पीड़िता के निवास स्थान पर या उसकी पसंद के स्थान पर दर्ज किया जाएगा और जहां तक संभव हो, एक महिला पुलिस अधिकारी द्वारा उसके माता-पिता या अभिभावक या निकट संबंधियों या स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता की उपस्थिति में दर्ज किया जाएगा और ऐसा बयान मोबाइल फोन सहित किसी भी ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी दर्ज किया जा सकता है।
(2) उपधारा (1) के प्रथम परंतुक के खंड (क) और (ख) में उल्लिखित प्रत्येक मामले में, पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी अपनी रिपोर्ट में उस उपधारा की आवश्यकताओं का पूर्ण अनुपालन न करने के कारणों का उल्लेख करेगा और दैनिक डायरी रिपोर्ट पाक्षिक रूप से मजिस्ट्रेट को भेजेगा तथा उक्त परंतुक के खंड (ख) में उल्लिखित मामले में, अधिकारी राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार, यदि कोई सूचनादाता हो, तो उसे भी तुरंत सूचित करेगा।
(3) किसी ऐसे अपराध के घटित होने से संबंधित प्रत्येक सूचना प्राप्त होने पर, जिसके लिए सात वर्ष या उससे अधिक की सजा निर्धारित की गई है, पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी, राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में पांच वर्ष की अवधि के भीतर अधिसूचित तिथि से, अपराध स्थल पर फोरेंसिक विशेषज्ञ को भेजकर अपराध से संबंधित फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र करवाएगा और मोबाइल फोन या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पर इस प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी करवाएगा।
बशर्ते कि यदि किसी ऐसे अपराध के संबंध में फोरेंसिक सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो राज्य सरकार, जब तक कि राज्य में उस मामले से संबंधित सुविधा विकसित या उपलब्ध नहीं हो जाती, तब तक किसी अन्य राज्य की ऐसी सुविधा के उपयोग को अधिसूचित करेगी।
पूरा पढ़ें: BNSS §176उसे उपलब्ध कराया-
(क) जब किसी व्यक्ति के विरुद्ध ऐसे किसी अपराध के घटित होने की सूचना नाम सहित दी जाती है और मामला गंभीर प्रकृति का नहीं होता है, तो पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को स्वयं घटनास्थल पर जाने या किसी अधीनस्थ अधिकारी को घटनास्थल पर जांच करने के लिए नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं होती है;
(ख) यदि किसी पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि जांच शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, तो वह मामले की जांच नहीं करेगा:
इसके अलावा, बलात्कार के अपराध के संबंध में, पीड़िता का बयान पीड़िता के निवास स्थान पर या उसकी पसंद के स्थान पर दर्ज किया जाएगा और जहां तक संभव हो, एक महिला पुलिस अधिकारी द्वारा उसके माता-पिता या अभिभावक या निकट संबंधियों या स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता की उपस्थिति में दर्ज किया जाएगा और ऐसा बयान मोबाइल फोन सहित किसी भी ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी दर्ज किया जा सकता है।
(2) उपधारा (1) के प्रथम परंतुक के खंड (क) और (ख) में उल्लिखित प्रत्येक मामले में, पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी अपनी रिपोर्ट में उस उपधारा की आवश्यकताओं का पूर्ण अनुपालन न करने के कारणों का उल्लेख करेगा और दैनिक डायरी रिपोर्ट पाक्षिक रूप से मजिस्ट्रेट को भेजेगा तथा उक्त परंतुक के खंड (ख) में उल्लिखित मामले में, अधिकारी राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार, यदि कोई सूचनादाता हो, तो उसे भी तुरंत सूचित करेगा।
(3) किसी ऐसे अपराध के घटित होने से संबंधित प्रत्येक सूचना प्राप्त होने पर, जिसके लिए सात वर्ष या उससे अधिक की सजा निर्धारित की गई है, पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी, राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में पांच वर्ष की अवधि के भीतर अधिसूचित तिथि से, अपराध स्थल पर फोरेंसिक विशेषज्ञ को भेजकर अपराध से संबंधित फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र करवाएगा और मोबाइल फोन या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पर इस प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी करवाएगा।
बशर्ते कि यदि किसी ऐसे अपराध के संबंध में फोरेंसिक सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो राज्य सरकार, जब तक कि राज्य में उस मामले से संबंधित सुविधा विकसित या उपलब्ध नहीं हो जाती, तब तक किसी अन्य राज्य की ऐसी सुविधा के उपयोग को अधिसूचित करेगी।
नया कानून
CrPC §157
धारा 157. अन्वेषण के लिए प्रक्रिया
157. अन्वेषण के लिए प्रक्रिया
