किस उपबंध के अधीन: धारा 35, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019
ज़िला उपभोक्ता आयोग में परिवाद — धारा 35, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019
यह प्रारूप अंग्रेज़ी में (English)
खाने भरिए
आप यहाँ जो कुछ भी लिखते हैं वह आपके अपने ब्राउज़र में ही रहता है। न कहीं भेजा जाता है, न सहेजा जाता है, न हमें दिखता है। पन्ना बंद करते ही वह मिट जाता है — इसलिए प्रिंट करने से पहले बंद मत कीजिए।
जो खाना खाली छोड़ेंगे, उसकी जगह प्रिंट में एक लकीर छपेगी — उसे हाथ से भरा जा सकता है। खाली फ़ॉर्म प्रिंट करके साथ ले जाना भी ठीक है।
वैसा ही जैसा आधार या पहचान-पत्र पर है।
समय के क्रम में लिखिए: पहले क्या हुआ, फिर क्या। जो याद नहीं है उसका अनुमान मत लगाइए।
जैसे: पूरी रकम की वापसी, सामान बदलना, हर्जाना, मुक़दमे का ख़र्च — हर माँग अलग पंक्ति में, रकम सहित।
दस्तावेज़
ज़िला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, ________________ के समक्ष
उपभोक्ता परिवाद संख्या ................ सन् ................
________________
निवासी ________________
मोबाइल ________________, ईमेल ________________ ...... परिवादी
बनाम
________________
________________ ...... विरोधी पक्षकार
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के अधीन परिवाद
किस उपबंध के अधीन: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35; आर्थिक अधिकारिता धारा 34 तथा उपभोक्ता संरक्षण (ज़िला आयोग, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग की अधिकारिता) नियम, 2021 के अनुसार (प्रतिफल के रूप में चुकाया गया माल या सेवा का मूल्य ₹50 लाख तक); परिसीमा धारा 69 के अनुसार (वाद-हेतुक उत्पन्न होने से दो वर्ष)।
परिवादी सादर निवेदन करता है:
1. दिनांक ________________ को परिवादी ने विरोधी पक्षकार से ₹________________ के प्रतिफल पर माल ख़रीदा / सेवा ली। परिवादी अधिनियम की धारा 2(7) के अर्थ में उपभोक्ता है। बिल / रसीद संलग्न है। (संलग्नक-1)
2. माल में दोष / सेवा में कमी / अनुचित व्यापार व्यवहार:
________________
3. परिवादी ने यह बात विरोधी पक्षकार के ध्यान में लाई, किंतु उसका निवारण नहीं हुआ। पत्राचार की प्रतियाँ संलग्न हैं। (संलग्नक-2)
4. वाद-हेतुक दिनांक ________________ को उत्पन्न हुआ, जो इस परिवाद के दाखिल होने से दो वर्ष के भीतर है, और इस आयोग की क्षेत्रीय अधिकारिता में है — परिवादी यहाँ निवास करता है / विरोधी पक्षकार यहाँ कारबार करता है / वाद-हेतुक यहाँ उत्पन्न हुआ (धारा 34(2))।
5. प्रतिफल के रूप में चुकाया गया माल या सेवा का मूल्य इस आयोग की आर्थिक अधिकारिता के भीतर है। विहित शुल्क, यदि कोई हो, जमा है। (₹5 लाख तक के प्रतिफल पर कोई शुल्क देय नहीं है।)
प्रार्थना: परिवादी प्रार्थना करता है कि यह आयोग धारा 39 के अधीन विरोधी पक्षकार को निदेश दे कि वह:
________________
सत्यापन: मैं, ________________, सत्यापित करता/करती हूँ कि पैराग्राफ़ 1 से 5 की बातें मेरी जानकारी और विश्वास के अनुसार सत्य हैं, और कोई तात्त्विक बात छिपाई नहीं गई है।
परिवादी
________________
स्थान: ________________
दिनांक: ________________
(यह परिवाद उपभोक्ता मामले विभाग के ई-जागृति पोर्टल पर ऑनलाइन भी दाखिल किया जा सकता है।)साथ क्या लगाना है
- बिल / रसीद / बुकिंग की पुष्टि (संलग्नक-1)।
- विक्रेता से पत्राचार, और यदि भेजा हो तो क़ानूनी नोटिस (संलग्नक-2)।
- दोष के फ़ोटो, जॉब-कार्ड या विशेषज्ञ रिपोर्ट।
- हर विरोधी पक्षकार के लिए एक अतिरिक्त प्रति; ई-जागृति पर ऑनलाइन दाखिल करें तो पीडीएफ़।
