पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNS धारा 117(1) अब IPC धारा 322 है
जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
पुराना कानून
BNS §117(1)
जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, यदि वह चोट जो वह पहुँचाने का इरादा रखता है या जानता है कि वह पहुँचाने की संभावना है, गंभीर चोट है, और यदि वह जो चोट पहुँचाता है वह गंभीर चोट है, तो उसे “स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाना” कहा जाता है।
स्पष्टीकरण—किसी व्यक्ति को स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाने वाला तब तक नहीं कहा जाता जब तक कि वह गंभीर चोट न पहुँचाए और साथ ही गंभीर चोट पहुँचाने का इरादा रखता हो या जानता हो कि वह गंभीर चोट पहुँचा सकता है। लेकिन उसे स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाने वाला तब कहा जाता है, यदि किसी व्यक्ति का इरादा गंभीर चोट पहुँचाने का हो या वह जानता हो कि वह गंभीर चोट पहुँचा सकता है, और वास्तव में वह दूसरे प्रकार की गंभीर चोट पहुँचाता है।
चित्रण।
A, यह जानते हुए कि वह Z के चेहरे को स्थायी रूप से विकृत कर सकता है, Z को एक ऐसा प्रहार करता है जिससे Z का चेहरा स्थायी रूप से विकृत तो नहीं होता, लेकिन Z को पंद्रह दिनों तक तीव्र शारीरिक पीड़ा सहनी पड़ती है। A ने जानबूझकर Z को गंभीर चोट पहुंचाई है।
(2) धारा 122 की उपधारा (2) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से सात वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
(3) जो कोई उपधारा (1) के तहत कोई अपराध करता है और ऐसे अपराध के दौरान किसी व्यक्ति को ऐसी चोट पहुँचाता है जिससे वह व्यक्ति स्थायी रूप से अपंग हो जाए या स्थायी रूप से निष्फल अवस्था में चला जाए, उसे कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, जिसका अर्थ उस व्यक्ति के प्राकृतिक जीवन के शेष समय के लिए कारावास होगा।
(4) जब पाँच या दो से अधिक व्यक्तियों का कोई समूह मिलकर किसी व्यक्ति को उसकी जाति, नस्ल या समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, व्यक्तिगत विश्वास या किसी अन्य समान आधार पर गंभीर चोट पहुँचाता है, तो ऐसे समूह का प्रत्येक सदस्य गंभीर चोट पहुँचाने के अपराध का दोषी होगा और उसे किसी भी प्रकार के कारावास से सात वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
पूरा पढ़ें: BNS §117(1)स्पष्टीकरण—किसी व्यक्ति को स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाने वाला तब तक नहीं कहा जाता जब तक कि वह गंभीर चोट न पहुँचाए और साथ ही गंभीर चोट पहुँचाने का इरादा रखता हो या जानता हो कि वह गंभीर चोट पहुँचा सकता है। लेकिन उसे स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाने वाला तब कहा जाता है, यदि किसी व्यक्ति का इरादा गंभीर चोट पहुँचाने का हो या वह जानता हो कि वह गंभीर चोट पहुँचा सकता है, और वास्तव में वह दूसरे प्रकार की गंभीर चोट पहुँचाता है।
चित्रण।
A, यह जानते हुए कि वह Z के चेहरे को स्थायी रूप से विकृत कर सकता है, Z को एक ऐसा प्रहार करता है जिससे Z का चेहरा स्थायी रूप से विकृत तो नहीं होता, लेकिन Z को पंद्रह दिनों तक तीव्र शारीरिक पीड़ा सहनी पड़ती है। A ने जानबूझकर Z को गंभीर चोट पहुंचाई है।
(2) धारा 122 की उपधारा (2) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से सात वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
