पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNS धारा 178(2) अब IPC धारा 230 है
नकली सिक्के, सरकारी डाक टिकट, करेंसी नोट या बैंक नोट बनाना।
पुराना कानून
BNS §178(2)
नकली सिक्के, सरकारी डाक टिकट, करेंसी नोट या बैंक नोट बनाना।
जो कोई भी सरकार द्वारा राजस्व के उद्देश्य से जारी किए गए किसी भी सिक्के, स्टाम्प, करेंसी नोट या बैंक नोट की जालसाजी करता है, या जानबूझकर जालसाजी की प्रक्रिया के किसी भी भाग को अंजाम देता है, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
स्पष्टीकरण.—इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए,—
(1) “बैंक-नोट” अभिव्यक्ति का अर्थ है किसी भी व्यक्ति द्वारा जारी किया गया, जो विश्व के किसी भी भाग में बैंकिंग व्यवसाय करता हो, या किसी राज्य या संप्रभु शक्ति द्वारा या उसके अधिकार के तहत जारी किया गया हो, और जिसका उद्देश्य धन के समतुल्य या धन के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाना हो;
(2) “सिक्का” का वही अर्थ होगा जो इसे मुद्रा अधिनियम, 2011 (11 ऑफ 2011) की धारा 2 में दिया गया है और इसमें धातु शामिल है जो उस समय मुद्रा के रूप में उपयोग की जाती है और किसी राज्य या संप्रभु शक्ति द्वारा या उसके अधिकार के तहत इस प्रकार उपयोग किए जाने के लिए मुहरबंद और जारी की जाती है;
(3) कोई व्यक्ति “सरकारी स्टाम्प की जालसाजी” का अपराध करता है, जो एक मूल्यवर्ग के असली स्टाम्प को दूसरे मूल्यवर्ग के असली स्टाम्प की तरह दिखाकर जालसाजी करता है; (4) कोई व्यक्ति नकली सिक्का बनाने का अपराध करता है, यदि वह धोखाधड़ी करने के इरादे से, या यह जानते हुए कि इससे धोखाधड़ी होने की संभावना है, किसी असली सिक्के को दूसरे सिक्के जैसा बना देता है; और
(5) “सिक्के की जालसाजी” के अपराध में वजन कम करना या संरचना में परिवर्तन करना या सिक्के की दिखावट में परिवर्तन करना शामिल है।
पूरा पढ़ें: BNS §178(2)स्पष्टीकरण.—इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए,—
(1) “बैंक-नोट” अभिव्यक्ति का अर्थ है किसी भी व्यक्ति द्वारा जारी किया गया, जो विश्व के किसी भी भाग में बैंकिंग व्यवसाय करता हो, या किसी राज्य या संप्रभु शक्ति द्वारा या उसके अधिकार के तहत जारी किया गया हो, और जिसका उद्देश्य धन के समतुल्य या धन के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाना हो;
(2) “सिक्का” का वही अर्थ होगा जो इसे मुद्रा अधिनियम, 2011 (11 ऑफ 2011) की धारा 2 में दिया गया है और इसमें धातु शामिल है जो उस समय मुद्रा के रूप में उपयोग की जाती है और किसी राज्य या संप्रभु शक्ति द्वारा या उसके अधिकार के तहत इस प्रकार उपयोग किए जाने के लिए मुहरबंद और जारी की जाती है;
(3) कोई व्यक्ति “सरकारी स्टाम्प की जालसाजी” का अपराध करता है, जो एक मूल्यवर्ग के असली स्टाम्प को दूसरे मूल्यवर्ग के असली स्टाम्प की तरह दिखाकर जालसाजी करता है; (4) कोई व्यक्ति नकली सिक्का बनाने का अपराध करता है, यदि वह धोखाधड़ी करने के इरादे से, या यह जानते हुए कि इससे धोखाधड़ी होने की संभावना है, किसी असली सिक्के को दूसरे सिक्के जैसा बना देता है; और
(5) “सिक्के की जालसाजी” के अपराध में वजन कम करना या संरचना में परिवर्तन करना या सिक्के की दिखावट में परिवर्तन करना शामिल है।
नया कानून
IPC §230
धारा 230 - “सिक्का” की परिभाषा
“सिक्का” की परिभाषा
सिक्का, तत्समय धन के रूप में उपयोग में लाई जा रही और इस प्रकार उपयोग में लाए जाने के लिए किसी राज्य या संपूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न शक्ति के प्राधिकार द्वारा, स्टाम्पित और प्रचालित धातु है ।
भारतीय सिक्का - भारतीय सिक्का धन के रूप में उपयोग में लाए जाने के लिए भारत सरकार के प्राधिकार द्वारा स्टाम्पित और प्रचालित धातु है ; और इस प्रकार स्टाम्पित और प्रचालित धातु इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए भारतीय सिक्का बनी रहेगी, यद्यपि धन के रूप में उसका उपयोग में लाया जाना बन्द हो गया हो ।
दृष्टांत :
(क) कौड़ियां सिक्के नहीं हैं ।
(ख) अस्टाम्पित तांबे के टुकड़े, यद्यपि धन के रूप में उपयोग में लाए जाते हैं, सिक्के नहीं हैं ।
(ग) पदक सिक्के नहीं हैं, क्योंकि वे धन के रूप में उपयोग में लाए जाने के लिए आशयित नहीं हैं ।
(घ) जिस सिक्के का नाम कम्पनी रुपया है, वह 3[भारतीय सिक्का] है ।
(ङ) “फरूखाबाद रुपया”, जो धन के रूप में भारत सरकार के प्राधिकार के अधीन पहले कभी उपयोग में लाया जाता था,
भारतीय सिक्का है, यद्यपि वह अब इस प्रकार उपयोग में नहीं लाया जाता है ।
पूरा पढ़ें: IPC §230सिक्का, तत्समय धन के रूप में उपयोग में लाई जा रही और इस प्रकार उपयोग में लाए जाने के लिए किसी राज्य या संपूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न शक्ति के प्राधिकार द्वारा, स्टाम्पित और प्रचालित धातु है ।
भारतीय सिक्का - भारतीय सिक्का धन के रूप में उपयोग में लाए जाने के लिए भारत सरकार के प्राधिकार द्वारा स्टाम्पित और प्रचालित धातु है ; और इस प्रकार स्टाम्पित और प्रचालित धातु इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए भारतीय सिक्का बनी रहेगी, यद्यपि धन के रूप में उसका उपयोग में लाया जाना बन्द हो गया हो ।
दृष्टांत :
(क) कौड़ियां सिक्के नहीं हैं ।
(ख) अस्टाम्पित तांबे के टुकड़े, यद्यपि धन के रूप में उपयोग में लाए जाते हैं, सिक्के नहीं हैं ।
(ग) पदक सिक्के नहीं हैं, क्योंकि वे धन के रूप में उपयोग में लाए जाने के लिए आशयित नहीं हैं ।
(घ) जिस सिक्के का नाम कम्पनी रुपया है, वह 3[भारतीय सिक्का] है ।
(ङ) “फरूखाबाद रुपया”, जो धन के रूप में भारत सरकार के प्राधिकार के अधीन पहले कभी उपयोग में लाया जाता था,
भारतीय सिक्का है, यद्यपि वह अब इस प्रकार उपयोग में नहीं लाया जाता है ।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
