पाठ बदला गया है
BNS धारा 120 अब IPC धारा 330 है
जबरन बयान दिलवाने या संपत्ति की बहाली के लिए जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
पुराना कानून
BNS §120
जबरन बयान दिलवाने या संपत्ति की बहाली के लिए जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी पीड़ित व्यक्ति या पीड़ित व्यक्ति के हितैषी से कोई स्वीकारोक्ति या ऐसी कोई जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है जिससे किसी अपराध या दुराचार का पता चल सके, या पीड़ित व्यक्ति या पीड़ित व्यक्ति के हितैषी को किसी संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति को लौटाने या लौटाने का कारण बनने, या किसी दावे या मांग को पूरा करने, या ऐसी जानकारी देने के लिए विवश करने के उद्देश्य से चोट पहुँचाता है जिससे किसी संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति को लौटाया जा सके, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से सात वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी पात्र होगा।
चित्र।
(क) पुलिस अधिकारी ए, जेड को यातना देकर उससे अपराध स्वीकार करवाने का प्रयास करता है। ए इस धारा के अंतर्गत अपराध का दोषी है।
(ख) पुलिस अधिकारी ए, बी को यातना देकर उससे चोरी की संपत्ति के ठिकाने का पता निकलवाता है। ए इस धारा के तहत अपराध का दोषी है।
(ग) राजस्व अधिकारी ए, जेड को राजस्व के बकाया का भुगतान करने के लिए विवश करने हेतु उसे प्रताड़ित करता है। ए इस धारा के अंतर्गत अपराध का दोषी है।
(2) जो कोई उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी उद्देश्य से स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
पूरा पढ़ें: BNS §120चित्र।
(क) पुलिस अधिकारी ए, जेड को यातना देकर उससे अपराध स्वीकार करवाने का प्रयास करता है। ए इस धारा के अंतर्गत अपराध का दोषी है।
(ख) पुलिस अधिकारी ए, बी को यातना देकर उससे चोरी की संपत्ति के ठिकाने का पता निकलवाता है। ए इस धारा के तहत अपराध का दोषी है।
(ग) राजस्व अधिकारी ए, जेड को राजस्व के बकाया का भुगतान करने के लिए विवश करने हेतु उसे प्रताड़ित करता है। ए इस धारा के अंतर्गत अपराध का दोषी है।
(2) जो कोई उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी उद्देश्य से स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
नया कानून
IPC §330
धारा 330 - संस्वीकृति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
संस्वीकृति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
जो कोई इस प्रयोजन से स्वेच्छया उपहति कारित करेगा कि उपहत व्यक्ति से या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से कोई संस्वीकृति या कोई ऐसी जानकारी, जिससे किसी अपराध अथवा अवचार का पता चल सके, उद्दापित की जाए, अथवा उपहत व्यक्ति को या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति को मजबूर किया जाए कि वह कोई सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति प्रत्यावर्तित करे या करवाए, या किसी दावे या मांग की तुष्टि करे, या ऐसी जानकारी दे, जिससे किसी सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति का प्रत्यावर्तन कराया जा सके, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
दृष्टांत :
(क) क, एक पुलिस आफिसर, य को यह संस्वीकार करने के लिए उत्प्रेरित करने के प्रयोजन से कि उसने अपराध किया है, य को यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।
(ख) क, एक पुलिस आफिसर, ख को यह बताने के लिए उत्प्रेरित करने के प्रयोजन से कि कुछ चुराई हुई सम्पत्ति कहां रखी है, ख को यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।
(ग) क, एक राजस्व आफिसर, य को उससे शोध्य राजस्व के कुछ बकाया देने के लिए मजबूर करने के प्रयोजन से य को यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।
(घ) क, एक जमींदार, एक रैयत को अपना लगान देने के लिए मजबूर करने के प्रयोजन से उसे यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।
पूरा पढ़ें: IPC §330जो कोई इस प्रयोजन से स्वेच्छया उपहति कारित करेगा कि उपहत व्यक्ति से या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से कोई संस्वीकृति या कोई ऐसी जानकारी, जिससे किसी अपराध अथवा अवचार का पता चल सके, उद्दापित की जाए, अथवा उपहत व्यक्ति को या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति को मजबूर किया जाए कि वह कोई सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति प्रत्यावर्तित करे या करवाए, या किसी दावे या मांग की तुष्टि करे, या ऐसी जानकारी दे, जिससे किसी सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति का प्रत्यावर्तन कराया जा सके, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
दृष्टांत :
(क) क, एक पुलिस आफिसर, य को यह संस्वीकार करने के लिए उत्प्रेरित करने के प्रयोजन से कि उसने अपराध किया है, य को यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।
(ख) क, एक पुलिस आफिसर, ख को यह बताने के लिए उत्प्रेरित करने के प्रयोजन से कि कुछ चुराई हुई सम्पत्ति कहां रखी है, ख को यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।
(ग) क, एक राजस्व आफिसर, य को उससे शोध्य राजस्व के कुछ बकाया देने के लिए मजबूर करने के प्रयोजन से य को यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।
(घ) क, एक जमींदार, एक रैयत को अपना लगान देने के लिए मजबूर करने के प्रयोजन से उसे यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