(3) जो कोई उपधारा (1) के तहत कोई अपराध करता है और ऐसे अपराध के दौरान किसी व्यक्ति को ऐसी चोट पहुँचाता है जिससे वह व्यक्ति स्थायी रूप से अपंग हो जाए या स्थायी रूप से निष्फल अवस्था में चला जाए, उसे कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, जिसका अर्थ उस व्यक्ति के प्राकृतिक जीवन के शेष समय के लिए कारावास होगा।
(4) जब पाँच या दो से अधिक व्यक्तियों का कोई समूह मिलकर किसी व्यक्ति को उसकी जाति, नस्ल या समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, व्यक्तिगत विश्वास या किसी अन्य समान आधार पर गंभीर चोट पहुँचाता है, तो ऐसे समूह का प्रत्येक सदस्य गंभीर चोट पहुँचाने के अपराध का दोषी होगा और उसे किसी भी प्रकार के कारावास से सात वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
नया कानून
IPC §322
धारा 322 - स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
जो कोई व्यक्ति स्वेच्छया उपहति कारित करता है, यदि वह उपहति, जिसे कारित करने का उसका आशय है या जिसे वह जानता है कि उसके द्वारा उसका किया जाना सम्भाव्य है घोर उपहति है, और यदि वह उपहति, जो वह कारित करता है, घोर उपहति को, तो वह “स्वेच्छया घोर उपहति करता है”, यह कहा जाता है ।
स्पष्टीकरण - कोई व्यक्ति स्वेच्छया घोर उपहति कारित करता है, यह नहीं कहा जाता है सिवाय जब कि वह घोर उपहति करता है और घोर उपहति कारित करने का उसका आशय हो या घोर उपहति कारित होना वह सम्भाव्य जानता हो । किन्तु यदि वह यह आशय रखते हुए या यह संभाव्य जानते हुए कि वह किसी एक किस्म की घोर उपहति कारित कर दे वास्तव में दूसरी ही किस्म की घोर उपहति कारित करता है, तो वह स्वेच्छया घोर उपहति करता है, यह कहा जाता है ।
दृष्टांत :
क, यह आशय रखते हुए या यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह य के चेहरे को स्थायी रूप से विद्रुपित कर दे, य के चेहरे पर प्रहार करता है जिससे य का चेहरा स्थायी रूप से विद्रुपित तो नहीं होता, किन्तु जिससे य को बीस दिन तक तीव्र शारीरिक पीड़ा कारित होती है । क ने स्वेच्छया घोर उपहति कारित की है ।
पूरा पढ़ें: IPC §322जो कोई व्यक्ति स्वेच्छया उपहति कारित करता है, यदि वह उपहति, जिसे कारित करने का उसका आशय है या जिसे वह जानता है कि उसके द्वारा उसका किया जाना सम्भाव्य है घोर उपहति है, और यदि वह उपहति, जो वह कारित करता है, घोर उपहति को, तो वह “स्वेच्छया घोर उपहति करता है”, यह कहा जाता है ।
स्पष्टीकरण - कोई व्यक्ति स्वेच्छया घोर उपहति कारित करता है, यह नहीं कहा जाता है सिवाय जब कि वह घोर उपहति करता है और घोर उपहति कारित करने का उसका आशय हो या घोर उपहति कारित होना वह सम्भाव्य जानता हो । किन्तु यदि वह यह आशय रखते हुए या यह संभाव्य जानते हुए कि वह किसी एक किस्म की घोर उपहति कारित कर दे वास्तव में दूसरी ही किस्म की घोर उपहति कारित करता है, तो वह स्वेच्छया घोर उपहति करता है, यह कहा जाता है ।
दृष्टांत :
क, यह आशय रखते हुए या यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह य के चेहरे को स्थायी रूप से विद्रुपित कर दे, य के चेहरे पर प्रहार करता है जिससे य का चेहरा स्थायी रूप से विद्रुपित तो नहीं होता, किन्तु जिससे य को बीस दिन तक तीव्र शारीरिक पीड़ा कारित होती है । क ने स्वेच्छया घोर उपहति कारित की है ।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
