पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNS धारा 125(a) अब IPC धारा 337 है
ऐसा कृत्य जिससे दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो।
पुराना कानून
BNS §125(a)
ऐसा कृत्य जिससे दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो।
जो कोई भी ऐसा कार्य इतनी जल्दबाजी या लापरवाही से करता है जिससे मानव जीवन या दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़ जाए, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन महीने तक की अवधि के लिए या ढाई हजार रुपये तक के जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा, लेकिन—
(क) जहां चोट पहुंचाई जाती है, वहां छह महीने तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास या पांच हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा;
(ख) जहां गंभीर चोट पहुंचाई जाती है, वहां तीन वर्ष तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास या दस हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ें: BNS §125(a)(क) जहां चोट पहुंचाई जाती है, वहां छह महीने तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास या पांच हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा;
(ख) जहां गंभीर चोट पहुंचाई जाती है, वहां तीन वर्ष तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास या दस हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।
नया कानून
IPC §337
धारा 337 - ऐसे कार्य द्वारा उपहति कारित करना, जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए
ऐसे कार्य द्वारा उपहति कारित करना, जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए
जो कोई ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा से कोई कार्य करने द्वारा, जिससे मानव जीवन या दूसरों का वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए, किसी व्यक्ति को उपहति कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
1 1882 के अधिनियम सं0 8 की धारा 8 द्वारा अन्तःस्थापित । भारतीय दंड संहिता, 1860 64
पूरा पढ़ें: IPC §337जो कोई ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा से कोई कार्य करने द्वारा, जिससे मानव जीवन या दूसरों का वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए, किसी व्यक्ति को उपहति कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
1 1882 के अधिनियम सं0 8 की धारा 8 द्वारा अन्तःस्थापित । भारतीय दंड संहिता, 1860 64
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
