पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNS धारा 121(2) अब IPC धारा 333 है
लोक सेवक को उसके कर्तव्य से विचलित करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
पुराना कानून
BNS §121(2)
लोक सेवक को उसके कर्तव्य से विचलित करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई स्वेच्छा से किसी लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वाह में चोट पहुँचाता है, या उस व्यक्ति को या किसी अन्य लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वाह से रोकने या हतोत्साहित करने के इरादे से, या उस व्यक्ति द्वारा लोक सेवक के रूप में अपने कर्तव्य के वैध निर्वाह में किए गए या किए जाने के प्रयास के परिणामस्वरूप चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से पाँच वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(2) जो कोई स्वेच्छा से किसी लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वाह में गंभीर चोट पहुँचाता है, या उस व्यक्ति को या किसी अन्य लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वाह से रोकने या हतोत्साहित करने के इरादे से, या उस व्यक्ति द्वारा लोक सेवक के रूप में अपने कर्तव्य के वैध निर्वाह में किए गए या किए जाने के प्रयास के परिणामस्वरूप गंभीर चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि एक वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन दस वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
पूरा पढ़ें: BNS §121(2)(2) जो कोई स्वेच्छा से किसी लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वाह में गंभीर चोट पहुँचाता है, या उस व्यक्ति को या किसी अन्य लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वाह से रोकने या हतोत्साहित करने के इरादे से, या उस व्यक्ति द्वारा लोक सेवक के रूप में अपने कर्तव्य के वैध निर्वाह में किए गए या किए जाने के प्रयास के परिणामस्वरूप गंभीर चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि एक वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन दस वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
नया कानून
IPC §333
धारा 333 - लोक सेवक को अपने कर्तव्यों से भयोपरत स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
लोक सेवक को अपने कर्तव्यों से भयोपरत स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
जो कोई किसी ऐसे व्यक्ति को, जो लोक सेवक हो, उस समय जब वह वैसे लोक सेवक के नाते अपने कर्तव्य का निवहन कर रहा हो अथवा इस आशय से कि उस व्यक्ति को, या किसी अन्य लोक सेवक को वैसे लोक सेवक के नाते उस व्यक्ति द्वारा अपने कर्तव्य के विधिपूर्ण निर्वहन में की गई या किए जाने के लिए प्रयतित किसी बात के परिणास्वरूप स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
पूरा पढ़ें: IPC §333जो कोई किसी ऐसे व्यक्ति को, जो लोक सेवक हो, उस समय जब वह वैसे लोक सेवक के नाते अपने कर्तव्य का निवहन कर रहा हो अथवा इस आशय से कि उस व्यक्ति को, या किसी अन्य लोक सेवक को वैसे लोक सेवक के नाते उस व्यक्ति द्वारा अपने कर्तव्य के विधिपूर्ण निर्वहन में की गई या किए जाने के लिए प्रयतित किसी बात के परिणास्वरूप स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
