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धारा 205. मजिस्ट्रेट अभियुक्त की वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति दे सकेगा
205. मजिस्ट्रेट अभियुक्त की वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति दे सकेगा (1) जब कभी मजिस्ट्रेट समन जारी करता है, तब यदि वह ऐसा करने का कारण देखता है तो वह अभियुक्त की वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति दे सकेगा और उसे अपने प्लीडर द्वारा हाजिर होने की अनुज्ञा दे सकेगा। (2) किंतु मामले की जांच या विचारण करने वाला मजिस्ट्रेट,…
पूरा पढ़ेंमजिस्ट्रेट अभियुक्त की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे सकता है।
(1) जब भी कोई मजिस्ट्रेट समन जारी करता है, तो वह, यदि उसे ऐसा करने का कारण दिखाई दे, तो अभियुक्त की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे सकता है और उसे अपने अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होने की अनुमति दे सकता है। (2) परन्तु मामले की जाँच करने वाला या मुकदमा चलाने वाला मजिस्ट्रेट, अपने विवेक से, कार्यवाही के किसी भी चरण में,…
पूरा पढ़ेंधारा 228. आरोप की विरचना
228. आरोप की विरचना (1) यदि पूर्वोक्त रूप से विचार करने और सुनवाई के पश्चात् न्यायाधीश की यह राय है कि यह उपधारणा करने का आधार है कि अभियुक्त ने कोई ऐसा अपराध किया है जो— (क) केवल सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय नहीं है, तो वह अभियुक्त के विरुद्ध आरोप विरचित कर सकेगा और आदेश द्वारा मामला विचारण के लिए मुख्य न्यायिक…
पूरा पढ़ेंआरोप का निर्धारण।
(1) यदि उपर्युक्त विचार-विमर्श और सुनवाई के बाद न्यायाधीश की यह राय हो कि यह अनुमान लगाने का आधार है कि अभियुक्त ने ऐसा अपराध किया है जो— (क) यदि मामला सत्र न्यायालय द्वारा विशेष रूप से विचारणीय नहीं है, तो वह अभियुक्त के विरुद्ध आरोप निर्धारित कर सकता है और आदेश द्वारा मामले को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या प्रथम…
पूरा पढ़ें- CRPC §205BNSS §228
धारा 205. मजिस्ट्रेट अभियुक्त की वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति दे सकेगा
मजिस्ट्रेट अभियुक्त की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे सकता है।
- CRPC §228BNSS §251
धारा 228. आरोप की विरचना
आरोप का निर्धारण।
