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धारा 128 - लोक सेवक का स्वेच्छया राजकैदी या युद्धकैदी को निकल भागने देना
लोक सेवक का स्वेच्छया राजकैदी या युद्धकैदी को निकल भागने देना जो कोई लोक सेवक होते हुए और किसी राजकैदी या युद्धकैदी को अभिरक्षा में रखते हुए, स्वेच्छया ऐसे कैदी को किसी ऐसे स्थान से जिसमें ऐसा कैदी परिरुद्ध है, निकल भागने देगा, वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो…
पूरा पढ़ेंकिसी लोक सेवक द्वारा स्वेच्छा से किसी राजकीय कैदी या युद्धबंदी को भागने की अनुमति देना।
जो कोई लोक सेवक होते हुए किसी राजकीय कैदी या युद्धबंदी की हिरासत में रहते हुए स्वेच्छा से ऐसे कैदी को उस स्थान से भागने देता है जहाँ वह कैदी कैद है, उसे आजीवन कारावास या किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 156 - उस स्वामी या अधिभोगी के अभिकर्ता का दायित्व, जिसके फायदे के लिए बल्वा किया जाता है
उस स्वामी या अधिभोगी के अभिकर्ता का दायित्व, जिसके फायदे के लिए बल्वा किया जाता है जब कभी ऐसे व्यक्ति के फायदे के लिए या ऐसे व्यक्ति की ओर से बल्वा किया जाए, जो किसी भूमि का, जिसके विषय में ऐसा बल्वा हो, स्वामी हो या अधिभोगी हो या जो ऐसी भूमि में या बल्वे के पैदा करने वाले किसी विवादग्रस्त विषय में कोई हित रखने का…
पूरा पढ़ेंजिस भूमि पर गैरकानूनी सभा या दंगा होता है, उस भूमि के स्वामी, कब्जेदार आदि की जिम्मेदारी।
(1) जब भी कोई गैरकानूनी सभा या दंगा होता है, तो उस भूमि का स्वामी या अधिभोगी जिस पर ऐसी गैरकानूनी सभा आयोजित की जाती है या ऐसा दंगा किया जाता है, और ऐसी भूमि में हित रखने वाला या दावा करने वाला कोई भी व्यक्ति, एक हजार रुपये से अधिक के जुर्माने से दंडित किया जाएगा, यदि वह या उसका एजेंट या प्रबंधक, यह जानते हुए कि ऐसा…
पूरा पढ़ें- IPC §128BNS §156
धारा 128 - लोक सेवक का स्वेच्छया राजकैदी या युद्धकैदी को निकल भागने देना
किसी लोक सेवक द्वारा स्वेच्छा से किसी राजकीय कैदी या युद्धबंदी को भागने की अनुमति देना।
- IPC §156BNS §193(3)
धारा 156 - उस स्वामी या अधिभोगी के अभिकर्ता का दायित्व, जिसके फायदे के लिए बल्वा किया जाता है
जिस भूमि पर गैरकानूनी सभा या दंगा होता है, उस भूमि के स्वामी, कब्जेदार आदि की जिम्मेदारी।
