किस उपबंध के अधीन: भा.ना.सु.सं. धारा 175(3) (दं.प्र.सं. 156(3))
मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन — भा.ना.सु.सं. धारा 175(3) (दं.प्र.सं. धारा 156(3)), जब पुलिस एफ़आईआर दर्ज न करे
यह प्रारूप अंग्रेज़ी में (English)
खाने भरिए
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जो खाना खाली छोड़ेंगे, उसकी जगह प्रिंट में एक लकीर छपेगी — उसे हाथ से भरा जा सकता है। खाली फ़ॉर्म प्रिंट करके साथ ले जाना भी ठीक है।
वैसा ही जैसा आधार या पहचान-पत्र पर है।
समय के क्रम में लिखिए: पहले क्या हुआ, फिर क्या। जो याद नहीं है उसका अनुमान मत लगाइए।
जिस दिन आपने थाने / बैंक को लिखित शिकायत दी थी।
रजिस्टर्ड डाक की रसीद पर छपी तिथि। यही तिथि न्यायालय देखता है।
दस्तावेज़
न्यायालय: श्रीमान् न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी / मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ________________
विविध आवेदन संख्या ................ सन् ................
________________
पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री ................
निवासी ________________ ...... आवेदक
बनाम
राज्य, द्वारा थानाध्यक्ष, थाना ________________ ...... विपक्षी
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 175(3) [दं.प्र.सं. धारा 156(3)] के अधीन आवेदन — एफ़आईआर दर्ज कर अन्वेषण का निदेश दिए जाने हेतु।
किस उपबंध के अधीन: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 175(3) [पहले दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 156(3)]।
** पहले भा.ना.सु.सं. धारा 173(4) [दं.प्र.सं. 154(3)] — यह क्रम छोड़ा नहीं जा सकता **
भा.ना.सु.सं. धारा 175(3) [दं.प्र.सं. 156(3)] का आवेदन प्रायः इसी कारण खारिज होता है कि आवेदक ने पहले धारा 173(1) और फिर धारा 173(4) का रास्ता नहीं अपनाया। प्रियंका श्रीवास्तव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, (2015) 6 SCC 287 में उच्चतम न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि धारा 156(3) का आवेदन शपथपत्र से समर्थित होना चाहिए और उसमें यह दिखाया जाना चाहिए कि आवेदक ने धारा 154(1) तथा 154(3) के उपचार पहले आज़मा लिए हैं। भा.ना.सु.सं. की धारा 175(3) अब यही बात स्वयं संहिता में कहती है — मजिस्ट्रेट धारा 173(4) के अधीन किए गए शपथपत्र-समर्थित आवेदन पर विचार करने के पश्चात् ही अन्वेषण का आदेश देगा।
आवेदक निवेदन करता है कि:
1. आवेदक ________________ है, निवासी ________________, मोबाइल ________________।
2. दिनांक ________________ को आवेदक के साथ निम्नलिखित घटना हुई, जिससे संज्ञेय अपराध बनता है:
________________
3. दिनांक ________________ को आवेदक ने इसकी लिखित सूचना थानाध्यक्ष, थाना ________________ को दी। उस पर कोई एफ़आईआर दर्ज नहीं की गई। (संलग्नक-1)
4. तत्पश्चात् दिनांक ________________ को आवेदक ने भा.ना.सु.सं. धारा 173(4) [दं.प्र.सं. धारा 154(3)] के अधीन रजिस्टर्ड डाक से पुलिस अधीक्षक, ________________ को शिकायत भेजी। उसकी प्रति तथा डाक रसीद संलग्न है। (संलग्नक-2)
5. आज तक न तो एफ़आईआर दर्ज हुई है और न ही कोई अन्वेषण प्रारंभ हुआ है। इस प्रकार आवेदक ने भा.ना.सु.सं. धारा 173(1) तथा 173(4) [दं.प्र.सं. 154(1) तथा 154(3)] दोनों उपचार समाप्त कर लिए हैं और अब उसके पास इस न्यायालय के समक्ष आने के सिवाय कोई मार्ग शेष नहीं है।
6. यह आवेदन आवेदक के शपथपत्र से समर्थित है, जो साथ संलग्न है।
प्रार्थना: अतः श्रीमान् से प्रार्थना है कि भा.ना.सु.सं. धारा 175(3) [दं.प्र.सं. धारा 156(3)] के अधीन थानाध्यक्ष, थाना ________________ को यह निदेश दिया जाए कि उपर्युक्त तथ्यों पर एफ़आईआर दर्ज कर विधि के अनुसार अन्वेषण किया जाए।
आवेदक
________________
________________
स्थान: ________________
दिनांक: ________________
संलग्नक: साथ लगी सूची के अनुसार।साथ क्या लगाना है
- आवेदक का शपथपत्र, विधिवत सत्यापित। प्रियंका श्रीवास्तव के बाद यह वैकल्पिक नहीं है।
- संलग्नक-1: थानाध्यक्ष को दी गई भा.ना.सु.सं. धारा 173(1) (दं.प्र.सं. 154(1)) की शिकायत की प्रति और उसकी रसीद।
- संलग्नक-2: पुलिस अधीक्षक को भेजी गई भा.ना.सु.सं. धारा 173(4) (दं.प्र.सं. 154(3)) की शिकायत की प्रति, डाक रसीद और ट्रैकिंग सहित।
- संलग्नक-3: वे दस्तावेज़ जिन पर आप निर्भर हैं।
- अधिवक्ता के माध्यम से दाखिल कर रहे हैं तो वकालतनामा।
- जितने विपक्षी हैं उतनी प्रतियाँ, और एक न्यायालय के लिए।
