पुराना कानून
BNS §309 (1)(2)(3)
डकैती।
(1) सभी डकैती में या तो चोरी होती है या जबरन वसूली।
(2) चोरी डकैती है यदि, चोरी करने के उद्देश्य से, या चोरी करते समय, या चोरी से प्राप्त संपत्ति को ले जाने या ले जाने का प्रयास करते समय, अपराधी उस उद्देश्य से स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को मृत्यु या चोट या गलत तरीके से रोकना, या तत्काल मृत्यु या तत्काल चोट या तत्काल गलत तरीके से रोकने का भय उत्पन्न करता है या करने का प्रयास करता है।
(3) जबरन वसूली डकैती है यदि अपराधी जबरन वसूली करते समय उस व्यक्ति की उपस्थिति में हो जिसे डराया गया है, और उस व्यक्ति को तत्काल मृत्यु, तत्काल चोट, या तत्काल गलत तरीके से रोके जाने का भय देकर जबरन वसूली करता है, और इस प्रकार भय देकर, उस व्यक्ति को उसी समय जबरन वसूली की गई वस्तु सौंपने के लिए प्रेरित करता है।
स्पष्टीकरण। —अपराधी को उपस्थित माना जाता है यदि वह दूसरे व्यक्ति के इतने निकट हो कि उसे तत्काल मृत्यु, तत्काल चोट या तत्काल गलत तरीके से बंधक बनाए जाने का भय हो। उदाहरण।
(क) ए, जेड को पकड़कर रखता है और उसकी सहमति के बिना, उसके कपड़ों से धोखे से उसके पैसे और गहने ले लेता है। यहाँ ए ने चोरी की है और उस चोरी को अंजाम देने के लिए उसने स्वेच्छा से जेड को गलत तरीके से बंधक बनाया है। अतः ए ने डकैती की है।
(ख) ए सड़क पर जेड से मिलता है, पिस्तौल दिखाकर जेड का पर्स मांगता है। परिणामस्वरूप, जेड अपना पर्स दे देता है। यहाँ ए ने जेड को तत्काल चोट पहुँचाने का भय दिखाकर और उसकी उपस्थिति में पर्स छीनकर उससे पर्स वसूला है। अतः ए ने डकैती की है।
(ग) सड़क पर A की मुलाकात Z और उसके बच्चे से होती है। A बच्चे को छीन लेता है और Z को धमकी देता है कि अगर वह अपना पर्स नहीं देगा तो वह उसे खाई में फेंक देगा। Z अपना पर्स दे देता है। यहाँ A ने Z को बच्चे को तुरंत चोट पहुँचाने का भय दिखाकर उससे पर्स छीन लिया है। अतः A ने Z से लूटपाट की है।
(घ) अ, जेड से यह कहकर संपत्ति प्राप्त करता है—"तुम्हारा बच्चा मेरे गिरोह के हाथों में है, और यदि तुम हमें दस हजार रुपये नहीं भेजते हो तो उसे मार डाला जाएगा।" यह जबरन वसूली है और दंडनीय है; लेकिन यह डकैती नहीं है, जब तक कि जेड को उसके बच्चे की तत्काल मृत्यु का भय न दिलाया जाए।
(4) जो कोई डकैती करेगा उसे दस वर्ष तक की कठोर कारावास की सजा दी जाएगी और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा; और यदि डकैती सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच राजमार्ग पर की जाती है, तो कारावास चौदह वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
(5) जो कोई भी डकैती करने का प्रयास करेगा, उसे सात वर्ष तक की कठोर कारावास की सजा दी जाएगी और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
(6) यदि कोई व्यक्ति डकैती करते समय या डकैती का प्रयास करते समय स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, तो ऐसा व्यक्ति और डकैती करने या डकैती का प्रयास करने में संयुक्त रूप से शामिल कोई अन्य व्यक्ति आजीवन कारावास या दस वर्ष तक के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
पूरा पढ़ें: BNS §309 (1)(2)(3)(2) चोरी डकैती है यदि, चोरी करने के उद्देश्य से, या चोरी करते समय, या चोरी से प्राप्त संपत्ति को ले जाने या ले जाने का प्रयास करते समय, अपराधी उस उद्देश्य से स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को मृत्यु या चोट या गलत तरीके से रोकना, या तत्काल मृत्यु या तत्काल चोट या तत्काल गलत तरीके से रोकने का भय उत्पन्न करता है या करने का प्रयास करता है।
(3) जबरन वसूली डकैती है यदि अपराधी जबरन वसूली करते समय उस व्यक्ति की उपस्थिति में हो जिसे डराया गया है, और उस व्यक्ति को तत्काल मृत्यु, तत्काल चोट, या तत्काल गलत तरीके से रोके जाने का भय देकर जबरन वसूली करता है, और इस प्रकार भय देकर, उस व्यक्ति को उसी समय जबरन वसूली की गई वस्तु सौंपने के लिए प्रेरित करता है।
