पुराना कानून
BNSS §145
प्रक्रिया।
(1) धारा 144 के तहत कार्यवाही किसी भी जिले में किसी भी व्यक्ति के खिलाफ की जा सकती है—
(क) वह कहाँ है; या
(ख) जहाँ वह या उसकी पत्नी निवास करते हैं; या
(ग) जहाँ वह अंतिम बार अपनी पत्नी के साथ, या जैसा भी मामला हो, नाजायज बच्चे की माँ के साथ रहता था; या
(घ) जहाँ उसके पिता या माता निवास करते हों।
(2) ऐसे सभी कार्यवाही में साक्ष्य उस व्यक्ति की उपस्थिति में लिए जाएंगे जिसके विरुद्ध भरण-पोषण के भुगतान का आदेश प्रस्तावित किया जाना है, या जब उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी गई हो, तो उसके अधिवक्ता की उपस्थिति में लिए जाएंगे, और समन मामलों के लिए निर्धारित तरीके से दर्ज किए जाएंगे।
बशर्ते कि यदि मजिस्ट्रेट संतुष्ट हो कि जिस व्यक्ति के विरुद्ध भरण-पोषण के भुगतान का आदेश प्रस्तावित है, वह जानबूझकर आदेश की तामील से बच रहा है या जानबूझकर न्यायालय में उपस्थित होने में लापरवाही बरत रहा है, तो मजिस्ट्रेट मामले की सुनवाई और निर्णय एकतरफा रूप से कर सकता है और इस प्रकार पारित कोई भी आदेश उचित कारण बताए जाने पर, उस आदेश की तिथि से तीन महीने के भीतर किए गए आवेदन पर रद्द किया जा सकता है, बशर्ते कि मजिस्ट्रेट द्वारा उचित समझे जाने वाले ऐसे नियम लागू हों, जिनमें प्रतिवादी को लागत का भुगतान करने संबंधी नियम भी शामिल हों।
(3) धारा 144 के तहत आवेदनों पर विचार करते समय न्यायालय को लागत के संबंध में ऐसा आदेश देने का अधिकार होगा जैसा उचित हो।
पूरा पढ़ें: BNSS §145(क) वह कहाँ है; या
(ख) जहाँ वह या उसकी पत्नी निवास करते हैं; या
(ग) जहाँ वह अंतिम बार अपनी पत्नी के साथ, या जैसा भी मामला हो, नाजायज बच्चे की माँ के साथ रहता था; या
(घ) जहाँ उसके पिता या माता निवास करते हों।
(2) ऐसे सभी कार्यवाही में साक्ष्य उस व्यक्ति की उपस्थिति में लिए जाएंगे जिसके विरुद्ध भरण-पोषण के भुगतान का आदेश प्रस्तावित किया जाना है, या जब उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी गई हो, तो उसके अधिवक्ता की उपस्थिति में लिए जाएंगे, और समन मामलों के लिए निर्धारित तरीके से दर्ज किए जाएंगे।
बशर्ते कि यदि मजिस्ट्रेट संतुष्ट हो कि जिस व्यक्ति के विरुद्ध भरण-पोषण के भुगतान का आदेश प्रस्तावित है, वह जानबूझकर आदेश की तामील से बच रहा है या जानबूझकर न्यायालय में उपस्थित होने में लापरवाही बरत रहा है, तो मजिस्ट्रेट मामले की सुनवाई और निर्णय एकतरफा रूप से कर सकता है और इस प्रकार पारित कोई भी आदेश उचित कारण बताए जाने पर, उस आदेश की तिथि से तीन महीने के भीतर किए गए आवेदन पर रद्द किया जा सकता है, बशर्ते कि मजिस्ट्रेट द्वारा उचित समझे जाने वाले ऐसे नियम लागू हों, जिनमें प्रतिवादी को लागत का भुगतान करने संबंधी नियम भी शामिल हों।
(3) धारा 144 के तहत आवेदनों पर विचार करते समय न्यायालय को लागत के संबंध में ऐसा आदेश देने का अधिकार होगा जैसा उचित हो।
नया कानून
CrPC §126
धारा 126. प्रक्रिया
126. प्रक्रिया
