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धारा 362: प्रक्रिया जब जांच या सुनवाई शुरू होने के बाद, मजिस्ट्रेट को लगता है कि मामला कमिट किया जाना चाहिए
362. यदि, किसी अपराध की जांच या मजिस्ट्रेट के समक्ष मुकदमे में, निर्णय पर हस्ताक्षर करने से पहले कार्यवाही के किसी भी चरण में उसे यह प्रतीत होता है कि मामला ऐसा है जिसकी सुनवाई सत्र न्यायालय द्वारा की जानी चाहिए, तो वह प्रतिबद्ध होगा इसमें पहले से निहित प्रावधानों के तहत यह उस न्यायालय में लागू होगा और उसके बाद अध्याय…
पूरा पढ़ेंधारा 323. जब जांच या विचारण प्रारंभ होने के पश्चात् मजिस्ट्रेट यह पाता है कि मामला सुपुर्द किया जाना चाहिए तब प्रक्रिया
323. जब जांच या विचारण प्रारंभ होने के पश्चात् मजिस्ट्रेट यह पाता है कि मामला सुपुर्द किया जाना चाहिए तब प्रक्रिया यदि किसी अपराध की जांच में या किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारण में, निर्णय पर हस्ताक्षर करने से पूर्व कार्यवाहियों के किसी प्रक्रम पर उसे यह प्रतीत होता है कि मामला ऐसा है जिसका विचारण सत्र न्यायालय द्वारा…
पूरा पढ़ेंन्यायालय फैसले में परिवर्तन नहीं करेगा।
जब तक इस संहिता या किसी अन्य कानून द्वारा अन्यथा प्रावधान न किया गया हो, किसी न्यायालय द्वारा किसी मामले का निपटारा करते हुए अपने निर्णय या अंतिम आदेश पर हस्ताक्षर करने के बाद, लिपिकीय या अंकगणितीय त्रुटि को सुधारने के अलावा उसमें कोई परिवर्तन या समीक्षा नहीं की जाएगी।
पूरा पढ़ेंधारा 362. न्यायालय द्वारा निर्णय में परिवर्तन न किया जाना
362. न्यायालय द्वारा निर्णय में परिवर्तन न किया जाना जैसा इस संहिता द्वारा या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, कोई न्यायालय, जब उसने किसी मामले का निपटारा करने वाले अपने निर्णय या अंतिम आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, तब उसमें लेखन-संबंधी या गणित-संबंधी भूल को शुद्ध करने के सिवाय,…
पूरा पढ़ें- BNSS §362CRPC §323
धारा 362: प्रक्रिया जब जांच या सुनवाई शुरू होने के बाद, मजिस्ट्रेट को लगता है कि मामला कमिट किया जाना चाहिए
धारा 323. जब जांच या विचारण प्रारंभ होने के पश्चात् मजिस्ट्रेट यह पाता है कि मामला सुपुर्द किया जाना चाहिए तब प्रक्रिया
- BNSS §403CRPC §362
न्यायालय फैसले में परिवर्तन नहीं करेगा।
धारा 362. न्यायालय द्वारा निर्णय में परिवर्तन न किया जाना