स्पष्टीकरण। —अपराधी को उपस्थित माना जाता है यदि वह दूसरे व्यक्ति के इतने निकट हो कि उसे तत्काल मृत्यु, तत्काल चोट या तत्काल गलत तरीके से बंधक बनाए जाने का भय हो। उदाहरण।
(क) ए, जेड को पकड़कर रखता है और उसकी सहमति के बिना, उसके कपड़ों से धोखे से उसके पैसे और गहने ले लेता है। यहाँ ए ने चोरी की है और उस चोरी को अंजाम देने के लिए उसने स्वेच्छा से जेड को गलत तरीके से बंधक बनाया है। अतः ए ने डकैती की है।
(ख) ए सड़क पर जेड से मिलता है, पिस्तौल दिखाकर जेड का पर्स मांगता है। परिणामस्वरूप, जेड अपना पर्स दे देता है। यहाँ ए ने जेड को तत्काल चोट पहुँचाने का भय दिखाकर और उसकी उपस्थिति में पर्स छीनकर उससे पर्स वसूला है। अतः ए ने डकैती की है।
(ग) सड़क पर A की मुलाकात Z और उसके बच्चे से होती है। A बच्चे को छीन लेता है और Z को धमकी देता है कि अगर वह अपना पर्स नहीं देगा तो वह उसे खाई में फेंक देगा। Z अपना पर्स दे देता है। यहाँ A ने Z को बच्चे को तुरंत चोट पहुँचाने का भय दिखाकर उससे पर्स छीन लिया है। अतः A ने Z से लूटपाट की है।
(घ) अ, जेड से यह कहकर संपत्ति प्राप्त करता है—"तुम्हारा बच्चा मेरे गिरोह के हाथों में है, और यदि तुम हमें दस हजार रुपये नहीं भेजते हो तो उसे मार डाला जाएगा।" यह जबरन वसूली है और दंडनीय है; लेकिन यह डकैती नहीं है, जब तक कि जेड को उसके बच्चे की तत्काल मृत्यु का भय न दिलाया जाए।
(4) जो कोई डकैती करेगा उसे दस वर्ष तक की कठोर कारावास की सजा दी जाएगी और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा; और यदि डकैती सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच राजमार्ग पर की जाती है, तो कारावास चौदह वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
(5) जो कोई भी डकैती करने का प्रयास करेगा, उसे सात वर्ष तक की कठोर कारावास की सजा दी जाएगी और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
(6) यदि कोई व्यक्ति डकैती करते समय या डकैती का प्रयास करते समय स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, तो ऐसा व्यक्ति और डकैती करने या डकैती का प्रयास करने में संयुक्त रूप से शामिल कोई अन्य व्यक्ति आजीवन कारावास या दस वर्ष तक के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
नया कानून
IPC §390
धारा 390 - लूट
लूट
सब प्रकार की लूट में या तो चोरी या उद्दापन होता है ।
चोरी कब लूट है - चोरी “लूट” है, यदि उस चोरी को करने के लिए, या उस चोरी के करने में या उस चोरी द्वारा अभिप्राप्त सम्पत्ति को ले जाने या ले जाने का प्रयत्न करने में, अपराधी उस उद्देश्य से स्वेच्छया किसी व्यक्ति की मॄत्यु, या उपहति या उसका सदोष अवरोध या तत्काल मॄत्यु का, या तत्काल उपहति का, या तत्काल सदोष अवरोध का भय कारित करता या कारित करने का प्रयत्न करता है ।
उद्दापन कब लूट है - उद्दापन “लूट” है, यदि अपराधी वह उद्दापन करते समय भय में डाले गए व्यक्ति की उपस्थिति में है, और उस व्यक्ति को स्वयं उसका या किसी अन्य व्यक्ति की तत्काल मॄत्यु या तत्काल उपहति या तत्काल सदोष अवरोध के भय में डालकर वह उद्दापन करता है और इस प्रकार भय में डालकर इस प्रकार भय में डाले गए व्यक्ति को उद्दापन की जाने वाली चीज उसी समय और वहां ही परिदत्त करने के लिए उत्प्रेरित करता है ।
स्पष्टीकरण - अपराधी का उपस्थित होना कहा जाता है, यदि वह उस अन्य व्यक्ति को तत्काल मॄत्यु के, तत्काल उपहति के, या तत्काल सदोष अवरोध के भय में डालने के लिए पर्याप्त रूप से निकट हो ।
दृष्टांत :
(क) क, य को दबोच लेता है, और य के कपड़े में से य का धन और आभूषण य की सम्मति के बिना कपटपूर्वक निकाल लेता है । यहां, क ने चोरी की है और वह चोरी करने के लिए स्वेच्छया य का सदोष अवरोध कारित करता है । इसलिए क ने लूट की है ।
