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2 प्रविष्टियाँ
भागीदारों , भू-स्वामी और अभिधारी, मालिक और अभिकर्ता के मामलों में सबूत का भार
जबकि प्रश्न यह है कि क्या कोई व्यक्ति भागिदार, भू-स्वामी और अभिधारी या मालिक और अभिकर्ता है, और यह दर्शित कर दिया गया है कि वे इस रुप में कार्य करते रहे है, तब यह साबित करने का भार कि क्रमश: इस संबंधों में वे परस्पर अवस्थित (स्थित नहीं ) नहीं है या अवस्थित होने से परिविरत (स्थित होना समाप्त) हो चुके है, उस व्यक्ती पर…
पूरा पढ़ेंसाझेदारों, मकान मालिक और किरायेदार, तथा मालिक और एजेंट के मामलों में रिश्ते को साबित करने का भार।
जब यह प्रश्न उठता है कि क्या व्यक्ति साझेदार हैं, मकान मालिक और किरायेदार हैं, या मालिक और एजेंट हैं, और यह सिद्ध हो चुका है कि वे इसी रूप में कार्य कर रहे हैं, तो यह साबित करने का भार कि वे क्रमशः उन संबंधों में एक-दूसरे के साथ नहीं हैं, या समाप्त हो चुके हैं, उस व्यक्ति पर है जो इसकी पुष्टि करता है।
पूरा पढ़ेंविवाहित स्थिति के दौरान में जन्म होना धर्भजत्व का निश्चायक सबूत है
यह तथ्य कि किसी व्यक्ती का जन्म उसकी माता और किसी पुरुष के बीच विधिमान्य विवाह के कायम रहते हुए, या उसका विघटन होने के उपरान्त माता के अविवाहित रहते हुए दो सौ अस्सी दिन के भीतर हुआ था, इस बात का निश्चायक सबूत होगा कि वह उस पुरुष का धर्मज पुत्र है, जब तक कि यह दर्शित न किया जा सके कि विवाह के पक्षकारों की परस्पर पहुँच…
पूरा पढ़ेंविवाह के दौरान जन्म, वैधता का निर्णायक प्रमाण है।
यदि किसी व्यक्ति का जन्म उसकी माता और किसी पुरुष के बीच वैध विवाह के दौरान हुआ हो, या विवाह विच्छेद के दो सौ अस्सी दिनों के भीतर हुआ हो, और माता अविवाहित रही हो, तो यह इस बात का निर्णायक प्रमाण होगा कि वह उस पुरुष की वैध संतान है, जब तक कि यह सिद्ध न हो जाए कि विवाह के पक्षकारों का उस समय एक-दूसरे से कोई संबंध नहीं था…
पूरा पढ़ें- IEA §109BSA §112
भागीदारों , भू-स्वामी और अभिधारी, मालिक और अभिकर्ता के मामलों में सबूत का भार
साझेदारों, मकान मालिक और किरायेदार, तथा मालिक और एजेंट के मामलों में रिश्ते को साबित करने का भार।
- IEA §112BSA §116
विवाहित स्थिति के दौरान में जन्म होना धर्भजत्व का निश्चायक सबूत है
विवाह के दौरान जन्म, वैधता का निर्णायक प्रमाण है।
