चेक बाउंस पर माँग-नोटिस — धारा 138 प.लि. अधिनियम की तीस दिन वाली सूचना
यह प्रारूप अंग्रेज़ी में (English)
खाने भरिए
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कंपनी का चेक हो तो कंपनी का नाम, और साथ में हस्ताक्षर करने वाले निदेशक का नाम भी लिखिए — धारा 141।
वही पता जहाँ वह रहता है या कारबार करता है। नोटिस यहीं तामील होना चाहिए।
वैसा ही जैसा आधार या पहचान-पत्र पर है।
धारा 138 केवल विधितः प्रवर्तनीय ऋण या दायित्व पर लागू होती है। उधार, बिल, किराया, माल की कीमत — जो हो, तिथि सहित लिखिए।
धारा 138 का परंतुक (क): चेक आहरण की तिथि से छह मास के भीतर, या उसकी वैधता की अवधि के भीतर, जो पहले हो, प्रस्तुत होना चाहिए। व्यवहार में यह तीन मास है — भारतीय रिज़र्व बैंक के परिपत्र के अनुसार 1 अप्रैल 2012 से बैंक चेक की तिथि से तीन मास के बाद प्रस्तुत चेक का भुगतान नहीं करते।
तीस दिन की गिनती इसी सूचना से चलती है — धारा 138 का परंतुक (ख)।
जैसा छपा है वैसा ही उतारिए — 'funds insufficient', 'exceeds arrangement' आदि।
दस्तावेज़
सेवा में,
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(पंजीकृत डाक से, पावती सहित — भेजने की तिथि तथा तामील का प्रमाण अभिलेख पर आवश्यक है)
विषय: परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के परंतुक के अधीन माँग-नोटिस — चेक संख्या ________________, दिनांक ________________, राशि ₹________________ का अनादर।
किस उपबंध के अधीन: परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के परंतुक का खंड (ख)।
** यह नोटिस तीस दिन के भीतर जाना चाहिए **
धारा 138 के परंतुक का खंड (ख) यह अपेक्षा करता है कि चेक के अदत्त लौटने की सूचना बैंक से मिलने के तीस दिन के भीतर भुगतान की माँग की जाए — अर्थात् नीचे लिखे रिटर्न मेमो की तिथि से। इसके बाद भेजा गया नोटिस धारा 138 का अपराध बनने ही नहीं देता, और आगे की कोई कार्रवाई इस चूक को नहीं सुधार सकती।
महोदय/महोदया,
1. मैं ________________, निवासी ________________ हूँ। मुझसे ________________ पर तथा ________________ पर सम्पर्क किया जा सकता है।
2. आपने मुझे चेक संख्या ________________, दिनांक ________________, राशि ₹________________, ________________ पर आहरित, निम्नलिखित विधितः प्रवर्तनीय ऋण अथवा अन्य दायित्व के उन्मोचन में दिया था:
________________
3. वह चेक दिनांक ________________ को भुगतान हेतु प्रस्तुत किया गया और बैंक द्वारा अदत्त लौटा दिया गया। बैंक के दिनांक ________________ के रिटर्न मेमो में लौटाने का कारण इस प्रकार दर्ज है: ________________।
4. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 यह उपबंधित करती है कि जहाँ किसी व्यक्ति द्वारा अपने खाते पर आहरित चेक, किसी ऋण या अन्य दायित्व के पूर्णतः या भागतः उन्मोचन के लिए दिया गया हो और वह खाते में अपर्याप्त धनराशि के कारण, अथवा बैंक से तय की गई राशि से अधिक होने के कारण, बैंक द्वारा अदत्त लौटा दिया जाए, वहाँ वह व्यक्ति अपराध करने वाला समझा जाएगा, जो दो वर्ष तक के कारावास, या चेक की रकम के दुगुने तक के जुर्माने, या दोनों से दंडनीय है।
5. अतः मैं आपसे अपेक्षा करता/करती हूँ कि यह नोटिस मिलने के पंद्रह दिन के भीतर उक्त राशि ₹________________ मुझे अदा कर दें, जैसा धारा 138 के परंतुक का खंड (ग) अपेक्षित करता है।
6. सूचित किया जाता है कि उन पंद्रह दिनों में भुगतान न होने पर मैं सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 सहपठित धारा 142 के अधीन परिवाद दायर करने को विवश होऊँगा/होऊँगी — जो धारा 142(1)(ख) के अनुसार वाद-हेतुक उत्पन्न होने की तारीख से एक मास के भीतर दायर किया जाना है — तथा धारा 143क के अधीन अंतरिम प्रतिकर की माँग करूँगा/करूँगी, जिसका व्यय एवं परिणाम आपके जोखिम पर होगा।
7. यह नोटिस मुझे विधि में उपलब्ध किसी अन्य अधिकार अथवा उपचार पर, जिसमें उक्त राशि की ब्याज सहित वसूली का सिविल वाद भी है, प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना दिया जा रहा है।
भवदीय,
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स्थान: ________________
दिनांक: ________________
संलग्नक: साथ लगी सूची के अनुसार।साथ क्या लगाना है
- लौटे हुए चेक की दोनों ओर की छायाप्रति।
- बैंक का रिटर्न मेमो — मूल सँभालकर रखिए, प्रति भेजिए। धारा 146 के अनुसार यही पर्ची अनादर का प्रथम दृष्ट्या साक्ष्य है।
- जिस ऋण या दायित्व के लिए चेक दिया गया, उसका प्रमाण: बिल, समझौता, खाता-बही, बैंक स्टेटमेंट। धारा 138 केवल विधितः प्रवर्तनीय दायित्व पर लागू होती है।
- पंजीकृत डाक की रसीद और ट्रैकिंग — तथा नोटिस की एक प्रति। परिवाद के साथ यही तामील सिद्ध करता है, और पंद्रह दिन इसी प्राप्ति से गिने जाते हैं।
- नोटिस वापस आ जाए तो लिफ़ाफ़ा बिना खोले सँभालिए। लौटा हुआ नोटिस तामील से इनकार माना जाता है, फेंकिए मत।