(ख) क, य को राजमार्ग पर मिलता है, एक पिस्तौल दिखलाता है और य की थैली मांगता है । परिणामस्वरूप य अपनी थैली दे देता है । यहां क ने य को तत्काल उपहति का भय दिखलाकर थैली उद्दापित की है और उद्दापन करते समय वह उसकी उपस्थिति में है । अतः क ने लूट की है ।
(ग) क राजमार्ग पर य और य के शिशु से मिलता है । क उस शिशु को पकड़ लेता है और यह धमकी देता है कि यदि य उसको अपनी थैली परिदत्त नहीं कर देता, तो वह उस शिशु को कगार से नीचे फेंक देगा । परिणामस्वरूप य अपनी थैली परिदत्त कर देता है । यहां क ने य को यह भय कारित करके कि वह उस शिशु को, जो वहां उपस्थित है, तत्काल उपहति करेगा, य से उसकी थैली उद्दापित की है । इसलिए क ने य को लूटा है ।
(घ) क, य से यह कह कर, सम्पत्ति अभिप्राप्त करता है कि “तुम्हारा शिशु मेंरी टोली के हाथों में हैं, यदि तुम हमारे पास दस हजार रुपया नहीं भेज दोगे, तो वह मार डाला जाएगा ।” यह उद्दापन है, और इसी रूप में दण्डनीय है ; किन्तु यह लूट नहीं है, जब तक कि य को उसके शिशु की तत्काल मॄत्यु के भय में न डाला जाए ।
पूरा पढ़ें: IPC §390सब प्रकार की लूट में या तो चोरी या उद्दापन होता है ।
चोरी कब लूट है - चोरी “लूट” है, यदि उस चोरी को करने के लिए, या उस चोरी के करने में या उस चोरी द्वारा अभिप्राप्त सम्पत्ति को ले जाने या ले जाने का प्रयत्न करने में, अपराधी उस उद्देश्य से स्वेच्छया किसी व्यक्ति की मॄत्यु, या उपहति या उसका सदोष अवरोध या तत्काल मॄत्यु का, या तत्काल उपहति का, या तत्काल सदोष अवरोध का भय कारित करता या कारित करने का प्रयत्न करता है ।
उद्दापन कब लूट है - उद्दापन “लूट” है, यदि अपराधी वह उद्दापन करते समय भय में डाले गए व्यक्ति की उपस्थिति में है, और उस व्यक्ति को स्वयं उसका या किसी अन्य व्यक्ति की तत्काल मॄत्यु या तत्काल उपहति या तत्काल सदोष अवरोध के भय में डालकर वह उद्दापन करता है और इस प्रकार भय में डालकर इस प्रकार भय में डाले गए व्यक्ति को उद्दापन की जाने वाली चीज उसी समय और वहां ही परिदत्त करने के लिए उत्प्रेरित करता है ।
स्पष्टीकरण - अपराधी का उपस्थित होना कहा जाता है, यदि वह उस अन्य व्यक्ति को तत्काल मॄत्यु के, तत्काल उपहति के, या तत्काल सदोष अवरोध के भय में डालने के लिए पर्याप्त रूप से निकट हो ।
दृष्टांत :
(क) क, य को दबोच लेता है, और य के कपड़े में से य का धन और आभूषण य की सम्मति के बिना कपटपूर्वक निकाल लेता है । यहां, क ने चोरी की है और वह चोरी करने के लिए स्वेच्छया य का सदोष अवरोध कारित करता है । इसलिए क ने लूट की है ।
(ख) क, य को राजमार्ग पर मिलता है, एक पिस्तौल दिखलाता है और य की थैली मांगता है । परिणामस्वरूप य अपनी थैली दे देता है । यहां क ने य को तत्काल उपहति का भय दिखलाकर थैली उद्दापित की है और उद्दापन करते समय वह उसकी उपस्थिति में है । अतः क ने लूट की है ।
(ग) क राजमार्ग पर य और य के शिशु से मिलता है । क उस शिशु को पकड़ लेता है और यह धमकी देता है कि यदि य उसको अपनी थैली परिदत्त नहीं कर देता, तो वह उस शिशु को कगार से नीचे फेंक देगा । परिणामस्वरूप य अपनी थैली परिदत्त कर देता है । यहां क ने य को यह भय कारित करके कि वह उस शिशु को, जो वहां उपस्थित है, तत्काल उपहति करेगा, य से उसकी थैली उद्दापित की है । इसलिए क ने य को लूटा है ।
(घ) क, य से यह कह कर, सम्पत्ति अभिप्राप्त करता है कि “तुम्हारा शिशु मेंरी टोली के हाथों में हैं, यदि तुम हमारे पास दस हजार रुपया नहीं भेज दोगे, तो वह मार डाला जाएगा ।” यह उद्दापन है, और इसी रूप में दण्डनीय है ; किन्तु यह लूट नहीं है, जब तक कि य को उसके शिशु की तत्काल मॄत्यु के भय में न डाला जाए ।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
