समझौता (शमन) हो सकता है?
क्या पीड़ित से समझौते पर मामला ख़त्म हो सकता है, और क्या न्यायालय की अनुमति चाहिए।
भा.ना.सु.सं. धारा 359 (पहले दं.प्र.सं. धारा 320): सारणी 1 के अपराधों का शमन पीड़ित स्वयं कर सकता है, सारणी 2 के अपराधों का न्यायालय की अनुमति से। शमन का प्रभाव दोषमुक्ति जैसा है (धारा 359(8))। जिन अपराधों का शमन नहीं हो सकता, उनमें उच्च न्यायालय धारा 528 (पहले 482) के अधीन कार्यवाही रद्द कर सकता है।
इस मामले में क्या संभव है
नीचे हर उत्तर पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा बताता है और कोष्ठक में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की पुरानी धारा।
1 जुलाई 2024 या उसके बाद दर्ज मामलों पर BNSS लागू होती है। मामले की तारीख नहीं दी गई, इसलिए यह धाराओं से अनुमान है।
समझौता (राज़ीनामा)
हाँसमझौता हो सकता है, पर केवल न्यायालय की अनुमति से।
- विशेष अधिनियम:प्रतिभूति अपील अधिकरण या वह न्यायालय जहाँ कार्यवाही लंबित है, कार्यवाही से पहले या बाद में अपराध का शमन कर सकता है, सिवाय उन अपराधों के जिनमें केवल कारावास या कारावास और जुर्माना दोनों हैं। सेबी अधिनियम धारा 24A
भा.ना.सु.सं. धारा 359(2) (दं.प्र.सं. धारा 320(2))इन धाराओं के कारण: The Securities and Exchange Board of India Act, 1992 धारा 24
