पाठ बदला गया है
BNS धारा 208 अब IPC धारा 174 है
लोक सेवक के आदेश का पालन न करना।
पुराना कानून
BNS §208
लोक सेवक के आदेश का पालन न करना।
जो कोई भी, किसी लोक सेवक द्वारा जारी किए गए समन, नोटिस, आदेश या उद्घोषणा के अनुपालन में किसी निश्चित स्थान और समय पर स्वयं या किसी प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होने के लिए विधिवत बाध्य हो, और वह जानबूझकर उस स्थान या समय पर उपस्थित होने में चूक करता है या उस स्थान से प्रस्थान करने के वैध समय से पहले प्रस्थान करता है, —
(क) उसे एक महीने तक की साधारण कारावास की सजा, या पांच हजार रुपये तक के जुर्माने की सजा, या दोनों से दंडित किया जाएगा;
(ख) जहां किसी न्यायालय में स्वयं या प्रतिनिधि द्वारा समन, नोटिस, आदेश या उद्घोषणा के तहत उपस्थित होने पर छह महीने तक की साधारण कारावास या दस हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान हो।
चित्र।
(क) ए, किसी उच्च न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए विधिवत बाध्य होते हुए, उस न्यायालय द्वारा जारी किए गए सम्मन के अनुपालन में जानबूझकर उपस्थित नहीं होता है। ए ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
(ख) यदि कोई व्यक्ति किसी जिला न्यायाधीश के समक्ष गवाह के रूप में उपस्थित होने के लिए विधिवत बाध्य है और उस जिला न्यायाधीश द्वारा जारी समन का पालन करते हुए जानबूझकर उपस्थित नहीं होता है, तो उसने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
पूरा पढ़ें: BNS §208(क) उसे एक महीने तक की साधारण कारावास की सजा, या पांच हजार रुपये तक के जुर्माने की सजा, या दोनों से दंडित किया जाएगा;
(ख) जहां किसी न्यायालय में स्वयं या प्रतिनिधि द्वारा समन, नोटिस, आदेश या उद्घोषणा के तहत उपस्थित होने पर छह महीने तक की साधारण कारावास या दस हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान हो।
चित्र।
(क) ए, किसी उच्च न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए विधिवत बाध्य होते हुए, उस न्यायालय द्वारा जारी किए गए सम्मन के अनुपालन में जानबूझकर उपस्थित नहीं होता है। ए ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
(ख) यदि कोई व्यक्ति किसी जिला न्यायाधीश के समक्ष गवाह के रूप में उपस्थित होने के लिए विधिवत बाध्य है और उस जिला न्यायाधीश द्वारा जारी समन का पालन करते हुए जानबूझकर उपस्थित नहीं होता है, तो उसने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
नया कानून
IPC §174
धारा 174 - लोक सेवक का आदेश न मानकर गैर-हाजिर रहना
लोक सेवक का आदेश न मानकर गैर-हाजिर रहना
जो कोई किसी लोक सेवक द्वारा निकाले गए उस समन, सूचना, आदेश या उद्घोषणा के पालन में, जिसे ऐसे लोक सेवक के नाते निकालने के लिए वह वैध रूप से सक्षम हो, किसी निश्चित स्थान और समय पर स्वयं या अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए,
उस स्थान या समय पर हाजिर होने का साशय लोप करेगा, या उस स्थान से, जहां हाजिर होने के लिए वह आबद्ध है, उस समय से पूर्व चला जाएगा, जिस समय चला जाना उसके लिए विधिपूर्ण होता,
वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से,
अथवा, यदि समन, सूचना, आदेश या उद्घोषणा किसी न्यायालय में स्वयं या किसी अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने के लिए है, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
दृष्टांत :
(क) क कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा निकाले गए सपीना के पालन में उस न्यायालय के समक्ष उपसंजात होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उपसंजात होने में साशय लोप करता है, क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
(ख) क जिला न्यायाधीश द्वारा निकाले गए समन के पालन में उस जिला न्यायाधीश के समक्ष साक्षी के रूप में उपसंजात होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उपसंजात होने में साशय लोप करता है । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
पूरा पढ़ें: IPC §174जो कोई किसी लोक सेवक द्वारा निकाले गए उस समन, सूचना, आदेश या उद्घोषणा के पालन में, जिसे ऐसे लोक सेवक के नाते निकालने के लिए वह वैध रूप से सक्षम हो, किसी निश्चित स्थान और समय पर स्वयं या अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए,
उस स्थान या समय पर हाजिर होने का साशय लोप करेगा, या उस स्थान से, जहां हाजिर होने के लिए वह आबद्ध है, उस समय से पूर्व चला जाएगा, जिस समय चला जाना उसके लिए विधिपूर्ण होता,
वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से,
अथवा, यदि समन, सूचना, आदेश या उद्घोषणा किसी न्यायालय में स्वयं या किसी अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने के लिए है, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
दृष्टांत :
(क) क कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा निकाले गए सपीना के पालन में उस न्यायालय के समक्ष उपसंजात होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उपसंजात होने में साशय लोप करता है, क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
(ख) क जिला न्यायाधीश द्वारा निकाले गए समन के पालन में उस जिला न्यायाधीश के समक्ष साक्षी के रूप में उपसंजात होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उपसंजात होने में साशय लोप करता है । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
