दीवानी परिसीमा

परिसीमा अधिनियम, 1963 — वाद, अपील और आवेदन की समय-सीमा और अंतिम तिथि।

जो नियम अवधि बदल देते हैं

  • धारा 3 — अवधि बीतने के बाद दायर वाद, अपील या आवेदन ख़ारिज होगा, चाहे प्रतिवादी ने परिसीमा का बचाव न उठाया हो।
  • धारा 4 — अवधि उस दिन ख़त्म हो जब न्यायालय बंद है, तो न्यायालय खुलने के दिन दाखिल किया जा सकता है।
  • धारा 5 — अपील और आवेदन (आदेश XXI के आवेदन छोड़कर) में पर्याप्त कारण दिखाने पर देरी क्षमा हो सकती है — वाद में नहीं।
  • धारा 12 — जिस दिन से गिनती होनी है वह दिन छोड़ा जाता है; अपील, पुनरीक्षण या पुनर्विलोकन में डिक्री / निर्णय की प्रति पाने में लगा समय भी।
  • धारा 14 — गलत अधिकारिता वाले न्यायालय में सद्भावपूर्वक और तत्परता से चलाई गई कार्यवाही का समय छोड़ा जाता है।
  • धारा 18 — अवधि के भीतर दायित्व की लिखित, हस्ताक्षरित स्वीकृति से नई अवधि शुरू होती है।
  • धारा 19 — अवधि के भीतर ऋण या ब्याज का आंशिक भुगतान नई अवधि शुरू करता है।

अनुसूची के सभी 137 अनुच्छेद (उप-अनुच्छेद अलग-अलग, कुल 152) और 9 अन्य अधिनियमों की अवधियाँ। अपराधों की परिसीमा के लिए परिसीमा कैलकुलेटर देखिए। परिसीमा कैलकुलेटर