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सिविल मामलों में अध्यारोपित (लांछन लगाना ) आचरण साबित करने के लिए शील विसंगत है
सिविल मामलों में यह तथ्य कि किसी सम्पृक्त व्यक्ति का शील ऐसा है कि जो उस पर अध्यारोपित किसी आचरण को अधिसंभाव्य या अनधिसंभाव्य बना देता है, विसंगत है वहाँ तक के सिवाय जहाँ तक कि ऐसा शील अन्यथा सुसंगत तथ्यों से प्रकट होता है ।
पूरा पढ़ेंदीवानी मामलों में, आरोपित आचरण को साबित करने के लिए चरित्र का उपयोग अप्रासंगिक है।
दीवानी मामलों में, यह तथ्य कि संबंधित व्यक्ति का चरित्र ऐसा है जिससे उस पर आरोपित किसी भी आचरण की संभावना या असंभावना सिद्ध होती है, अप्रासंगिक है, सिवाय उस हद तक जहां तक ऐसा चरित्र अन्य प्रासंगिक तथ्यों से स्पष्ट होता है।
पूरा पढ़ेंवे तथ्य, जिनकी न्यायिक अवेक्षा न्यायालय को करनी होगी
न्यायालय निम्नलिखित तथ्यों की न्यायिक अवेक्षा करेगा :- १)भारत के राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त समस्त विधियाँ; २)यूनाइटेड किंगडम की पार्लियामेण्ट द्वारा पारित या एतत्पश्चात् पारित किए जाने वाले समस्त पब्लिक ऐक्ट तथा वे समस्त स्थानीय और पर्सनल ऐक्ट, जिनके बारे में यूनाइटेड किंगडम की पार्लियामेण्ट ने यह निर्दिष्ट किया है कि…
पूरा पढ़ेंजिन तथ्यों का न्यायालय न्यायिक संज्ञान लेगा।
(1) न्यायालय निम्नलिखित तथ्यों का न्यायिक संज्ञान लेगा, अर्थात्:-- (क) भारत के भूभाग में लागू सभी कानून, जिनमें बाह्य क्षेत्रीय प्रभाव वाले कानून भी शामिल हैं; (ख) भारत द्वारा किसी देश या देशों के साथ की गई अंतर्राष्ट्रीय संधि, समझौता या सम्मेलन, या अंतर्राष्ट्रीय संघों या अन्य निकायों में भारत द्वारा लिए गए निर्णय;…
पूरा पढ़ें- IEA §52BSA §46
सिविल मामलों में अध्यारोपित (लांछन लगाना ) आचरण साबित करने के लिए शील विसंगत है
दीवानी मामलों में, आरोपित आचरण को साबित करने के लिए चरित्र का उपयोग अप्रासंगिक है।
- IEA §57BSA §52
वे तथ्य, जिनकी न्यायिक अवेक्षा न्यायालय को करनी होगी
जिन तथ्यों का न्यायालय न्यायिक संज्ञान लेगा।
