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12 प्रविष्टियाँ
धारा 41 - “विशेष विधि”
“विशेष विधि” “विशेष विधि” वह विधि है जो किसी विशिष्ट विषय को लागू हो ।
पूरा पढ़ेंपरिभाषाएँ।
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 103 - कब संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने तक का होता है
कब संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने तक का होता है संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार, धारा 99 में वर्णित निर्बन्धनो के अध्यधीन दोषकर्ता की मृत्यु या अन्य अपहानि स्वेच्छाया कारित करने तक का है, यदि वह अपराध जिसके किए जाने के, या किए जाने के प्रयत्न के कारण उस अधिकार…
पूरा पढ़ेंजब संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार मृत्यु का कारण बनने तक विस्तारित हो जाता है।
धारा 37 में निर्दिष्ट प्रतिबंधों के अधीन, संपत्ति की आत्मरक्षा का अधिकार अपराधी की स्वेच्छा से मृत्यु या किसी अन्य हानि पहुँचाने तक विस्तारित है, यदि वह अपराध, जिसके घटित होने या घटित होने के प्रयास के कारण इस अधिकार का प्रयोग किया जाता है, निम्नलिखित में से किसी भी प्रकार का अपराध हो, अर्थात्: — (क) डकैती; (ख)…
पूरा पढ़ेंधारा 410 - चुराई हुई संपत्ति
चुराई हुई संपत्ति वह संपत्ति, जिसका कब्जा चोरी द्वारा, या उद्दापन द्वारा या लूट द्वारा अंतरित किया गया है, और वह संपत्ति, जिसका आपराधिक दुर्विनियोग किया गया है, या जिसके विषय में आपराधिक न्यासभंग किया गया है, चुराई हुई “संपत्ति” कहलाती है, चाहे वह अंतरण या वह दुर्विनियोग या न्यासभंग भारत के भीतर किया गया हो या बाहर ।…
पूरा पढ़ेंचोरी की संपत्ति।
(1) वह संपत्ति जिसका कब्ज़ा चोरी, जबरन वसूली, डकैती या धोखाधड़ी द्वारा हस्तांतरित किया गया हो, और वह संपत्ति जिसका आपराधिक रूप से दुरुपयोग किया गया हो या जिसके संबंध में आपराधिक विश्वासघात किया गया हो, चोरी की संपत्ति कहलाती है, चाहे हस्तांतरण भारत के भीतर हुआ हो या भारत के बाहर, या दुरुपयोग या विश्वासघात किया गया हो,…
पूरा पढ़ेंधारा 411 - चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना
चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना जो कोई किसी चुराई हुई संपत्ति को, यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि वह चुराई हुई संपत्ति है, बेईमानी से प्राप्त करेगा या रखेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंचोरी की संपत्ति।
(1) वह संपत्ति जिसका कब्ज़ा चोरी, जबरन वसूली, डकैती या धोखाधड़ी द्वारा हस्तांतरित किया गया हो, और वह संपत्ति जिसका आपराधिक रूप से दुरुपयोग किया गया हो या जिसके संबंध में आपराधिक विश्वासघात किया गया हो, चोरी की संपत्ति कहलाती है, चाहे हस्तांतरण भारत के भीतर हुआ हो या भारत के बाहर, या दुरुपयोग या विश्वासघात किया गया हो,…
पूरा पढ़ेंधारा 412 - ऐसी संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना जो डकैती करने में चुराई गई है
ऐसी संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना जो डकैती करने में चुराई गई है जो कोई ऐसी चुराई गई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करेगा या रखे रखेगा, जिसके कब्जे के विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह डकैती द्वारा अंतरित की गई है, अथवा किसी ऐसे व्यक्ति से, जिसके संबंध में वह यह जानता है या विश्वास करने…
पूरा पढ़ेंचोरी की संपत्ति।
(1) वह संपत्ति जिसका कब्ज़ा चोरी, जबरन वसूली, डकैती या धोखाधड़ी द्वारा हस्तांतरित किया गया हो, और वह संपत्ति जिसका आपराधिक रूप से दुरुपयोग किया गया हो या जिसके संबंध में आपराधिक विश्वासघात किया गया हो, चोरी की संपत्ति कहलाती है, चाहे हस्तांतरण भारत के भीतर हुआ हो या भारत के बाहर, या दुरुपयोग या विश्वासघात किया गया हो,…
