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बरी होना।
यदि अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों पर विचार करने, आरोपी से पूछताछ करने और इस मुद्दे पर अभियोजन और बचाव पक्ष की बात सुनने के बाद न्यायाधीश को लगता है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि आरोपी ने अपराध किया है, तो न्यायाधीश बरी करने का आदेश दर्ज करेगा।
पूरा पढ़ेंबरी होना।
यदि अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों पर विचार करने, आरोपी से पूछताछ करने और इस मुद्दे पर अभियोजन और बचाव पक्ष की बात सुनने के बाद न्यायाधीश को लगता है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि आरोपी ने अपराध किया है, तो न्यायाधीश बरी करने का आदेश दर्ज करेगा।
पूरा पढ़ेंदोषमुक्ति या दोषसिद्धि।
(1) यदि मजिस्ट्रेट धारा 277 में निर्दिष्ट साक्ष्य और ऐसे अतिरिक्त साक्ष्य, यदि कोई हो, जो वह स्वयं प्रस्तुत करवाए, पर विचार करने के बाद अभियुक्त को निर्दोष पाता है, तो वह बरी करने का आदेश दर्ज करेगा। (2) जहाँ मजिस्ट्रेट धारा 364 या धारा 401 के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही नहीं करता है, तो यदि वह अभियुक्त को दोषी…
पूरा पढ़ेंधारा 255. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
255. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि (1) यदि मजिस्ट्रेट, धारा 254 में निर्दिष्ट साक्ष्य तथा ऐसा अतिरिक्त साक्ष्य, यदि कोई हो, जो वह स्वप्रेरणा से पेश कराए, लेने पर अभियुक्त को दोषी नहीं पाता है, तो वह दोषमुक्ति का आदेश अभिलिखित करेगा। (2) जहां मजिस्ट्रेट धारा 325 या धारा 360 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही नहीं करता है, वहां…
पूरा पढ़ें- BNSS §255CRPC §232
बरी होना।
- BNSS §278CRPC §255
दोषमुक्ति या दोषसिद्धि।
धारा 255. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