(1) धारा 125 के अधीन कार्यवाहियां किसी व्यक्ति के विरुद्ध किसी ऐसे जिले में की जा सकेंगी—
(क) जहां वह है, या
(ख) जहां वह या उसकी पत्नी निवास करती है, या
(ग) जहां उसने अंतिम बार अपनी पत्नी के साथ, या यथास्थिति, अधर्मज संतान की माता के साथ निवास किया था।
(2) ऐसी कार्यवाहियों में सब साक्ष्य उस व्यक्ति की उपस्थिति में लिया जाएगा, जिसके विरुद्ध भरण-पोषण के संदाय का आदेश किए जाने की प्रस्थापना है, या जब उसकी व्यक्तिगत हाजिरी से अभिमुक्ति दी गई हो तब उसके प्लीडर की उपस्थिति में, और वह समन-मामलों के लिए विहित रीति से अभिलिखित किया जाएगा:
परन्तु यदि मजिस्ट्रेट का यह समाधान हो जाता है कि वह व्यक्ति, जिसके विरुद्ध भरण-पोषण के संदाय का आदेश किए जाने की प्रस्थापना है, तामील से जानबूझकर बच रहा है, या न्यायालय में हाजिर होने में जानबूझकर उपेक्षा कर रहा है, तो मजिस्ट्रेट मामले को एकपक्षीय रूप से सुनने और अवधारित करने के लिए अग्रसर हो सकेगा, और इस प्रकार किया गया कोई आदेश, उसकी तारीख से तीन मास के भीतर किए गए आवेदन पर पर्याप्त हेतुक दर्शित किए जाने पर, ऐसे निबंधनों के अधीन रहते हुए, जिनके अंतर्गत विरोधी पक्षकार को खर्चे के संदाय के बारे में निबंधन भी हैं, जैसे मजिस्ट्रेट न्यायसंगत और उचित समझे, अपास्त किया जा सकेगा।
(3) धारा 125 के अधीन आवेदनों का निपटारा करने में न्यायालय को खर्चे के बारे में ऐसा आदेश करने की शक्ति होगी, जैसा न्यायसंगत हो।
पूरा पढ़ें: CrPC §126(1) धारा 125 के अधीन कार्यवाहियां किसी व्यक्ति के विरुद्ध किसी ऐसे जिले में की जा सकेंगी—
(क) जहां वह है, या
(ख) जहां वह या उसकी पत्नी निवास करती है, या
(ग) जहां उसने अंतिम बार अपनी पत्नी के साथ, या यथास्थिति, अधर्मज संतान की माता के साथ निवास किया था।
(2) ऐसी कार्यवाहियों में सब साक्ष्य उस व्यक्ति की उपस्थिति में लिया जाएगा, जिसके विरुद्ध भरण-पोषण के संदाय का आदेश किए जाने की प्रस्थापना है, या जब उसकी व्यक्तिगत हाजिरी से अभिमुक्ति दी गई हो तब उसके प्लीडर की उपस्थिति में, और वह समन-मामलों के लिए विहित रीति से अभिलिखित किया जाएगा:
परन्तु यदि मजिस्ट्रेट का यह समाधान हो जाता है कि वह व्यक्ति, जिसके विरुद्ध भरण-पोषण के संदाय का आदेश किए जाने की प्रस्थापना है, तामील से जानबूझकर बच रहा है, या न्यायालय में हाजिर होने में जानबूझकर उपेक्षा कर रहा है, तो मजिस्ट्रेट मामले को एकपक्षीय रूप से सुनने और अवधारित करने के लिए अग्रसर हो सकेगा, और इस प्रकार किया गया कोई आदेश, उसकी तारीख से तीन मास के भीतर किए गए आवेदन पर पर्याप्त हेतुक दर्शित किए जाने पर, ऐसे निबंधनों के अधीन रहते हुए, जिनके अंतर्गत विरोधी पक्षकार को खर्चे के संदाय के बारे में निबंधन भी हैं, जैसे मजिस्ट्रेट न्यायसंगत और उचित समझे, अपास्त किया जा सकेगा।
(3) धारा 125 के अधीन आवेदनों का निपटारा करने में न्यायालय को खर्चे के बारे में ऐसा आदेश करने की शक्ति होगी, जैसा न्यायसंगत हो।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
