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धारा 196. राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसा अपराध करने के आपराधिक षड्यंत्र के लिए अभियोजन
196. राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसा अपराध करने के आपराधिक षड्यंत्र के लिए अभियोजन (1) कोई न्यायालय— (क) भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के अध्याय 6 के अधीन, या धारा 153क, धारा 295क या धारा 505 की उपधारा (1) के अधीन दंडनीय किसी अपराध का, या (ख) ऐसा अपराध करने के किसी आपराधिक षड्यंत्र का, या (ग) ऐसे किसी…
पूरा पढ़ेंराज्य के विरुद्ध अपराधों और ऐसे अपराध करने की आपराधिक साजिश के लिए अभियोजन।
(1) कोई न्यायालय निम्नलिखित मामलों का संज्ञान नहीं लेगा— (क) भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अध्याय सात या धारा 196, धारा 299 या धारा 353 की उपधारा (1) के तहत दंडनीय कोई अपराध; या (ख) ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षड्यंत्र; या (ग) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 47 में वर्णित किसी भी प्रकार का उकसाना, केंद्र सरकार या…
पूरा पढ़ेंधारा 217. आरोप परिवर्तित किए जाने पर साक्षियों का पुनः बुलाया जाना
217. आरोप परिवर्तित किए जाने पर साक्षियों का पुनः बुलाया जाना जब कभी विचारण के प्रारंभ के पश्चात् न्यायालय द्वारा कोई आरोप परिवर्तित किया जाता है या उसमें परिवर्धन किया जाता है, तब अभियोजक को और अभियुक्त को यह अनुज्ञात होगा कि वे— (क) किसी ऐसे साक्षी को, जिसकी परीक्षा की जा चुकी हो, पुनः बुलाएं या पुनः समन करें और ऐसे…
पूरा पढ़ेंआरोप में परिवर्तन होने पर गवाहों को पुनः बुलाना।
जब भी मुकदमे की शुरुआत के बाद न्यायालय द्वारा आरोप में परिवर्तन या कोई आरोप जोड़ा जाता है, तो अभियोजक और आरोपी को इसकी अनुमति दी जाएगी— (क) किसी भी गवाह को, जिसकी पहले जांच की जा चुकी हो, वापस बुलाना या पुनः तलब करना और ऐसे परिवर्तन या परिवर्धन के संबंध में उसकी जांच करना, जब तक कि न्यायालय, लिखित रूप में दर्ज किए…
पूरा पढ़ें- CRPC §196BNSS §217
धारा 196. राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसा अपराध करने के आपराधिक षड्यंत्र के लिए अभियोजन
राज्य के विरुद्ध अपराधों और ऐसे अपराध करने की आपराधिक साजिश के लिए अभियोजन।
- CRPC §217BNSS §240
धारा 217. आरोप परिवर्तित किए जाने पर साक्षियों का पुनः बुलाया जाना
आरोप में परिवर्तन होने पर गवाहों को पुनः बुलाना।
