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धारा 83 - सात वर्ष से ऊपर किंतु बारह वर्ष से कम आयु के अपरिपक्व समझ के शिशु का कार्य
सात वर्ष से ऊपर किंतु बारह वर्ष से कम आयु के अपरिपक्व समझ के शिशु का कार्य कोई बात अपराध नहीं है, जो सात वर्ष से ऊपर और बारह वर्ष से कम आयु के ऐसे शिशु द्वारा की जाती है जिसकी समझ इतनी परिपक्व नहीं हुई है कि वह उस अवसर पर अपने आचरण की प्रकृति और परिणामों का निर्णय कर सके ।
पूरा पढ़ेंसात से बारह वर्ष की आयु के अपरिपक्व बच्चे द्वारा किया गया कृत्य।
सात वर्ष से अधिक और बारह वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे द्वारा किया गया कोई भी कार्य अपराध नहीं है, यदि उस बच्चे में अपने आचरण की प्रकृति और परिणामों का आकलन करने के लिए पर्याप्त परिपक्वता नहीं आई है।
पूरा पढ़ेंधारा 496 - विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्वक विवाह कर्म पूरा कर लेना
विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्वक विवाह कर्म पूरा कर लेना जो कोई बेईमानी से या कपटपूर्ण आशय से विवाहित होने का कर्म यह जानते हुए पूरा करेगा कि तदद्वारा वह विधिपूर्वक विवाहित नहीं हुआ है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंवैध विवाह के बिना धोखाधड़ी से विवाह समारोह संपन्न कराया गया।
जो कोई भी बेईमानी से या कपटपूर्ण इरादे से विवाह समारोह संपन्न करता है, यह जानते हुए कि वह इससे कानूनी रूप से विवाहित नहीं है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि सात वर्ष तक बढ़ सकती है, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
पूरा पढ़ें- IPC §83BNS §21
धारा 83 - सात वर्ष से ऊपर किंतु बारह वर्ष से कम आयु के अपरिपक्व समझ के शिशु का कार्य
सात से बारह वर्ष की आयु के अपरिपक्व बच्चे द्वारा किया गया कृत्य।
- IPC §496BNS §83
धारा 496 - विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्वक विवाह कर्म पूरा कर लेना
वैध विवाह के बिना धोखाधड़ी से विवाह समारोह संपन्न कराया गया।
