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अग्रिम जमानत आवेदन — भा.ना.सु.सं. धारा 482 (दं.प्र.सं. धारा 438) के अधीन रूपरेखा
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Exactly as written — '318(4), 61(2) BNS'.
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The document
न्यायालय: श्रीमान् सत्र न्यायाधीश, ________________
(या: उच्च न्यायालय ................)
आपराधिक प्रकीर्ण (अग्रिम जमानत) आवेदन संख्या ................ सन् ................
________________
निवासी ________________ ...... आवेदक
बनाम
राज्य, द्वारा थानाध्यक्ष, थाना ________________ ...... विपक्षी
एफ़आईआर संख्या ________________ दिनांक ________________, थाना ________________
धाराएँ: bns-2023:111
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 482 [दं.प्र.सं. धारा 438] के अधीन गिरफ़्तारी की स्थिति में जमानत के निदेश हेतु आवेदन
किस उपबंध के अधीन: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 482 [पहले दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 438]।
** यह रूपरेखा है, जिसे अधिवक्ता पूरा करेगा **
अग्रिम जमानत आवेदन केवल दाखिल नहीं होता, उस पर बहस होती है। अधिवक्ता से मिलने से पहले तथ्यों को क्रम में रखने के लिए इसका उपयोग कीजिए, या ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ़्त कानूनी सहायता माँगिए। भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 65 या धारा 70(2) के आरोप पर धारा 482 लागू नहीं होती।
आवेदक सादर निवेदन करता है:
1. आवेदक को यह विश्वास करने का कारण है कि उपर्युक्त एफ़आईआर में अजमानतीय अपराध के आरोप पर उसे गिरफ़्तार किया जा सकता है।
2. आरोप, और उन पर आवेदक का उत्तर:
________________
3. आधार (जो लागू हों उन्हें रखें, बाकी जोड़ें):
(क) आवेदक निर्दोष है और उसे झूठा फँसाया गया है; आरोप आवेदक को क्षति पहुँचाने या अपमानित करने के उद्देश्य से लगाया गया है।
(ख) आवेदक का कोई आपराधिक पूर्ववृत्त नहीं है। [हर पुराने मामले का ईमानदारी से उल्लेख कीजिए — छिपाना घातक है।]
(ग) आवेदक का स्थायी निवास और समाज में जड़ें हैं, वह भागेगा नहीं।
(घ) आवेदक अन्वेषण में सहयोग करेगा और साक्ष्य से छेड़छाड़ या साक्षियों को प्रभावित नहीं करेगा।
(ङ) जहाँ अपराध सात वर्ष तक से दंडनीय है, वहाँ भा.ना.सु.सं. धारा 35(3) [दं.प्र.सं. धारा 41क] गिरफ़्तारी के बजाय हाज़िरी का नोटिस अपेक्षित करती है (अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य, (2014) 8 SCC 273)।
(च) इसी अनुतोष के लिए कोई पूर्व आवेदन दाखिल नहीं हुआ है / पूर्व आवेदन दिनांक ................ को निपटाया गया।
4. अग्रिम जमानत को किसी नियत अवधि तक सीमित करना आवश्यक नहीं है, और वह साधारणतः विचारण के अंत तक चल सकती है (सुशीला अग्रवाल बनाम राज्य (एनसीटी दिल्ली), (2020) 5 SCC 1)।
5. आवेदक भा.ना.सु.सं. धारा 482(2) के अधीन लगाई गई हर शर्त — पूछताछ के लिए उपलब्ध रहना, साक्षियों को प्रभावित न करना, और अनुमति के बिना भारत न छोड़ना — का पालन करने का वचन देता है।
प्रार्थना: प्रार्थना है कि यह न्यायालय निदेश दे कि उपर्युक्त एफ़आईआर में गिरफ़्तारी की स्थिति में आवेदक को जमानत पर छोड़ा जाए; और सुनवाई तक गिरफ़्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया जाए।
आवेदक / द्वारा अधिवक्ता
________________
स्थान: ________________
दिनांक: ________________What to attach
- A copy of the FIR (from the State police website) or of the complaint.
- A list of every earlier criminal case, and the order on any earlier bail application.
- Proof of residence, job and family — to show roots in the community.
- The lawyer's vakalatnama; for a free lawyer, the District Legal Services Authority.
