पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 10 अब CrPC धारा 12 है
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, आदि।
पुराना कानून
BNSS §10
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, आदि।
(1) प्रत्येक जिले में, उच्च न्यायालय प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त करेगा।
(2) उच्च न्यायालय प्रथम श्रेणी के किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकता है, और ऐसे मजिस्ट्रेट को इस संहिता के अधीन या उस समय लागू किसी अन्य कानून के अधीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की सभी या कोई भी शक्तियाँ प्राप्त होंगी, जैसा कि उच्च न्यायालय निर्देश दे।
(3) उच्च न्यायालय किसी उप-मंडल में प्रथम श्रेणी के किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट को उप-मंडल न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में नामित कर सकता है और आवश्यकतानुसार उसे इस धारा में निर्दिष्ट जिम्मेदारियों से मुक्त कर सकता है।
(4) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामान्य नियंत्रण के अधीन रहते हुए, प्रत्येक उप-विभागीय न्यायिक मजिस्ट्रेट को उप-विभाग में न्यायिक मजिस्ट्रेटों (अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों के अतिरिक्त) के कार्य पर पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण की ऐसी शक्तियाँ प्राप्त होंगी और वे उनका प्रयोग करेंगे, जैसा कि उच्च न्यायालय सामान्य या विशेष आदेश द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट कर सकता है।
पूरा पढ़ें: BNSS §10(2) उच्च न्यायालय प्रथम श्रेणी के किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकता है, और ऐसे मजिस्ट्रेट को इस संहिता के अधीन या उस समय लागू किसी अन्य कानून के अधीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की सभी या कोई भी शक्तियाँ प्राप्त होंगी, जैसा कि उच्च न्यायालय निर्देश दे।
(3) उच्च न्यायालय किसी उप-मंडल में प्रथम श्रेणी के किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट को उप-मंडल न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में नामित कर सकता है और आवश्यकतानुसार उसे इस धारा में निर्दिष्ट जिम्मेदारियों से मुक्त कर सकता है।
(4) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामान्य नियंत्रण के अधीन रहते हुए, प्रत्येक उप-विभागीय न्यायिक मजिस्ट्रेट को उप-विभाग में न्यायिक मजिस्ट्रेटों (अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों के अतिरिक्त) के कार्य पर पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण की ऐसी शक्तियाँ प्राप्त होंगी और वे उनका प्रयोग करेंगे, जैसा कि उच्च न्यायालय सामान्य या विशेष आदेश द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट कर सकता है।
नया कानून
CrPC §12
धारा 12. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, आदि
12. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, आदि
(1) हर जिले में (जो महानगर क्षेत्र नहीं है), उच्च न्यायालय प्रथम वर्ग के किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त करेगा।
(2) उच्च न्यायालय प्रथम वर्ग के किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकेगा, और ऐसे मजिस्ट्रेट को इस संहिता के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की वे सब या कोई शक्तियां होंगी, जिनका उच्च न्यायालय निदेश दे।
(3) (क) उच्च न्यायालय किसी उपखंड में प्रथम वर्ग के किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट को उपखंड न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में पदाभिहित कर सकेगा और, जब अवसर अपेक्षित करे, उसे इस धारा में विनिर्दिष्ट उत्तरदायित्वों से मुक्त कर सकेगा।
(ख) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के साधारण नियंत्रण के अधीन रहते हुए, हर उपखंड न्यायिक मजिस्ट्रेट को उस उपखंड के न्यायिक मजिस्ट्रेटों (अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों से भिन्न) के कार्य पर पर्यवेक्षण और नियंत्रण की ऐसी शक्तियां भी होंगी और वह उनका प्रयोग करेगा, जो उच्च न्यायालय, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।
राज्य संशोधन
नागालैंड:
धारा 12 की उपधारा (1), (2) और (3) में, जहां कहीं "उच्च न्यायालय" शब्द आते हैं, वहां "राज्य सरकार" शब्द रखे जाएंगे।
[अधिसूचना विधि 170/74 विधायी, तारीख 3 जुलाई, 1975 द्वारा]
उत्तर प्रदेश:
धारा 12 में, उपधारा (3) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:—
"(4) जहां मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का पद रिक्त है, या वह बीमारी, अनुपस्थिति या अन्यथा अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है, वहां उस स्थान पर उपस्थित अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों में से ज्येष्ठतम, और उनकी अनुपस्थिति में जिला मजिस्ट्रेट, और उसकी अनुपस्थिति में ज्येष्ठतम कार्यपालक मजिस्ट्रेट, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का अत्यावश्यक कार्य निपटाएगा।"
[उत्तर प्रदेश अधिनियम 1984 का 1, धारा 3 द्वारा (1-5-1984 से प्रभावी)]
पूरा पढ़ें: CrPC §12(1) हर जिले में (जो महानगर क्षेत्र नहीं है), उच्च न्यायालय प्रथम वर्ग के किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त करेगा।
(2) उच्च न्यायालय प्रथम वर्ग के किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकेगा, और ऐसे मजिस्ट्रेट को इस संहिता के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की वे सब या कोई शक्तियां होंगी, जिनका उच्च न्यायालय निदेश दे।
(3) (क) उच्च न्यायालय किसी उपखंड में प्रथम वर्ग के किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट को उपखंड न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में पदाभिहित कर सकेगा और, जब अवसर अपेक्षित करे, उसे इस धारा में विनिर्दिष्ट उत्तरदायित्वों से मुक्त कर सकेगा।
(ख) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के साधारण नियंत्रण के अधीन रहते हुए, हर उपखंड न्यायिक मजिस्ट्रेट को उस उपखंड के न्यायिक मजिस्ट्रेटों (अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों से भिन्न) के कार्य पर पर्यवेक्षण और नियंत्रण की ऐसी शक्तियां भी होंगी और वह उनका प्रयोग करेगा, जो उच्च न्यायालय, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।
राज्य संशोधन
नागालैंड:
धारा 12 की उपधारा (1), (2) और (3) में, जहां कहीं "उच्च न्यायालय" शब्द आते हैं, वहां "राज्य सरकार" शब्द रखे जाएंगे।
[अधिसूचना विधि 170/74 विधायी, तारीख 3 जुलाई, 1975 द्वारा]
उत्तर प्रदेश:
धारा 12 में, उपधारा (3) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:—
"(4) जहां मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का पद रिक्त है, या वह बीमारी, अनुपस्थिति या अन्यथा अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है, वहां उस स्थान पर उपस्थित अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों में से ज्येष्ठतम, और उनकी अनुपस्थिति में जिला मजिस्ट्रेट, और उसकी अनुपस्थिति में ज्येष्ठतम कार्यपालक मजिस्ट्रेट, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का अत्यावश्यक कार्य निपटाएगा।"
[उत्तर प्रदेश अधिनियम 1984 का 1, धारा 3 द्वारा (1-5-1984 से प्रभावी)]
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
