किस उपबंध के अधीन: धारा 138 परंतुक (ग) और धारा 139, प.लि. अधिनियम
चेक बाउंस माँग-नोटिस का उत्तर — धारा 138 प.लि. अधिनियम (15 दिन के भीतर)
यह प्रारूप अंग्रेज़ी में (English)
खाने भरिए
आप यहाँ जो कुछ भी लिखते हैं वह आपके अपने ब्राउज़र में ही रहता है। न कहीं भेजा जाता है, न सहेजा जाता है, न हमें दिखता है। पन्ना बंद करते ही वह मिट जाता है — इसलिए प्रिंट करने से पहले बंद मत कीजिए।
जो खाना खाली छोड़ेंगे, उसकी जगह प्रिंट में एक लकीर छपेगी — उसे हाथ से भरा जा सकता है। खाली फ़ॉर्म प्रिंट करके साथ ले जाना भी ठीक है।
पंद्रह दिन इसी तिथि से गिने जाते हैं — धारा 138 का परंतुक (ग)।
वैसा ही जैसा आधार या पहचान-पत्र पर है।
चेक क्यों दिया गया था, क्या बकाया था या नहीं, क्या भुगतान हो चुका है — तिथियों सहित। केवल वही लिखिए जो आप सिद्ध कर सकें।
दस्तावेज़
सेवा में,
________________
________________
(रजिस्टर्ड डाक / स्पीड पोस्ट से — रसीद सँभालकर रखिए)
विषय: परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अधीन आपके नोटिस का उत्तर, जो दिनांक ________________ को प्राप्त हुआ, चेक संख्या ________________ दिनांक ________________, रकम ₹________________ के संबंध में।
किस उपबंध के अधीन: परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 का परंतुक, सहपठित धारा 139।
महोदय / महोदया,
1. मैं, ________________, निवासी ________________, को आपका नोटिस दिनांक ________________ को प्राप्त हुआ। यह उत्तर उस तिथि से पंद्रह दिन के भीतर भेजा जा रहा है।
2. तथ्यों पर मेरा उत्तर:
________________
3. [जो अनुच्छेद सत्य हो उसे रखिए, दूसरा हटा दीजिए।]
(क) चेक प्रस्तुत किए जाने के समय कोई विधितः प्रवर्तनीय ऋण या दायित्व नहीं था। चेक ऊपर बताए अनुसार प्रतिभूति के रूप में / ऋण-उन्मोचन से भिन्न प्रयोजन के लिए दिया गया था। धारा 139 की उपधारणा अधिसंभाव्यता की प्रबलता पर खंडनीय है (रंगप्पा बनाम श्री मोहन, (2010) 11 SCC 441; बसालिंगप्पा बनाम मुदिबसप्पा, (2019) 5 SCC 418), और ऊपर के तथ्य उसका खंडन करते हैं।
(ख) चेक की रकम का भुगतान आपके नोटिस की प्राप्ति से पंद्रह दिन के भीतर दिनांक ................ को ................ (विवरण) द्वारा कर दिया गया है। धारा 138 के परंतुक के खंड (ग) के अनुसार उस अवधि में भुगतान हो जाने पर कोई अपराध नहीं बनता।
4. आपसे अपेक्षा है कि चेक लौटाएँ और नोटिस वापस लें। इन तथ्यों की उपेक्षा कर दाखिल किसी भी परिवाद का विरोध किया जाएगा, और मैं विधि में उपलब्ध हर उपचार सुरक्षित रखता/रखती हूँ।
भवदीय/भवदीया,
________________
________________
स्थान: ________________
दिनांक: ________________साथ क्या लगाना है
- नोटिस की प्रति और लिफ़ाफ़ा — प्राप्ति की तिथि उसी से सिद्ध होती है।
- यदि भुगतान किया है तो उसका प्रमाण (बैंक हस्तांतरण, रसीद)।
- चेक किस कारण दिया गया था, उसके दस्तावेज़ — अनुबंध, संदेश, लेन-देन का हिसाब।
- उत्तर रजिस्टर्ड डाक से भेजिए और रसीद रखिए।
