पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNS धारा 8(4) अब IPC धारा 66 है
जुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
पुराना कानून
BNS §8(4)
जुर्माने की राशि, जुर्माना न चुकाने पर देयता आदि।
(1) जहाँ कोई राशि निर्दिष्ट नहीं की गई है जिस तक जुर्माना बढ़ाया जा सकता है, वहाँ अपराधी पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि असीमित होगी, परन्तु अत्यधिक नहीं होगी।
(2) प्रत्येक अपराध के मामले में---
(क) कारावास और जुर्माने दोनों से दंडनीय, जिसमें अपराधी को कारावास के साथ या बिना कारावास के जुर्माना लगाया जाता है;
(ख) कारावास या जुर्माने से दंडनीय, या केवल जुर्माने से दंडनीय, जिसमें अपराधी को जुर्माने की सजा दी जाती है,
ऐसे अपराधी को सजा सुनाने वाले न्यायालय को यह अधिकार होगा कि वह सजा में यह निर्देश दे कि जुर्माने का भुगतान न करने की स्थिति में अपराधी को एक निश्चित अवधि के लिए कारावास भुगतना होगा, जो कारावास उस कारावास से अधिक होगा जिसकी सजा उसे पहले सुनाई गई हो या जिसके लिए वह सजा में कमी के तहत उत्तरदायी हो।
(3) यदि अपराध कारावास और जुर्माने दोनों से दंडनीय है, तो न्यायालय द्वारा जुर्माने का भुगतान न करने पर अपराधी को कारावास की अवधि के लिए निर्देशित अवधि उस अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम कारावास अवधि के एक-चौथाई से अधिक नहीं होगी।
(4) न्यायालय द्वारा जुर्माना अदा न करने या सामुदायिक सेवा न करने की स्थिति में जो कारावास लगाया जाता है, वह किसी भी प्रकार का हो सकता है, जिस प्रकार का कारावास अपराधी को अपराध के लिए दिया जा सकता था।
(5) यदि अपराध जुर्माने या सामुदायिक सेवा से दंडनीय है, तो न्यायालय द्वारा जुर्माने का भुगतान न करने या सामुदायिक सेवा न करने की स्थिति में लगाया गया कारावास साधारण होगा, और न्यायालय द्वारा जुर्माने का भुगतान न करने या सामुदायिक सेवा न करने की स्थिति में अपराधी को कारावास की सजा देने का निर्देश दिया गया समय इससे अधिक नहीं होगा,---
(क) दो महीने जब जुर्माने की राशि पांच हजार रुपये से अधिक न हो;
(ख) चार महीने जब जुर्माने की राशि दस हजार रुपये से अधिक न हो; और
(सी) अन्य किसी मामले में एक वर्ष।
(6) (क) जुर्माने के भुगतान में चूक के कारण लगाई गई कारावास की अवधि तब समाप्त हो जाएगी जब वह जुर्माना या तो अदा कर दिया जाए या विधि द्वारा वसूल किया जाए;
(ख) यदि भुगतान न करने के कारण निर्धारित कारावास की अवधि समाप्त होने से पहले जुर्माने का इतना अनुपात अदा कर दिया जाए या वसूल कर लिया जाए कि भुगतान न करने के कारण भुगती गई कारावास की अवधि अभी तक अदा न किए गए जुर्माने के हिस्से के अनुपात से कम न हो, तो कारावास समाप्त हो जाएगा।
चित्रण।
ए को एक हजार रुपये का जुर्माना और जुर्माना न अदा करने पर चार महीने की कैद की सजा सुनाई गई है। यहां, यदि सात सौ पचास रुपये का जुर्माना कैद की सजा के एक महीने की समाप्ति से पहले अदा कर दिया जाता है, तो ए को पहले महीने की समाप्ति के तुरंत बाद रिहा कर दिया जाएगा। यदि सात सौ पचास रुपये का जुर्माना पहले महीने की समाप्ति के समय या कैद में रहने के दौरान किसी भी बाद के समय में अदा कर दिया जाता है, तो ए को तुरंत रिहा कर दिया जाएगा। यदि पांच सौ रुपये का जुर्माना कैद की सजा के दो महीने की समाप्ति से पहले अदा कर दिया जाता है, तो ए को दो महीने पूरे होते ही रिहा कर दिया जाएगा। यदि पांच सौ रुपये का जुर्माना उन दो महीनों की समाप्ति के समय या कैद में रहने के दौरान किसी भी बाद के समय में अदा कर दिया जाता है, तो ए को तुरंत रिहा कर दिया जाएगा।
(7) जुर्माना, या उसका कोई भाग जो अदा नहीं किया गया है, सजा सुनाए जाने के छह साल के भीतर किसी भी समय वसूला जा सकता है, और यदि सजा के तहत अपराधी छह साल से अधिक की अवधि के लिए कारावास का पात्र है, तो उस अवधि की समाप्ति से पहले किसी भी समय वसूला जा सकता है; और अपराधी की मृत्यु किसी भी संपत्ति को दायित्व से मुक्त नहीं करती है जो उसकी मृत्यु के बाद उसके ऋणों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी होगी।