पूरा पढ़ेंधारा 413 - चुराई हुई संपत्ति का अभ्यासतः व्यापार करना
चुराई हुई संपत्ति का अभ्यासतः व्यापार करना जो कोई ऐसी संपत्ति, जिसके संबंध में वह यह जानता है, या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई संपत्ति है, अभ्यासतः प्राप्त करेगा, या अभ्यासतः उसमें व्यवहार करेगा, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित…
पूरा पढ़ेंचोरी की संपत्ति।
(1) वह संपत्ति जिसका कब्ज़ा चोरी, जबरन वसूली, डकैती या धोखाधड़ी द्वारा हस्तांतरित किया गया हो, और वह संपत्ति जिसका आपराधिक रूप से दुरुपयोग किया गया हो या जिसके संबंध में आपराधिक विश्वासघात किया गया हो, चोरी की संपत्ति कहलाती है, चाहे हस्तांतरण भारत के भीतर हुआ हो या भारत के बाहर, या दुरुपयोग या विश्वासघात किया गया हो,…
पूरा पढ़ेंधारा 414 - चुराई हुई संपत्ति छिपाने में सहायता करना
चुराई हुई संपत्ति छिपाने में सहायता करना जो कोई ऐसी संपत्ति को छिपाने में, या व्ययनित करने में, या इधर उधर करने में स्वेच्छया सहायता करेगा, जिसके विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई संपत्ति है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि 3 वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने…
पूरा पढ़ेंचोरी की संपत्ति।
(1) वह संपत्ति जिसका कब्ज़ा चोरी, जबरन वसूली, डकैती या धोखाधड़ी द्वारा हस्तांतरित किया गया हो, और वह संपत्ति जिसका आपराधिक रूप से दुरुपयोग किया गया हो या जिसके संबंध में आपराधिक विश्वासघात किया गया हो, चोरी की संपत्ति कहलाती है, चाहे हस्तांतरण भारत के भीतर हुआ हो या भारत के बाहर, या दुरुपयोग या विश्वासघात किया गया हो,…
पूरा पढ़ेंधारा 415 - छल
छल जो कोई किसी व्यक्ति से प्रवंचना कर उस व्यक्ति को, जिसे इस प्रकार प्रवंचित किया गया है, कपटपूर्व या बेईमानी से उत्प्रेरित करता है कि वह कोई संपत्ति किसी व्यक्ति को परिदत्त कर दे, या यह सम्मति दे दे कि कोई व्यक्ति किसी संपत्ति को रख रखे या साशय उस व्यक्ति को, जिसे इस प्रकार प्रवंचित किया गया है, उत्प्रेरित करता है कि…
पूरा पढ़ेंबेईमानी करना।
(1) जो कोई किसी व्यक्ति को धोखा देकर, कपटपूर्वक या बेईमानी से उस धोखे से पीड़ित व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति को कोई संपत्ति सौंपने के लिए प्रेरित करता है, या किसी अन्य व्यक्ति को कोई संपत्ति अपने पास रखने की सहमति देने के लिए प्रेरित करता है, या जानबूझकर उस धोखे से पीड़ित व्यक्ति को ऐसा कोई कार्य करने या न करने के लिए…
पूरा पढ़ेंधारा 416 - प्रतिरूपण द्वारा छल
प्रतिरूपण द्वारा छल कोई व्यक्ति “प्रतिरूपण द्वारा छल करता है”, यह तब कहा जाता है, जब वह यह अपदेश करके कि वह कोई अन्य व्यक्ति है, या एक व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति के रूप में जानते हुए प्रतिस्थापित करके, या यह व्यपदिष्ट करके कि वह या कोई अन्य व्यक्ति, कोई ऐसा व्यक्ति है, जो वस्तुतः उससे या अन्य व्यक्ति से भिन्न है, छल…
पूरा पढ़ेंप्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी।
(1) किसी व्यक्ति को प्रतिरूपण द्वारा धोखा देने वाला कहा जाता है यदि वह किसी अन्य व्यक्ति होने का ढोंग करके, या जानबूझकर किसी व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति के स्थान पर प्रतिस्थापित करके, या यह दर्शाकर कि वह या कोई अन्य व्यक्ति वास्तव में जो व्यक्ति है उससे भिन्न है, धोखा देता है। स्पष्टीकरण। —यह अपराध तब भी होता है जब…
पूरा पढ़ेंधारा 417 - छल के लिए दंड
