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स्थानीय निरीक्षण।
(1) कोई न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट किसी भी जांच, मुकदमे या अन्य कार्यवाही के किसी भी चरण में, पक्षों को विधिवत सूचना देने के बाद, उस स्थान का दौरा और निरीक्षण कर सकता है जहां कथित रूप से कोई अपराध किया गया हो, या किसी अन्य स्थान का जिसे वह ऐसी जांच या मुकदमे में दिए गए साक्ष्यों का उचित मूल्यांकन करने के उद्देश्य से…
पूरा पढ़ेंधारा 310. स्थानीय निरीक्षण
310. स्थानीय निरीक्षण (1) कोई न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के किसी भी प्रक्रम पर, पक्षकारों को सम्यक् सूचना देने के पश्चात्, किसी ऐसे स्थान का, जिसमें किसी अपराध का किया जाना अभिकथित है, अथवा किसी अन्य ऐसे स्थान का, जिसका ऐसी जांच या विचारण में दिए गए साक्ष्य का सम्यक् मूल्यांकन करने के…
पूरा पढ़ेंजब रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार को सिविल न्यायालय माना जाएगा।
जब राज्य सरकार ऐसा निर्देश देती है, तो पंजीकरण अधिनियम, 1908 (16 ऑफ 1908) के तहत नियुक्त कोई रजिस्ट्रार या कोई उप-रजिस्ट्रार धारा 384 और 385 के अर्थ में सिविल न्यायालय माना जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 347. रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार कब सिविल न्यायालय समझा जाएगा
347. रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार कब सिविल न्यायालय समझा जाएगा जब राज्य सरकार ऐसा निदेश देती है, तब रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) के अधीन नियुक्त कोई रजिस्ट्रार या कोई उप-रजिस्ट्रार धारा 345 और धारा 346 के अर्थ के अंतर्गत सिविल न्यायालय समझा जाएगा।
पूरा पढ़ें- BNSS §347CRPC §310
स्थानीय निरीक्षण।
धारा 310. स्थानीय निरीक्षण
- BNSS §386CRPC §347
जब रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार को सिविल न्यायालय माना जाएगा।
धारा 347. रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार कब सिविल न्यायालय समझा जाएगा