पूरा पढ़ें: BNS §8(4)(2) प्रत्येक अपराध के मामले में---
(क) कारावास और जुर्माने दोनों से दंडनीय, जिसमें अपराधी को कारावास के साथ या बिना कारावास के जुर्माना लगाया जाता है;
(ख) कारावास या जुर्माने से दंडनीय, या केवल जुर्माने से दंडनीय, जिसमें अपराधी को जुर्माने की सजा दी जाती है,
ऐसे अपराधी को सजा सुनाने वाले न्यायालय को यह अधिकार होगा कि वह सजा में यह निर्देश दे कि जुर्माने का भुगतान न करने की स्थिति में अपराधी को एक निश्चित अवधि के लिए कारावास भुगतना होगा, जो कारावास उस कारावास से अधिक होगा जिसकी सजा उसे पहले सुनाई गई हो या जिसके लिए वह सजा में कमी के तहत उत्तरदायी हो।
(3) यदि अपराध कारावास और जुर्माने दोनों से दंडनीय है, तो न्यायालय द्वारा जुर्माने का भुगतान न करने पर अपराधी को कारावास की अवधि के लिए निर्देशित अवधि उस अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम कारावास अवधि के एक-चौथाई से अधिक नहीं होगी।
(4) न्यायालय द्वारा जुर्माना अदा न करने या सामुदायिक सेवा न करने की स्थिति में जो कारावास लगाया जाता है, वह किसी भी प्रकार का हो सकता है, जिस प्रकार का कारावास अपराधी को अपराध के लिए दिया जा सकता था।
(5) यदि अपराध जुर्माने या सामुदायिक सेवा से दंडनीय है, तो न्यायालय द्वारा जुर्माने का भुगतान न करने या सामुदायिक सेवा न करने की स्थिति में लगाया गया कारावास साधारण होगा, और न्यायालय द्वारा जुर्माने का भुगतान न करने या सामुदायिक सेवा न करने की स्थिति में अपराधी को कारावास की सजा देने का निर्देश दिया गया समय इससे अधिक नहीं होगा,---
(क) दो महीने जब जुर्माने की राशि पांच हजार रुपये से अधिक न हो;
(ख) चार महीने जब जुर्माने की राशि दस हजार रुपये से अधिक न हो; और
(सी) अन्य किसी मामले में एक वर्ष।
(6) (क) जुर्माने के भुगतान में चूक के कारण लगाई गई कारावास की अवधि तब समाप्त हो जाएगी जब वह जुर्माना या तो अदा कर दिया जाए या विधि द्वारा वसूल किया जाए;
(ख) यदि भुगतान न करने के कारण निर्धारित कारावास की अवधि समाप्त होने से पहले जुर्माने का इतना अनुपात अदा कर दिया जाए या वसूल कर लिया जाए कि भुगतान न करने के कारण भुगती गई कारावास की अवधि अभी तक अदा न किए गए जुर्माने के हिस्से के अनुपात से कम न हो, तो कारावास समाप्त हो जाएगा।
चित्रण।
ए को एक हजार रुपये का जुर्माना और जुर्माना न अदा करने पर चार महीने की कैद की सजा सुनाई गई है। यहां, यदि सात सौ पचास रुपये का जुर्माना कैद की सजा के एक महीने की समाप्ति से पहले अदा कर दिया जाता है, तो ए को पहले महीने की समाप्ति के तुरंत बाद रिहा कर दिया जाएगा। यदि सात सौ पचास रुपये का जुर्माना पहले महीने की समाप्ति के समय या कैद में रहने के दौरान किसी भी बाद के समय में अदा कर दिया जाता है, तो ए को तुरंत रिहा कर दिया जाएगा। यदि पांच सौ रुपये का जुर्माना कैद की सजा के दो महीने की समाप्ति से पहले अदा कर दिया जाता है, तो ए को दो महीने पूरे होते ही रिहा कर दिया जाएगा। यदि पांच सौ रुपये का जुर्माना उन दो महीनों की समाप्ति के समय या कैद में रहने के दौरान किसी भी बाद के समय में अदा कर दिया जाता है, तो ए को तुरंत रिहा कर दिया जाएगा।
(7) जुर्माना, या उसका कोई भाग जो अदा नहीं किया गया है, सजा सुनाए जाने के छह साल के भीतर किसी भी समय वसूला जा सकता है, और यदि सजा के तहत अपराधी छह साल से अधिक की अवधि के लिए कारावास का पात्र है, तो उस अवधि की समाप्ति से पहले किसी भी समय वसूला जा सकता है; और अपराधी की मृत्यु किसी भी संपत्ति को दायित्व से मुक्त नहीं करती है जो उसकी मृत्यु के बाद उसके ऋणों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी होगी।
नया कानून
IPC §66
जुर्माना न भरने पर कारावास का विवरण।
न्यायालय द्वारा जुर्माना अदा न करने पर दी जाने वाली कारावास की सजा किसी भी प्रकार की हो सकती है, जिस प्रकार की सजा अपराधी को उस अपराध के लिए दी जा सकती थी।
पूरा पढ़ें: IPC §66BNS धारा 8(4) इन धाराओं से भी मेल खाती है
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