छल के लिए दंड जो कोई छल करेगा, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंबेईमानी करना।
(1) जो कोई किसी व्यक्ति को धोखा देकर, कपटपूर्वक या बेईमानी से उस धोखे से पीड़ित व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति को कोई संपत्ति सौंपने के लिए प्रेरित करता है, या किसी अन्य व्यक्ति को कोई संपत्ति अपने पास रखने की सहमति देने के लिए प्रेरित करता है, या जानबूझकर उस धोखे से पीड़ित व्यक्ति को ऐसा कोई कार्य करने या न करने के लिए…
पूरा पढ़ेंधारा 418 - इस ज्ञान के साथ छल करना कि उस व्यक्ति को सदोष हानि हो सकती है जिसका हित संरक्षित रखने के लिए अपराधी आबद्ध है
इस ज्ञान के साथ छल करना कि उस व्यक्ति को सदोष हानि हो सकती है जिसका हित संरक्षित रखने के लिए अपराधी आबद्ध है जो कोई इस ज्ञान के साथ छल करेगा कि यह सम्भाव्य है कि वह तद्द्वारा उस व्यक्ति को सदोष हानि पहुंचाए, जिसका हित उस संव्यवहार में जिससे वह छल संबंधित है, संरक्षित रखने के लिए वह या तो विधि द्वारा, या वैध संविदा…
पूरा पढ़ेंबेईमानी करना।
(1) जो कोई किसी व्यक्ति को धोखा देकर, कपटपूर्वक या बेईमानी से उस धोखे से पीड़ित व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति को कोई संपत्ति सौंपने के लिए प्रेरित करता है, या किसी अन्य व्यक्ति को कोई संपत्ति अपने पास रखने की सहमति देने के लिए प्रेरित करता है, या जानबूझकर उस धोखे से पीड़ित व्यक्ति को ऐसा कोई कार्य करने या न करने के लिए…
पूरा पढ़ेंधारा 419 - प्रतिरूपण द्वारा छल के लिए दंड
प्रतिरूपण द्वारा छल के लिए दंड जो कोई प्रतिरूपण द्वारा छल करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंप्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी।
(1) किसी व्यक्ति को प्रतिरूपण द्वारा धोखा देने वाला कहा जाता है यदि वह किसी अन्य व्यक्ति होने का ढोंग करके, या जानबूझकर किसी व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति के स्थान पर प्रतिस्थापित करके, या यह दर्शाकर कि वह या कोई अन्य व्यक्ति वास्तव में जो व्यक्ति है उससे भिन्न है, धोखा देता है। स्पष्टीकरण। —यह अपराध तब भी होता है जब…
पूरा पढ़ें- IPC §41BNS §2(30)
धारा 41 - “विशेष विधि”
परिभाषाएँ।
- IPC §103BNS §41
धारा 103 - कब संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने तक का होता है
जब संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार मृत्यु का कारण बनने तक विस्तारित हो जाता है।
- IPC §410BNS §317(1)
धारा 410 - चुराई हुई संपत्ति
चोरी की संपत्ति।
- IPC §411BNS §317(2)
धारा 411 - चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना
चोरी की संपत्ति।
- IPC §412BNS §317(3)
धारा 412 - ऐसी संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना जो डकैती करने में चुराई गई है
चोरी की संपत्ति।
- IPC §413BNS §317(4)
धारा 413 - चुराई हुई संपत्ति का अभ्यासतः व्यापार करना
चोरी की संपत्ति।
- IPC §414BNS §317(5)
धारा 414 - चुराई हुई संपत्ति छिपाने में सहायता करना
चोरी की संपत्ति।
- IPC §415BNS §318(1)
धारा 415 - छल
बेईमानी करना।
- IPC §416BNS §319(1)
धारा 416 - प्रतिरूपण द्वारा छल
प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी।
- IPC §417BNS §318(2)
धारा 417 - छल के लिए दंड
बेईमानी करना।
- IPC §418BNS §318(3)
धारा 418 - इस ज्ञान के साथ छल करना कि उस व्यक्ति को सदोष हानि हो सकती है जिसका हित संरक्षित रखने के लिए अपराधी आबद्ध है
बेईमानी करना।
- IPC §419BNS §319(2)
धारा 419 - प्रतिरूपण द्वारा छल के लिए दंड
प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी।