(1) यदि पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को, प्राप्त इत्तिला से या अन्यथा, किसी ऐसे अपराध के किए जाने का संदेह करने का कारण है, जिसका अन्वेषण करने के लिए वह धारा 156 के अधीन सशक्त है, तो वह उसकी रिपोर्ट ऐसे मजिस्ट्रेट को तुरंत भेजेगा, जो पुलिस रिपोर्ट पर ऐसे अपराध का संज्ञान करने के लिए सशक्त है, और स्वयं उस स्थान को जाएगा या अपने अधीनस्थ अधिकारियों में से किसी को, जो ऐसी पंक्ति से नीचे का न हो, जैसी राज्य सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त विहित करे, उस स्थान को जाने के लिए, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का अन्वेषण करने के लिए, और यदि आवश्यक हो तो, अपराधी का पता चलाने और उसे गिरफ्तार करने के लिए उपाय करने के लिए, प्रतिनियुक्त करेगा:
परन्तु—
(क) जब ऐसे किसी अपराध के किए जाने की इत्तिला किसी व्यक्ति के विरुद्ध नाम लेकर दी जाती है और वह मामला गंभीर प्रकृति का नहीं है, तब पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के लिए यह आवश्यक नहीं होगा कि वह मौके पर अन्वेषण करने के लिए स्वयं जाए या किसी अधीनस्थ अधिकारी को प्रतिनियुक्त करे;
(ख) यदि पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि अन्वेषण आरंभ करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, तो वह उस मामले का अन्वेषण नहीं करेगा।
परन्तु यह और कि बलात्संग के अपराध के संबंध में, पीड़िता के कथन का अभिलेखन पीड़िता के निवास पर या उसकी पसंद के स्थान पर किया जाएगा और, जहां तक साध्य हो, किसी महिला पुलिस अधिकारी द्वारा, उसके माता-पिता या संरक्षक या निकट संबंधियों या उस स्थान के किसी समाजसेवी की उपस्थिति में किया जाएगा।
(2) उपधारा (1) के परन्तुक के खंड (क) और खंड (ख) में उल्लिखित प्रत्येक दशा में, पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी उस उपधारा की अपेक्षाओं का पूर्णतः अनुपालन न करने के अपने कारण अपनी रिपोर्ट में कथित करेगा; और उक्त परन्तुक के खंड (ख) में उल्लिखित दशा में, वह अधिकारी इत्तिला देने वाले को, यदि कोई हो, ऐसी रीति से, जैसी राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए, यह तथ्य भी तुरंत अधिसूचित करेगा कि वह उस मामले का अन्वेषण नहीं करेगा या नहीं कराएगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §157(1) यदि पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को, प्राप्त इत्तिला से या अन्यथा, किसी ऐसे अपराध के किए जाने का संदेह करने का कारण है, जिसका अन्वेषण करने के लिए वह धारा 156 के अधीन सशक्त है, तो वह उसकी रिपोर्ट ऐसे मजिस्ट्रेट को तुरंत भेजेगा, जो पुलिस रिपोर्ट पर ऐसे अपराध का संज्ञान करने के लिए सशक्त है, और स्वयं उस स्थान को जाएगा या अपने अधीनस्थ अधिकारियों में से किसी को, जो ऐसी पंक्ति से नीचे का न हो, जैसी राज्य सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त विहित करे, उस स्थान को जाने के लिए, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का अन्वेषण करने के लिए, और यदि आवश्यक हो तो, अपराधी का पता चलाने और उसे गिरफ्तार करने के लिए उपाय करने के लिए, प्रतिनियुक्त करेगा:
परन्तु—
(क) जब ऐसे किसी अपराध के किए जाने की इत्तिला किसी व्यक्ति के विरुद्ध नाम लेकर दी जाती है और वह मामला गंभीर प्रकृति का नहीं है, तब पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के लिए यह आवश्यक नहीं होगा कि वह मौके पर अन्वेषण करने के लिए स्वयं जाए या किसी अधीनस्थ अधिकारी को प्रतिनियुक्त करे;
(ख) यदि पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि अन्वेषण आरंभ करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, तो वह उस मामले का अन्वेषण नहीं करेगा।
परन्तु यह और कि बलात्संग के अपराध के संबंध में, पीड़िता के कथन का अभिलेखन पीड़िता के निवास पर या उसकी पसंद के स्थान पर किया जाएगा और, जहां तक साध्य हो, किसी महिला पुलिस अधिकारी द्वारा, उसके माता-पिता या संरक्षक या निकट संबंधियों या उस स्थान के किसी समाजसेवी की उपस्थिति में किया जाएगा।
(2) उपधारा (1) के परन्तुक के खंड (क) और खंड (ख) में उल्लिखित प्रत्येक दशा में, पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी उस उपधारा की अपेक्षाओं का पूर्णतः अनुपालन न करने के अपने कारण अपनी रिपोर्ट में कथित करेगा; और उक्त परन्तुक के खंड (ख) में उल्लिखित दशा में, वह अधिकारी इत्तिला देने वाले को, यदि कोई हो, ऐसी रीति से, जैसी राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए, यह तथ्य भी तुरंत अधिसूचित करेगा कि वह उस मामले का अन्वेषण नहीं करेगा या नहीं कराएगा।
BNSS धारा 176 इन धाराओं से भी मेल खाती है
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
